गोवा के मुख्यमंत्री और देश के पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने शुक्रवार 30 जून को  उद्योगपतियों की एक सभा को संबोधित करते हुए सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर एक नई बात बताई | उन्होंने इस सभा में बताया कि सर्जिकल स्ट्राइक की नीति कब और कैसे बनाई गई | मनोहर पर्रिकर ने बताया कि जब 2015 में 4 जून को पूर्वोत्तर  के आतंकी समूह एनएससीएन -के ने मणिपुर के चंदेल जिले में भारतीय   सेना पर हमला कर दिया था जिसमें भारत के 18 जवान शहीद हो गए थे | इसके बाद भारतीय सेना ने 8 जून को भारत और म्यांमार सीमा पर एक लक्षित हमला कर 70 से 80 उग्रवादियों को मार गिराया था |

 

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सीमा पर चलाये गए उग्रवाद विरोध अभियान के बाद मीडिया  ने इसको लेकर सरकार से कई सवाल जवाब किये | इन्हीं सवालों में मीडिया वालों ने केन्द्रीय मंत्री और सैन्यकर्मी राज्यवर्धन सिंह राठौड से एक ऐसा सवाल पूछ लिया |  मीडिया कर्मी ने कहा कि आपमें देश के लिए पश्चमी मोर्चे पर भी ऐसा करने का साहस और क्षमता है ?

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इसी को लेकर मनोहर पर्रिकर ने कहा कि उस समय मैंने वो सवाल ध्यान से सुना लेकिन उसका जवाब सही समय पर देने का फैसला किया | इसी अपमानजनक सवाल के पूछे जाने के कारण हमने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर पीओके में पिछले साल किये गए सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई|पीओके में आतंकियों पर किये गए सर्जिकल स्ट्राइक की योजना 15 महीने पहले ही बना ली गई थी |

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मनोहर पर्रिकर के सर्जिकल स्ट्राइक के इस बड़े फैसले को लेकर विपक्षी पार्टियों ने अपनी सेना पर ही सवाल उठा दिए थे | आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल ने तो सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सेना के इस बड़े कदम पर सबूत की भी मांग कर दी | वहीं कांग्रेस पार्टी ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक देश में पहली बार नहीं हुई है |