इजराइल से क्यों जलते हैं मुस्लिम देश

इजराइल दुनिया का एक मात्र ऐसा देश है जो अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद को पार कर सकता है और यही वजह है कि कोई भी देश उसकी तरफ आँख उठा कर नहीं देखता. इजराइल चारों ओर से दुश्मनों से घिरा हुआ है लेकिन फिर भी किसी की हिम्मत नहीं है कि वो इजराइल पर हमला कर सके. इजराइल मिनटों में किसी भी देश का विनाश कर सकता है उसकी रक्षा नीति दुनिया से अलग है इजराइल की नीति है अपने दुश्मन को जड़ से उखाड़ फेंकना. 1948 में आजाद होने के बाद से ही इजराइल ने प्रगति की, और आज वो दुनिया के शक्तिशाली देशों में से एक है.

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इजराइली नागरिकों का दुनिया के कई देशों में जाना बैन है. पाकिस्तान तो इजराइल को देश मानता ही नहीं है. यहाँ तक कि पाकिस्तान के पासपोर्ट पर स्पष्ट शब्दों में लिखा होता है कि ये पासपोर्ट इजराइल को छोड़कर हर देश के लिए मान्य है.

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ये 16 देश हैं जहाँ इजराइल के निवासियों का जाना है बैन 

ईरान, सीरिया, इराक, यमन, अल्जीरिया, बांग्लादेश, सऊदी अरब, ब्रुनेई, कुवैत, लेबनान, मलेशिया, ओमान, लीबिया,  सूडान,  यूएई और पाकिस्तान. यहाँ पर इजराइल के निवासियों का जाना बैन है लेकिन आज हम आपको बताएयेंगे इसके पीछे कारण क्या है.

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ये वजह है जो मुस्लिम देश इजराइल को पसंद नहीं करते 

अगर हम मुस्लिमों की यहूदियों से इस घृणा की बात करें तो हमें बाइबल आधारित विवरण पर जाना पड़ेगा ये विवरण हमें अब्राहम के दौर की ओर ले जाता है. यहूदियों को अब्राहम के पुत्र इसहाक की संतान माना जाता है जबकि अरब को अब्राहम के पुत्र इस्माइल की संतान माना जाता है. माना जाता है कि इस्माइल का जन्म एक गुलाम स्त्री से हुआ था जबकि इसहाक का जन्म प्रतिज्ञा किए हुए पुत्र के रूप में हुआ. इस टिप्पणी से आपको स्पष्ट हो ही गया होगा कि अब्राहम के दोनों पुत्रों के बीच मतभेद होना लाजमी था. मुस्लिम मानते हैं कि इस्माइल अब्राहम का प्रतिज्ञा पुत्र था जबकि यहूदी इसहाक को प्रतिज्ञा पुत्र मानते हैं. इसी वजह से आजतक मुस्लिम, यहूदियों से वैमनस्य रखते हैं.

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इस्लाम धर्म के बहुसंख्यक अरब अनुयायियों ने इस शत्रुता को और गहरा कर दिया. कुरान में कुछ बातों को लेकर विरोधाभास है इसमें मुसलमानों को दिए गए निर्देश स्पष्ट नहीं हो पाते हैं. एक समय पर कुरान मुस्लिमों को निर्देश देती है कि यहूदियों से भाई जैसा व्यवहार करें और आगे ये उन यहूदियों के ऊपर आक्रमण करने का आदेश देती है जो इस्लाम को स्वीकार करने से मना करते हैं.
इब्रानी पवित्र शास्त्र में माना गया है कि इसहाक, अब्राहम का प्रतिज्ञा पुत्र था जबकि कुरान कहती है कि इसहाक नहीं इस्माइल, अब्राहम का प्रतिज्ञा पुत्र था और इसी वजह से दोनों समुदायों में मतभेद हैं जो कि आजतक दोनों समुदायों के बीच दुश्मनी की जड़ बने हुए हैं.

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द्वितीय विश्व युद्ध भी बना कारण 

बात तो ये है कि मध्य पूर्व के हज़ारों सालों के इतिहास में यहूदी और अरब लोग आपस में शान्ति के साथ रहे, लेकिन वर्तमान में ये समस्या दूसरे विश्व युद्ध के बाद आई इस युद्ध के बाद संयुक्त राष्ट्र ने यहूदी लोगों को इजराइल के लिए भूमि का एक टुकड़ा दिया, जबकि ये जमीन मूल रूप से अरबों के रहने की जगह (फिलिस्तीन) थी. कई देशों द्वारा इजराइल के नागरिकों को बैन करने का कारण धर्म से सम्बन्धित भी है और कुछ देश दूसरे विश्वयुद्ध के होने के बाद परिस्थितियों के बदलने के कारण भी यहूदियों को अपना दुश्मन समझने लगे हैं. ख़ैर आज इजराइल इतना आत्मनिर्भर है कि उसे किसी की भी आवश्यकता नहीं है. दुनिया के बड़े देश इजराइल का साथ देते हैं.