आज ही के दिन सन 1901 में पश्चिम बंगाल की राजधानी कलकत्ता में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म हुआ था.  भारतीय जनसंघ का सन 1977 में जनता पार्टी में विलय हो गया.  इस विलय के बाद जनता पार्टी सत्ता में आई. सत्ता में आने के बाद आपसी मतभेद कुछ ज्यादा ही बढ़ जाने के कारण से 2 साल के बाद ही सन 1979 में सरकार गिर गई.  इसके बाद सन 1980 में एक नई पार्टी का गठन हुआ. जिसका नाम भारतीय जनता पार्टी था.

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श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन से जुड़ा दिलचस्प वाकया

श्यामा प्रसाद मुखर्जी के राजनैतिक जीवन से जुड़ा एक दिलचस्प वाकया हुआ. इसके बारे में टाइम्स ऑफ़ इंडिया के पूर्व सम्पादक इन्दर मल्होत्रा ने बताया. जब आम चुनाव के बाद दिल्ली के नगरपालिका के चुनाव में कांग्रेस के सामने जनसंघ एक बड़ी चुनौती के रूप में कड़ी थी . इस समय जब संसद में बोलते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने कांग्रेस पार्टी पर आरोप लगाया कि वो दिल्ली के चुनाव जीतने के लिए वाइन और मनी का प्रयोग कर रही है. इस आरोप का नेहरू ने विरोध किया लेकिन नेहरू विरोध करते समय एक गलती कर गए . जवाहरलाल नेहरू समझे कि श्यामा प्रसाद ने वाइन और वुमन कहा है.  इसी को लेकर नेहरू ने इस बात का कडा विरोध किया.  इसको लेकर मुखर्जी ने नेहरू से कहा कि वो आधिकारिक रिकॉर्ड उठा कर देख लें कि मैंने क्या कहा है. इसके बाद जब नेहरू को लगा कि उन्होंने गलती कर दी इसके बाद नेहरू ने भरे सदन में खड़े होकर मुखर्जी से माफ़ी मांगी . इसके बाद मुखर्जी ने कहा कि माफ़ी माँगने की कोई जरूरत नहीं है . मैं बस इतना कहूंगा कि मैं गलतबयान बाजी नहीं  करूंगा.

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डॉ. मुखर्जी की राजनैतिक यात्रा

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने अपने राजनैतिक जीवन की शुरुआत कांग्रेस पार्टी से ही की लेकिन कांग्रेस पार्टी से उनके विचार नहीं मिले. जब डॉ. मुखर्जी को कांग्रेस के प्रत्याशी और कलकत्ता विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि के रूप में बंगाल विधान परिषद का सदस्य चुना गया लेकिन बाद में कांग्रेस विधायिका के विरोध के बाद में उन्होंने अपना इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद डॉ. मुखर्जी स्वतन्त्र प्रत्याशी के रूप में लड़े और चुनाव जीत गए. पहली बार जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व में श्यामा प्रसाद मुखर्जी कांग्रेस के साथ आये और वो सरकार में मंत्री बने. लेकिन बाद में जब जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री लियाकत अली के बीच समझौता हुआ तो डॉ. मुखर्जी ने मंत्रिमंडल से अपना इस्तीफ़ा दे दिया. इसके बाद जनसंघ की स्थापना की.

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डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के पिता एक जानेमाने व्यक्ति थे इसलिए कहा जाता है कि मुखर्जी का बचपन किसी तरह के अभाव से दूर ही रहा होगा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने स्नातक की शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से  प्राप्त की और इसके बाद उन्होंने इंग्लैंड बैरिस्टरी की पढाई की. जब श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आयु 33 वर्ष की थी तब वह कलकत्ता विश्वविध्यालय के कुलपति नियुक्त किये गए.

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डॉ. मुखर्जी ने कश्मीर में धारा 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा दिए जाने का विरोध किया. उन्होंने इसका विरोध किया और इसके विरोध के लिए उन्होंने 11 मई 1953 को बिना परमिट के कश्मीर में प्रवेश करने की कोशिश की जहां उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तारी के बाद 23 जून 1953 को उनकी संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. अपने बेटे की मृत्यु की खबर सुनकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की माँ योगमाया देवी ने कहा था कि ‘मेरे पुत्र की मृत्यु भारत माताके पुत्र की मृत्यु है.