ओबामा प्रशासन में भारत से बने अच्छे संबंधो को डोनाल्ड ट्रम्प भी आगे बढ़ाना चाहते हैं और भारत भी इन संबंधो को बनाए रखना चाहता है. सोमवार की रात को प्रधानमंत्री मोदी और डोनाल्ड ट्रम्प की मुलाक़ात हुई. इस मुलाक़ात पर अमेरिका और भारत समेत सारी दुनिया की नज़र थी. हर तरफ चर्चाएँ थी कि ओबामा प्रशासन के बाद डोनाल्ड ट्रम्प भारत से किस तरह के रिश्ते रखना चाहता है. इन दोनों की मुलाक़ात के बाद दुनिया के मीडिया ने इस पर प्रतिक्रिया दी.

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पाकिस्तान के मीडिया ने चिर-परिचित अंदाज़ में भारत के लिए नकारात्मक खबर ही छापी. पाकिस्तान के अखबार डॉन ने लिखा व्हाइट हाउस में इस बार पीएम मोदी के लिए वो बात नहीं दिखी जो पिछले दौरे में थी इस बार वो चमक नहीं थी जो पिछली बार थी. पीएम बनने के बाद नरेंद्र मोदी जब पहली बार सितंबर 2014 में अमेरिका गए थे तो ओबामा खुद उन्हें मार्टिन लूथर किंग जूनियर मेमोरियल लेकर गए थे. इस बार वैसा कुछ भी देखने को नहीं मिला.

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भारत के पड़ोसी चीन ने भी ट्रम्प और पीएम मोदी की मुलाक़ात पर राय रखी. चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा कि, अमेरिका ने भारत को अपना सच्चा दोस्त बताया है. इसके बाद अखबार ने आगे लिखा कि साफ़ है कि अमेरिका, चीन पर
निशाना साधने के लिए दिल्ली का इस्तेमाल करेगा. चीन के अखबार ने ये भी लिखा कि अमेरिका भारत का इस्तेमाल कर रहा है.

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वहीं अमेरिकी अखबार वाशिंगटन पोस्ट ने लिखा, ट्रम्प और मोदी के संबंध फोन पर अच्छे रहे हैं. आगे अखबार ने लिखा कि, इस मुलाकात से क्या निकलकर आता है वो देखना होगा. ये मुलाक़ात ऐतिहासिक होगी या फिर एक रात की बात ये आने वाले वक्त में ही पता चलेगा. दोनों ही नेता राष्ट्रवाद की लहर पर हैं और इस्लामिक कट्टरता से लेकर आतंकवाद के विरोधी भी हैं.