“कुछ लड़कों ने रास्ते में मेरी दोस्त के कुर्ते में हाथ डाला था, जींस में हाथ डालने की कोशिश की थी. इतना ही नहीं मेरे साथ भी छेड़खानी हो चुकी है. कॉलेज की कई और लड़कियां भी छेड़खानी का शिकार हुई हैं. आप बताइए कोई कब तक बर्दाश्त करे? हमें सुरक्षा चाहिए और साथ ही हमारी सुरक्षा की कोई ठोस जिम्मेदारी उठाने वाला.”

मुद्दा ये था. कॉलेज की लड़कियां थीं जो आसपास के माहौल से खुद को असुरक्षित महसूस कर रहीं थीं और ऐसे में उन्होंने मांग उठाई कि उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी कॉलेज प्रशासन ले. अपना हक़ पाने के लिए कॉलेज की लड़कियों ने एकता सिंह (abvp की महिला विंग की पूर्व हेड) की अगुवाई में आंदोलन शुरू भी किया. सब ठीक ही जा रहा था लेकिन तभी शांतिपूर्ण ढंग से चल रहा ये आन्दोलन हिंसक हो जाता है. इतना हिंसक की पुलिस को अब लाठीचार्ज करना पड़ता है. इतना होना ही था कि अगले दिन के अखबारों और मीडिया की सुर्खियाँ में BHU ही BHU छा जाता है. अब यहाँ महिला सुरक्षा का मुद्दा पीछे हो जाता है और ख़बरों में बोल्ड शब्दों में ख़बर चलती है कि सारा दोष सरकार का है. अब निशाने पर सरकार आ जाती है.  

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BHU अब छावनी में बदल चुका है 

बीएचयू में छात्राओं के आंदोलन को शनिवार देर रात हिंसक रूप ले लेने के बाद परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया है. 21 और 22 तारीख की रात 2 बजे इस आंदोलन की अगुवाई करने वाली एकता सिंह ने फेसबुक के जरिए पहली आवाज उठाई. एकता ने अपने फेसबुक पोस्ट में लिखा था कि, “साथियों, आज बीएचयू की एक लड़की के साथ महामना की बगिया में बदसलूकी हुई. कल मैं, आप या फिर कोई भी हो सकता है. मार्च में शामिल होकर हमारी आवाज़ और बुलंद कीजिये और छेड़छाड़ के खिलाफ हल्ला बोलिये.”

 

एकता के इस पोस्ट का नतीजा यह हुआ कि सुबह छह बजे तक लड़कियों का भारी हुजूम विरोध में तैयार हो गया था. विरोध प्रदर्शन शुरू होते ही विश्वविद्यालय के आधिकारी लड़कियों से मिलने पहुंचे और उनसे बात कर के ये तय कि इस केस में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी. साथ ही यहाँ ये भी फैसला लिया गया कि कैंपस में लड़कियों के गुजरने वाली जगहों पर सुरक्षा और चौकस की जाएगी. सब ठीक था कॉलेज अधिकारियों द्वारा सूझबूझ कर उठाये इस कदम के बाद लगा था कि अब सब ठीक हो जायेगा लेकिन अफ़सोस तब तक वामपंथी, कांग्रेसी संगठनों ने मोर्चा संभाल लिया था.

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इस बात का खुलासा करते हुए खुद एकता सिंह ने बताया कि…

सवाल ये उठता है कि आखिर अगर सब कुछ शांतिपूर्ण तरीके से चल ही रहा था तो आखिर हिंसा क्यों हुई? इस बात का ख़ुलासा करते हुए खुद एकता ने फेसबुक पर 22 सितंबर की रात में लिखा कि, “बीएचयू में जो भी आंदोलन हो रहा है वो सिर्फ और सिर्फ यहां की आम छात्राओं का है. यहां कुछ अराजक तत्व जो अपने राजनीतिक हित साधने के लिए बीएचयू गेट पर Unsafe BHU लटकाए और महामना की मूर्ति पर कालिख पोतने और लाल झंडा फहराने की कोशिश किए, उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई होनी चाहिए. वो लाल सलामी वाले या तो खुद भाग जाएं या भगा दिए जाएंगे. यह आंदोलन हमारा है किसी भी पॉलिटिकल पार्टी का नहीं. हम सब उनकी कड़ी निंदा करते हैं अपनी घटिया राजनीति बंद कीजिए.”

एकता ने आगे लिखा है कि, “जब परसों रात त्रिवेणी कॉम्प्लेक्स की लड़कियों ने आंदोलन तय किया तभी कुछ राजनीतिक दलों का प्लान भी सुनियोजित तरीक़े से बन गया. अब यह छात्राओं की मांग कम और उनका पोलिटिकल प्रोपेगेंडा ज्यादा हो गया है.”

इसके बाद एकता सिंह ने एक और फेसबुक पोस्ट के जरिए सनसनीखेज ख़ुलासा करते हुए बताया कि, “बीएचयू गेट पर आंदोलन पर बैठी और टीवी चैनलों को इंटरव्यू दे रही कई लड़कियां बाहर से मंगाई गई हैं.” यकीनन इस पोस्ट से एकता ने ना सिर्फ एक ख़ुलासा किया है बल्कि ndtv को भी बेनक़ाब किया है.

 

एकता के इन खुलासों से ये बात तो साफ़ हो चुकी है कि जो आंदोलन (शांतिप्रिय आन्दोलन) एकता ने कॉलेज की कुछ एनी लड़कियों के साथ मिलकर शुरू किया था ये सोचकर की इस आंदोलन से उन्हें और उनकी दोस्तों को सुरक्षा मिलेगी उसे दरअसल उस आंदोलन को कुछ राजनीतिक पार्टियों ने अपनी रोटियां सेकने में इस्तेमाल करने लगीं. यहाँ इससे भी ज्यादा अफ़सोस की बात ये है कि इस मामले पर और मिली जानकारी के अनुसार एकता सिंह को उनके कॉलेज से निष्कासित कर दिया गया है.

 

बता दें कि इस बात की जानकारी देते हुए भी खुद एकता ने फेसबुक पोस्ट के जरिये ये बात साझा की है. उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा कि, “मेरे डीन को रात में हॉस्टल बुलाया गया. मुझे हॉस्टल से निकालने का अल्टीमेटम दिया जा रहा है.” जिसके बाद एकता ने दूसरा पोस्ट किया. दूसरे पोस्ट में एकता ने बताया है कि, “मुझे लग रहा है कि मुझे निष्कासित कर दिया गया है.”

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