प्रधानमंत्री मोदी एक बार फिर विदेशी दौरों पर जाने वाले हैं इस बार वो एक साथ तीन देशों की यात्रा करेंगे. अपनी इस अगली यात्रा में पीएम मोदी अमेरिका, पुर्तगाल और नीदलैंड्स जाएंगे. बात स्पष्ट है कि भारत के कई हितों के बारे में वो इन सारे देशों से बातचीत करेंगे और आने वाले वक्त में कैसे हालातों को बेहतर किया जाए इस बात पर भी वो बल देंगे. अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप अपनी कितनी भी हेकड़ी दिखा ले लेकिन पीएम मोदी के सामने वो ढीले पड़ जाते है.


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आपको बता दें कि जब तक बराक ओबामा अमेरिका के राष्ट्रपति रहे तब तक भारत के और अमेरिका के संबंध भी काफी अच्छे रहे. ट्रम्प ने भी शुरुवात में कहा था कि भारत अमेरिका का अच्छा दोस्त है लेकिन बाद में उन्होंने कुछ ऐसे काम भी किये जिनसे दोनों देशों के बीच तल्खी आने लगी. अमेरिका के वर्तमान राष्ट्रपति के बारे में हम सब जानते है कि वो कितनी अकड़ में रहते है लेकिन भारत के सामने उनकी अकड़ अब कम होती दिख रही है और पीएम मोदी के नेतृत्व में बढ़ते भारत को वो नजरअंदाज़ नहीं कर सकते. इसीलिए उन्होंने 26 जून को पीएम मोदी को अमेरिका आने का न्योता भी भेजा.

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प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहली मुलाकात बेहतर साबित होगी इस बात के संकेत अमेरिका ने दे दिए है. मोदी की वाशिंगटन यात्रा से महज तीन दिन पहले अमेरिका ने भारत को 22 गार्जियन ड्रोन की बिक्री को मंजूरी दे दी. ये सौदा दो से तीन अरब डॉलर का होगा. ये ऐसी पहली डील है, जो अमेरिका ने किसी गैर नाटो सदस्य देश के साथ की है. प्रधानमंत्री की वाशिंगटन यात्रा से पहले इस सौदे की मंजूरी को द्विपक्षीय संबंधों को मजबूती देने की दृष्टि से बड़ा फैसला वाला माना जा रहा है.

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सरकारी सूत्रों ने बताया कि अमेरिका ने इस सौदे को मंजूरी दे दी है और इस फैसले से भारत सरकार को अवगत करा दिया है. भारतीय अधिकारियों के अनुसार भारत इस ड्रोन की खरीदारी के लिए अमेरिका से मंजूरी हासिल करने पर पूरा जोर लगा रहा था. अमेरिका के साथ 22 ड्रोन का सौदा पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुआ था. लेकिन तब से इसकी बिक्री को अमेरिकी सरकार से मंजूरी नहीं मिली थी. मंजूरी मिलने के बाद अब भारतीय सेना को इस ड्रोन के मिलने से 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा पर नजर रखने में काफी मदद मिलेगी.