यह बात उस समय की है जब विदर्भ देश में भीष्मक नामक एक परम तेजस्वी राजा का राज हुआ करता था और उनकी राजधानी कुण्डिनपुर थी, कहा जाता है कि इस राजा के पांच पुत्र और एक पुत्री थी, उनकी पुत्री के बारे में कहा जाता है कि वह इतनी तेजस्वी थी कि उनको लोग लक्ष्मी के रुप के समान मानते थे.

विदर्भ देश के राजा भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी ने ही इतिहास में सबसे पहला प्रेम पत्र लिखा था .राजकुमारी  रुक्मिणी दिखने में बेहद ही खूबसूरत थी वह श्री कृष्ण से मन ही मन बहुत प्यार करती थी. उस समय श्री कृष्ण की वीरता के किस्से चारों ओर फैले हुए थे जिसके कारण  उनके माता-पिता भी रुक्मिणी की शादी श्री कृष्ण से करवाना चाहते थे.

 

कहानी अनुसार बताया जाता है कि रुक्मिणी का बड़ा भाई रुक्मी जो कि श्री कृष्ण को अपना दुश्मन समझता था जिसके कारण उसने इस विवाह से इंकार कर दिया और रुक्मिणी का विवाह अपने चचेरे भाई शिशुपाल से तय कर दिया था, सबसे दुख की बात तो यह थी कि  शिशुपाल काफी घंमडी व्यक्ति था जिसके वजह से रुक्मिणी उसे बिल्कुल पसंद नहीं करती थी.

इस विवाद को देखने के बाद रुक्मिणी ने श्रीकृष्ण को प्रेम पत्र लिखने की ठान ली और एक दासी के हाथ भगवान श्रीकृष्ण को यह पत्र पहुंचा दिया. भगवा श्रीकृष्ण भी लक्ष्मीस्वरुप रुक्मिणी के बारे में सब कुछ जानते थे, इसीलिए उन्होने अपने भाई बलराम संग रुक्मिणी को साथ में ले जाने की योजना बनाई और रुक्मिणी  के विवाह के दिन ही श्रीकृष्ण सबके सामने उनका उपहरण करके अपने महल ले आए और फिर इस तरह से राजकुमारी रुक्मिणी  को अपना प्रेम की प्राप्ति हो गई.