पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी की सरकार है लेकिन जिस तरीके से वो तानाशाही का शासन कर रही हैं उससे राज्य के लोकतांत्रिक ढांचे पर खतरा मंडरा रहा है. बता दें कि आये दिन ममता सरकार पर आरोप लगते रहते हैं कि वोटों के लिए वो तुष्टीकरण की राजनीति कर रही हैं. आरोप तो ये भी लगते रहते हैं कि वो मुस्लिम वोटों को खुश करने के लिए हिन्दुओं के पर्व-त्यौहारों पर सख्ती वाले निर्देश देती रहती हैं. फ़िलहाल हर बार न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद उन्हें मुंह की खानी पड़ती हैं. अब एक और मामला पश्चिम बंगाल से आया है जिसमें ममता सरकार की खूब किरकिरी हो रही है.

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TMC के कार्यकर्ता नामांकन के दौरान किये थे हिंसा

बता दें कि पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव होने हैं लेकिन सत्ताधारी TMC पर बीजेपी ने लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाया है. 6 मार्च को बीजेपी की तरफ से लगाये गये इस आरोप में कहा गया था कि “TMC के लोग बीजेपी के उम्मीदवारों को नामांकन नहीं करने दे रहे और हिंसा पर उतर आये हैं.”  बता दें कि परगना जिले के उस्ती में नामांकन दाखिल करने के दौरान TMC और बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प हो गयी थी. बता दें कि नामांकन की अंतिम तारीख 9 अप्रैल थी और चुनाव मई के पहले हफ्ते में होने हैं.

कलकत्ता हाईकोर्ट

हाईकोर्ट गयी थी बीजेपी

नामांकन के दौरान हुई हिंसा को देखते हुए राज्य निर्वाचन आयोग ने नामांकन की अंतिम तारीख 9 अप्रैल से बढ़ाकर 10 अप्रैल कर दी थी लेकिन इस नये आदेश के कुछ घंटों के बाद ही ये आदेश वापस ले लिया था. जिसके बाद बीजेपी ने सुप्रीम कोर्ट की तरफ रुख किया था. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बीजेपी को हाईकोर्ट जाने को कहा था.

बीजेपी के लिए आई ख़ुशी की खबर

पंचायत चुनाव में जिस तरीके से सत्ताधारी TMC अपनी मनमानी और गुंडों का सहारा लेकर बीजेपी उम्मीदवारों को नामांकन करने से रोक चुकी है उसको लेकर कलकत्ता हाईकोर्ट ने अब जो फैसला सुनाया है वो बीजेपी के लिए राहत की खबर हो सकती है. बता दें कि कलकत्ता हाईकोर्ट ने गुरुवार को इस मामले में फैसला सुनाते हुए पंचायत चुनावों पर रोक लगा दी है. इतना ही नहीं, ये रोक 16 अप्रैल तक के लिए लगा दी गयी है. वहीं कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से 16 अप्रैल तक रिपोर्ट देने के आदेश भी दिए हैं. अब इस फैसले का मतलब ये हुआ कि जबतक चुनाव आयोग अपनी रिपोर्ट सौंपेगा तबतक पंचायत चुनावों पर रोक लगी रहेगी.

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ममता बनर्जी की अब चुप्पी

इस फैसले के बाद सबसे बड़ा झटका तृणमूल कांग्रेस को लगा है जो अपने हिंसक तरीके से चुनाव को प्रभावित करना चाहती थी. सोचने वाली बात है कि ममता बनर्जी बीजेपी पर EVM से छेड़छाड़ का आरोप लगाती रहती हैं लेकिन जब पश्चिम बंगाल में बीजेपी के उम्मीदवारों को नामांकन तक भरने नहीं दिया जाता और ममता खामोश रहती हैं.

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