पश्चिम बंगाल में कुछ जगहों पर दंगों की खबर है, सरकार ममता बनर्जी की है, तो जाहिर है कि तुष्टीकरण की राजनीति अच्छे से हो रही होगी. जहां पश्चिम बंगाल में दंगे हो रहे हैं वहीं इस राज्य से एक ऐसी खबर सामने आई है जो राहत की है, सुकून की है और एक ऐसे महिला अधिकारी की है जिसे जानने के बाद आप भी तारीफ करने से खुद को रोक नहीं पाएंगे. दरअसल पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में कुछ लोग हाथों में लाठी-डंडे लेकर लालगढ़ जंगल की तरफ बढ़े जा रहे थे उन्हें रोकने के लिए महिला अधिकारी ने उनके सामने कुछ ऐसा किया कि आज सब उसकी तारीफ कर रहे हैं.

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आप भी तारीफ किये बिना नहीं रह सकते

जनसत्ता की एक खबर के मुताबिक पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में एडिशनल डिविज़नल फोरेस्ट ऑफिसर के पद पर तैनात पूरबी महतो की आज हर कोई जमकर तारीफ कर रहा है. वाकई में उन्होंने काम ही ऐसा किया है कि जिसे जानकर आप भी उनकी तारीफ किये बिना नहीं रह सकते हैं. दरअसल यहां के आदिवासी समुदाय फेस्टिवल हंट के नाम पर जंगल में जाकर  शिकार करते हैं और ये प्रथा कई सालों से चली आ रही है.

पूरबी महतो

तारीख 27 मार्च थी और दिन मंगलवार था, करीब 5 हजार आदिवासी हाथों में नुकीले भाले और लाठी डंडे लेकर लालगढ़ के पास के जंगल में शोर मचाते हुए चले जा रहे थे. ऐसा इसलिए था कि क्योंकि आदिवासी समुदाय अपने फेस्टिवल हंट यानी महाशिकार की तैयारी में थे. वो जंगल जाकर शिकार करते और ये उनकी परंपरा में शामिल था.

की बेहद भावुक अपील

मिदनापुर एडिशनल डिविजनल फारेस्ट ऑफिसर पूरबी महतो हजारों बेगुनाहों को मरने से बचाना चाहती थीं, इसके लिए उन्होंने पहले तो कानून का भय दिखाया और एक अभियान भी चलाया लेकिन इस परंपरा के चलते इसपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा. अंत में पूरबी महतो ने एक बहुत ही भावुक अपील की, इस अपील का ऐसा असर हुआ कि आदिवासी समुदाय के लोग बिना शिकार किये ही वापस चले गये.

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“आपको शिकार करने जाना ही है तो पहले मेरा शिकार कीजिये”

दरअसल हुआ कुछ यूं कि महाशिकार के लिए जब लोग जंगल के लिए बढ़ रहे थे तो इसकी सूचना ऑफिसर पूरबी महतो को पता चली तो वो लोगों को रोकने के लिए उस रास्ते पर पहुंची जहां से लोग जंगल के लिए जा रहे थे. उन्हें रोकने के लिए वो एक बुजुर्ग के सामने बैठ गईं और उनसे मार्मिक अपील करते हुए कहा कि “अगर आपको शिकार करने जाना ही है तो पहले आप इन लाठी डंडों से मेरा शिकार कीजिये फिर आप आगे जाइये”

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“हम बिना शिकार के घर वापस जाते, लेकिन उस ऑफिसर ने…”

बस फिर क्या था इस मार्मिक अपील के बाद आदिवासी समुदाय के लोग बिना शिकार किये ही अपने घर वापस लौट गये. इस महाशिकार और आदिवासी लोगों का नेतृत्व कर रहे हैमब्राम का कहना है कि:

“महाशिकार त्यौहार हमारी परंपरा में शामिल है और ऐसा नहीं होता है कि हम बिना शिकार के घर वापस जाएँ, लेकिन उस ऑफिसर की आँखों में आंसू थे और हमारे बुजुर्गों के पैरों को पकड़कर उसने ऐसी अपील की जिसके बाद हमें बिना शिकार ही वापस घर जाना पड़ा.”

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पूरबी महतो ने कहा कि…

वहीं ऑफिसर पूरबी महतो का कहना है कि उन्होंने अपने पिछले 17 साल के करियर में ऐसा पहली बार किया है. वैसे सही भी है कि पूरबी महतो जैसी ऑफिसर को इस देश को बहुत जरूरत है, जो समय आने पर अपनी हिम्मत और इच्छाशक्ति दिखाए और कुछ अच्छा करे. जिससे देश में बदलाव आ सके.