22 जून को कश्मीर के नौहट्टा की जामिया मस्जिद के बाहर 200-300 लोगों की भीड़ ने जम्मू-कश्मीर के डिप्टी एसपी मोहम्मद अयूब पंडित को पीट-पीट कर मार डालाl जिसके बाद कश्मीर में ही नही बल्कि पूरे देश में इस बात को लेकर काफी रोष है कि आखिर सेना के जवानों और पुलिसकर्मियों की शहादत कब तक होगीl सोशल मीडिया पर भी इस बात को लेकर खूब माहौल गर्म हैl आपको बता दें कि DSP अयूब पंडित वर्दी में नही थे और वो वहां जमा पत्थरबाजों की अराजकता का वीडियो रिकॉर्ड कर रहे थे, तबतक भीड़ ने उन पर हमला बोल दियाl

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जिसके बाद DSP ने अपने बचाव में गोलियां चलायीl हमलावर उग्र हो रहे थे लेकिन फिर भी DSP ने संयम से काम लेते हुए पैर पर गोली चलायी जिससे किसी की जान न जाएl इसके बाद जमा भीड़ ने अपनी हैवानियत दिखाते हुए DSP की हत्या कर दीl इस हत्या के बाद हर तरफ एक ही सवाल है कि आखिर ये कौन से इन्सान हैं जो उनकी सुरक्षा में लगे वीर सपूतों की हत्या कर रहे हैंl सोशल मीडिया पर इस मामले को लेकर आक्रोश बढ़ता जा रहा है और इसका जवाब देने की मांग हो रही हैl

वैसे आपके अक्सर देखा होगा कि आतंकवादियों का सफाया करने वाली सेना पर कई बुद्धजीवी सवाल उठाते रहते हैं और मानवाधिकार की बात करते हैंl यही नही कुछ लोग तो मामले को तूल देने के लिए अपने अवार्ड वापस करने का फर्जी ड्रामा भी करने लगते हैं, लेकिन अब जबकि एक DSP की हत्या कर दी गयी है तो वो सारे खामोश हैंl बॉलीवुड के जाने माने अभिनेता और अहमदाबाद ईस्ट से भाजपा सांसद परेश रावल ने अवार्ड वापस करने वालों को निशाना बनाते हुए ऐसा ट्वीट कर दिया है कि सब को सांप सूंघ गया हैl

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आपको बता दें कि परेश रावल ने ट्विटर पर एक तवीत करते हुए लिखा कि ‘DSP मोहम्मद अयूब के नाम पर कहां चले गये वो अवार्ड वापसी वाले मुर्ख और बौद्धिक अनपढ़ सारे..कहा चले गये ?’ वैसे परेश रावल का निशाना उन सभी लोगों पर था जो मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर कुछ करते हैं और अगर उन्हें गलत करने से रोका जाय तो अवार्ड वापस करने लगते हैं लेकिन जब DSP अयूब पंडित जैसे देशभक्त को जाहिलों द्वारा मार दिया जाता है तो वो सारे पढ़े लिखे अनपढ़ खामोश हो जाते हैंl

परेश रावल के इस ट्वीट पर काफी लोगों ने रिप्लाई दिए और जमकर अवार्ड वापसी गैंग को लताड़ाl इतना ही नही आशीष जैन नाम के एक यूजर ने लिखा कि ‘परेश भाई वो सारे छुट्टियों पर पाकिस्तान अपने नानी के घर या फिर हो सकता है अपने दादी के घर गये हों !’ वैसे सही भी है कि सेना द्वारा किये जा रहे आतंक के खात्मे को कटघरे में खड़ा करके कथित बुद्धजीवी हल्ला मचाते हैं लेकिन जब सेना का जवान या कोई वीर सपूत कायरो द्वारा मारा जाता है तो ये सारे खामोश हो जाते हैं तब अवार्ड वापसी गैंग छुट्टियों पर चली जाती हैl

वाकई जिस तरीके से देश में कुछ बुद्धिजीवियों के नाते सेना पर सवाल उठा दिए जाते हैं उसको रोकना बहुत जरूरी हो गया हैl कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि “मेजर गोगोई द्वारा पत्थरबाज को जीप के आगे बांधकर पत्थरबाजों को सबक सिखाया था वो बहुत सही था और ऐसे लोगों को ऐसे ही ठीक किया जा सकता है, तभी इनकी बोलती बंद होगीl”

इतना ही नही सोशल मीडिया पर तो ये भी खबर चल रही है कि उसके नाम में पंडित जुड़े होने से उसे हिन्दू समझकर मारा गया तो आप ही बताइए कि क्या कश्मीर में हिन्दू होना गुनाह है, क्य्का देश के बाकी हिस्सों में मुस्लिम नही रहते तो फिर क्यों कश्मीर में नफरत फैलाई जा रही हैl

एक और तथ्य हैं इस मामले में वो ये कि कहा जा रहा है कि DSP का घर उस मस्जिद से महज 2 किमी दूर था और उसकी वजह से ऐसा भी कहा जा सकता है कि DSP वहां के लोकल भी थे और उन्हें लगभग सब पहचानते भी होंगे तो इनती जान पहचान होने के बाद भी लोगों ने उन्हें घेर कर मारा….क्या वजह हो सकती है? इसके पीछे की जो वजह हो बताई जा रही है वो ये कि प्रशासनिक स्तर के बड़े अधिकारी होने के नाते अयूब पंडित लोगों की नजर में थे और देश के गद्दार और अलगाववादियों की नजर में थे, उस दिन नमाज के वक्त उन्हें अकेला देख उन्होंने अपनी मंशा जाहिर कर दी और उन्हें मौत के घाट उतार दियाl