भारत और चीन के बीच इन दिनों जो माहौल है उससे समझा जा सकता है कि सीमा पर काफी तनाव है, लेकिन इसके बावजूद भारतीय सेना की तरफ से चीन को बराबर सख्ती से जवाब दिया जा रहा हैl चीन भले ही एक सपन्न देश हो लेकिन अगर वो ये समझता है कि वो भारत को आँखे दिखाकर डरा देगा तो ये उसकी सबसे बड़ी भूल होगी दरअसल एक तरफ पीएम मोदी अमेरिका गये और वहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ उनकी गहरी दोस्ती को देखकर विरोधियों की सांसे थम गयी हैंl वैसे भी चीन एशिया में अपनी दादागिरी दिखाना चाहता है लेकिन भारत के चलते उसकी चल नही पातीl इतना ही नही पाकिस्तान के कंधे से वार करने की तलाश करने वाला चीन हिंदुस्तान पर हमेशा नजर गड़ाए रहता हैl कई ऐसे मौके आये हैं जब चीन ने खुलकर पाकिस्तान का साथ देते हुए भारत को आँख दिखाने की कोशिश की हैl हालाँकि सिक्किम सीमा पर भारत और चीन के बीच तनाव चल रहे हैं और इसको देखते हुए चीन की धमकी देने की कोशिश की तो भारत ने भी उसको धमकी का कड़े शब्दों में जवाब दिया।

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आपको बता दें कि चीन की धमकी पर भारत ने अपने जवाब में कहा कि चीन जरूरत से ज्यादा आक्रामक हो रहा है और उसे थोड़ा संयम बरतना चाहिएl भारत की तरफ से कहा गया कि पेइचिंग को हमें 1962 की याद न दिलाए तो बेहतर है। भारत ने कहा कि अगर हम 1962 में चीन से हारे भी थे तो उसकी वजह भारत की सैन्य असफलता नहीं, बल्कि राजनैतिक भूल थी। भारत ने चीन को आगाह करते हुए याद दिलाया कि ध्यान रहे कि न तो यह 1962 का समय है और न ही भारत की सैन्य क्षमता भी 1962 के समय जैसी है, इसलिए बेहतर है कि थोड़ा संयम से काम ले चीनl

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यहां गौर करने वाली बात ये है कि भारत ने चीन को काफी विस्तार में जवाब देते हुए इस विवाद के दायरे में आने वाले सभी तथ्यों पर अपनी स्थिति भी स्पष्ट कर दी है।इस जवाब में भारत ने भूटान को लेकर भी अपना पक्ष मजबूती से पेश किया गया है। भारत का साफ कहना है कि चुंबी घाटी स्थित तिब्बती भूभाग डोकलम में चीनी सेना ने जबरदस्ती घुसकर सड़क बनाने की कोशिश की, जिसे भारतीय सेना ने असफल कियाl इस जवाब में भारत की तरफ से सिक्किम स्थित नाथू-ला दर्रे से होने वाली मानसरोवर यात्रा को रद्द करने की बात भी कही है।

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आपको बता दें कि जब ये विवाद शुरू हुआ था तो चीन ने कैलाश मानसरोवर जाने वाले भारतीय तीर्थयात्रियों के जत्थे को सीमा पर ही रोक दिया था और सोचा कि तीर्थयात्रियों को रोक देने से भारत सरकार पर दबाव पड़ेगा, लेकिन जब विवाद ने गंभीर रूप ले लिया तो भारत ने इस मार्ग से यात्रा ही रद्द कर दी।

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बता दें कि मौजूदा विवाद भारत से है नही बल्कि असल विवाद तो भूटान और चीन के बीच है, लेकिन भारत भूटान का रक्षा सहयोगी है और इस कारण भारत थिंपू को पूरा सहयोग दे रहा है, जिसपर चीन उखड़ा हुआ हैl  चीन भूटान की सीमा के अंदर रोड बनाने की कोशिशों कर रहा है, जिसका भारत विरोध कर रहा है। इतना ही नही भारत ने चीन को भूटानी भूभाग से अपनी सेना वापस लौटाने को भी कहा। रक्षा मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि “चीन दूसरे देश की जमीन पर कब्जा कर रहा है। भारत और भूटान के बीच सुरक्षा का समझौता है, इसलिए भारत का चिंतित होना स्वाभाविक है।”

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क्या है भूटान और चीन के बीच ताजा विवाद:

भूटान और चीन के बीच ताजा विवाद डोकलम इलाके को लेकर शुरू हुआ हैl डोकलम इलाका तिब्बत स्थित चुंबी घाटी का एक हिस्सा है, और यह भूटान का हिस्सा है, लेकिन चीन अपनी हरकतों से बाज न आकर समय-समय पर इस हिस्से पर अपना हक़ बताता रहा है। भारत के उत्तरपूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला  सिलीगुड़ी गलियारा इस घाटी के ठीक नीचे, महज 50 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। भारत के सामरिक हितों के साथ-साथ आतंरिक सुरक्षा को देखते हुए यह इलाका बेहद अहम है।

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चीन ने क्या कहा था:

26 जून को चीन के विदेश मंत्रालय ने एक बयान जारी किया और भारतीय सेना पर अपनी सीमा में प्रवेश करने का आरोप लगाया था।  इन आरोपों को भारत ने पूरी तरह से  खारिज कर दिया और चीन को हिदायत देते हुए कहा कि वह भारत को कमजोर समझने की भूल न करे। चीन के आरोपों पर भारत ने साफ किया कि “डोकलम इलाके में चीनी सेना पहले घुसी और वहां सड़क बनाने की कोशिश करने लगीl जिसका भूटान की सेना ने इसका विरोध किया। भूटान सरकार ने 20 जून को नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास के माध्यम से पेइचिंग के सामने इस मामले पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई।