लाउडस्पीकर का मुद्दा देश के उन मुद्दों में से एक है जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. आपको बता दें लाउडस्पीकर विवाद तबसे शुरू हुआ जब सोनू निगम ने एक ट्वीट करते हुए लाउडस्पीकर के इस्तेमाल से एतराज़ जताया था. ये भी बता दें कि मुसलमानों ने इस मुद्दे को गलत समझते हुए इसे मस्जिद में लगे लाउडस्पीकर के खिलाफ समझा था असल में सोनू निगम का ट्वीट सभी प्रकार के लाउडस्पीकर के खिलाफ था.

अब इस मुद्दे को लेकर एक बार फिर देश में कुछ ऐसा हुआ है जिसे जानकर आपको यकीन नहीं होगा, दरअसल एक मंदिर पर 8 लाउडस्पीकर लगे होने से वहां लोगों को काफी परेशानी हो रही थी लेकिन मंदिर कि देखभाल करने वाली उन्हें हटाने के लिए नहीं मानी इसके बाद जब पुलिस को इस बात कि खबर हुई तो कुछ ऐसा हुआ जो किसी ने नहीं सोचा होगा..

दरअसल  (27 मई, 2017) को मुस्लिम समुदाय द्वारा एतराज के चलते पुलिस पास के मंदिर से लाउडस्पीकर हटाने के लिए पहुंची थी। इस दौरान अनुराधा शर्मा (46), अनुज (28) और अनुप्रिया ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया साथ ही पुलिस के साथ हाथापाई की। तीनों आरोपियों के खिलाफ सरकारी कर्मचारियों को ड्यूटी छोड़ने और चोट पहुंचाने के लिए आक्रमण या आपराधिक मामले के तहत केस दर्ज अदालत में पेश किया गया। जहां अदालत ने…

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…तीनों को जेल भेज दिया है। खबरों के अनुसार पुलिस मंदिर में लगे आठ लाउडस्पीकरों में से सात को हटाने के लिए पहुंची थी तब महिला ने पुलिस से हाथापाई की। जबकि प्रशासन के अनुसार के वहां सिर्फ एक ही लाउडस्पीकर लगाने की अनुमति थी।

वहीं  कुंदरकी स्टेशन हाउस के अधिकारी राधे श्याम ने मामले में जानकारी देते हुए बताया कि इस हाथापाई में कांस्टेबल ललित कुमार की एक टांग में चोट आई हैं। उन्होंने आगे कहा कि जिस दौरान महिला अपने परिवार के साथ पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई कर रही तब अन्य किसी हिंदू आकर उनके इस विरोध में भाग नहीं लिया।राधे श्याम ने आगे कहा, ‘करीब 6 महीने पहले प्रशासन ने दोनों समुदाय के धार्मिक स्थलों में सिर्फ एक ही लाउडस्पीकर लगाने की अनुमित दी थी। जबकि खुद मंदिर की देखभाल करने वाला शर्मा परिवार मंदिर में पिछले तीन महीनों से जबरन आठ लाउडस्पीकर लगाने की कोशिश कर रहा था। दोनों समुदाय के लोगों ने शर्मा परिवार इस कदम का विरोध किया। इससे बच्चों को पढ़ाई करने में काफी परेशानी होती है।’ उन्होंने आगे जानकारी देते हुए कहा कि अनुराधा शर्मा साल 1997 में एक पत्रकार की हत्या मामले में भी आरोपी हैं और जमानत पर रिहा हैं।

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दूसरी तरफ एसएसपी मनोज तिवारी ने कहा कि पुलिस टीम ने अनुराधा शर्मा से लाउडस्पीकर हटाने के लिए काफी गुजारिश की। लेकिन उन्होंने हमारी बात सुनने से इंकार कर दिया व हाथापाई करने लगीं। वहीं कुंदरकी सब इंस्पेक्टर अनुश तोमर ने बताया कि मुस्मिल समुदाय के लोगों ने लाउडस्पीटर हटवाने के लिए शिकायत की थी।