दलित संगठनों ने एससी-एसटी एक्‍ट को लेकर खूब तूफान खड़ा किया था जिसके कारण भारत को सोमवार के दिन बंद तक करना  पड़ा था.इस विवाद के दौरान काफी लोगों को चोट आई  बहुत से लोगों की दुकान व गाड़ियों को फूक दिया साथ ही अब तक मिली खबर के अनुसार 10 लोगों की जान तक चली गई, इस  दलित आंदोलत की लड़ाई के बीच ना तो  किसी ने बच्चे को देखा, ना महिला ना ही बुर्जग  जो रास्ते में मिलता गया उसी लोग निशाना बना रहे थे, लेकिन आप नहीं जानते होगें कि देश में कुछ दलित एसे भी है जो कि देश में नहीं बल्कि विदेशों में भी अपनी साख जमा चुके हैं,इनका नाम सुनकर चौक उठेंगे आप..

 

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दरअसल हम यहां भारत के एक ऐसे दलित के बारे में बात कर रहे हैं जिनका नाम दुनिया के सबसे  अमीर व्यक्तियों में से लिया जाता है,  बता दें कि इनका नाम राजेश सरैया है जो कि भारत के सबसे पहले दलित अरबपतियों में से एक हैं. इनके  व्यापार की बात करें तो भारत से लेकर  यूक्रेन, रूस और जर्मनी जैसे देशों में अपना नाम काम चुके हैं, कहा जाता है कि यूक्रेन में मौजूग  SteelMont  कंपनी जिसमें यह चीफ एग्‍जीक्‍यूटिव ऑफीसर हैं।इस कंपनी से इनकी कमाई करीब 1200 करोड़ रुपए बताई जाती है,

 

पिता नहीं चाहते थे कि इनका नाम नाथू या कालू जैसा हो

 

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इऩका जन्म यूपी के सीतापुर में मौजूद सरैया सैनी गांव में  नाथराम के घर हुआ था, इनके पिता यानि कि नाथराम नहीं चाहतें कि इनका बेटा बाकि दलितों के तरह नाथू, कालू जैसा  बने इसीलिए उन्होंने दलितों के  परंपरिक नामों नाथू, कालू ना रखकर इऩका नाम राजेश रखा, इनका मानना था कि मेरा बेटा पढ़-लिखकर सभी दलितों से कुछ अलग  करें, जिसके लिए इन्होंने राजेश को खूब पढाया लिखाया.

25 साल से यूरोप में पर बसेंगे तो भारत में 

 

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राजेश ने सबसे पहले अपनी पढ़ाई की शुरुआत  देहरादून से की थी, इनके बाद इनके पिता ने इनको रुस भेज दिया जिसके बाद राजेश ने वहां जाकर एयरोनॉटिक्‍स इंजीनियरिंग की  और इसके बाद इन्होंने मेटल कंपनी खोलने की य़ोजना बनाई और फिर SteelMont कंपनी की यूक्रेन में  नींव रख दी. अब राजेश देश नहीं बल्कि विदोशों में भी अरबपति लोगों में से एक है. राजेश का कहना है कि मुझे अपने भारत देश पर बहुत गर्व है  मै काफी सालों से बाहर रहता हूं परंतु  मेरे बच्चे अभी भी भारत का पासपोर्ट हमेशा अपने पास संभाल कर रखते हैं.

दलित होने के कारण नहीं हुई कोई परेशानी 

राजेश का कहना है कि उन्हें अपने देश भारत से बहुत प्यार है वह जल्द ही वापस इडिया में बसना चाहते हैं वह य़हां पर फूड प्रोसेसिंग की यूनिट खोलने की योजना बना रहे हैं.

राजेश ने यह सभी बातें खुद मीडिया को इंटरव्यू देते समय कही थी  कि मैने भारत व भारत के बाहर काम किया परंतु दलित होने के कारण मुझे कोई भी परेशानी नहीं सहनी पड़ी, मुझे हर जगह सम्मान मिला, इतना ही नहीं बल्कि भारत सरकार उनको दो बड़े अवॉर्ड भी दे चुकी हैं, जिसमें से उनको  2014 का पद्मश्री और 2012 का प्रवासी भारतीय अवॉर्ड  से नवाजा गय़ा था.