प्रधानमंत्री मोदी के विदेशी दौरों का मज़ाक उड़ाने वाले बहुत हैं. विपक्षी पार्टियों ने आजतक कभी भी पीएम मोदी के किसी भी कदम की सराहना नहीं की, लेकिन लोग उनके साथ हमेशा खड़े रहते हैं और जानते हैं कि पीएम मोदी जो भी कर रहे हैं वो देश के भले के लिए ही कर रहे हैं. जबसे नरेंद्र मोदी देश के पीएम बने हैं देश में बदलाव का सिलसिला जारी है. पीएम मोदी विदेशनीति को सुधारने के लिए अब तक कई देशों की यात्रा कर चुके हैं.KLNM

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पीएम मोदी ने अपने कार्यकाल के शुरुआत में ही विदेशों से अपने संबंध सुधारने शुरू कर दिए थे. उन्होंने अपने पड़ोसी मुल्कों का दौरा करके सीमा विवाद सुधारने की भी कोशिश की यहाँ तक कि हमेशा भारत के खिलाफ साजिश करने वाले पाकिस्तान के साथ भी उन्होंने अच्छे संबंध बनाने की पूरी कोशिश की और जब पाकिस्तान इसके बाद भी अपनी गंदी करतूतों से बाज नहीं आया तो उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक करके भारत की ताकत का नज़ारा भी पाकिस्तान को दिखाया.

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हाल ही में पीएम मोदी ने अमेरिका की यात्रा की थी और भारत-अमेरिका के संबंधो को और अच्छा बनाने का प्रयास किया. पीएम मोदी द्वारा किये गए इन प्रयासों का अब फायदा भी मिलना शुरू हो गया है. खबर अमेरिका से आई है. अमेरिका के सरकारी सूत्रों की मानें तो अमेरिका ने भारत को 22 प्रीडेटर गार्जियन ड्रोन के निर्यात के लिये अनिवार्य लाइसेंस जारी कर दिया है. सूत्रों का कहना है कि विदेश विभाग ने DSP-5 गार्जियन निर्यात लाइसेंस जारी किया है. ये लाइसेंस (DSP-5) सैन्य सामग्री के स्थायी निर्यात के लिए जारी किये जाते हैं. भारत को गार्जियन ड्रोन मिलने से हिन्द महासागर क्षेत्र में भारत की नौवहन निगरानी क्षमताओं में और ताकत बढ़ जाएगी.

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गौरतलब है कि पीएम मोदी ने अमेरिका के दौरे के दौरान राष्ट्रपति ट्रम्प से भारत-अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करने की बात की थी. अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने एक बयान में कहा था कि भारत को अमेरिका द्वारा दक्षिण एशिया में सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए संसाधन और तकनीक मुहैया करवाई जाएंगी. अमेरिका द्वारा भारत को अपाचे लड़ाकू हेलिकॉप्टर, गार्जियन यूएवी और C-17 परिवहन विमान देने की बात कही गई थी.

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अमेरिका और भारत जब से करीब आने लगे हैं तब से पाकिस्तान और चीन को परेशानी होने लगी है क्योंकि भारत-अमेरिका के मिलने से दोनों ही देशों की ताकत दुगनी हो गई है. चीन आए दिन साउथ-चाइना सी में दादागिरी दिखाता रहता है जिसको लेकर अमेरिका चिंता में हैं इसलिए एशिया में वो भारत के साथ मिलकर चीन पर लगाम लगाना चाहता है.

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पीएम मोदी की अमेरिका यात्रा से आने के बाद चीन लगातार भारत से उलझने की कोशिश कर रहा है कभी वो चुंबी घाटी में भारत की बिना इज़ाजत के रोड बनाने लगता है तो कभी उसके सैनिक भारत के बंकर उड़ा देते हैं. ख़ैर चीन के इस रवैये से साफ़ जाहिर होता है कि वो भारत की बढ़ती ताकत से परेशान है वो नहीं चाहता कि एशिया में कोई उसको पछाड़ सके. भारत के जल क्षेत्र को लेकर चीन को बड़ी परेशानी है क्योंकि उसके पास इतना बड़ा जल क्षेत्र नहीं है जितना कि भारत के पास इसीलिए आए दिन वो थल क्षेत्र में भारत को पीछे धकेलना चाहता है. चुंबी घाटी में उसके द्वारा जो निर्माण कार्य करने की कोशिश की जा रही थी वो भी इसी वजह से थी. भारत उसके मंसूबों को अच्छी तरह से जानता है इसीलिए भारत अब अमेरिका के साथ मिलकर चीन की घटिया चालों को मात देना चाहता है.