खुद को किंग मेकर कहने वाले RJD चीफ लालू प्रसाद यादव इन दिनों मुश्किलों में घिरे हुए हैं. दरअसल चारा घोटाला से नाम कमा चुके लालू प्रसाद यादव के घर सीबीआई बेनामी संपत्ति और रेलवे के होटल घोटाले में छापा मारने पहुंची तो यह मामला मीडिया में आ गया. जिसके बाद से आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव और उनके कुनबे की मुसीबत बढ़ गई है। इतना ही नही चुनाव से पहले लालू यादव अपनी नैय्या पार लगाने के लिए नीतीश का हाथ थामा था, सीटें अच्छी मिलीं और सत्ता में वापस आ गये लेकिन अब वहीं नीतीश लालू के बेटे को लेकर कुछ ऐसा फैसला करने जा रहे हैं कि उनके लिए मुसीबत बन सकती है. दरअसल नीतीश कुमार लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे तेजस्वी यादव जोकि बिहार के उपमुख्यमंत्री हैं, उनको उनके पद से हटाने पर विचार कर रहे हैं. HJK

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आपको बता दें कि जिस तरीके से लालू और उनके परिवार को लेकर छापेमारी का घटनाक्रम चल रहा है उसे देखते हुए बिहार के सीएम नीतीश कुमार लालू के छोटे बेटे और राज्य के उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को उनके पद से हटाने पर विचार कर रहे हैं। जब सीबीआई ने भ्रष्टाचार के मामले में तेजस्वी यादव के खिलाफ FIR दर्ज किया तो सीएम नीतीश पर दबाव बढ़ने लगा कि उन्हें उप मुख्यमंत्री पद से हटाया जाय. वहीं बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने मोर्चा संभालते हुए और भ्रष्टाचारियों को सजा दिलवाने के लिए नीतीश कुमार से लालू के दोनों बेटों को कैबिनेट से बर्खास्त करने की मांग कर डाली.

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नीतीश कुमार इस मामले में तेजस्वी से इस्तीफा भी मांग सकते है। वहीं, नीतीश के सामने एक और विकल्प होगा जिसके अनुसार बिहार के सीएम लालू यादव से कहें कि वो अपने पुत्र को इस्तीफा देने के लिए मनाये. इस मामले बिहार सरकार की खूब किरकिरी हो रही है और नीतीश चाहते हैं कि इस मामले में उनकी पार्टी की छवि न ख़राब हो इसलिए वो इस मसले पर बहुत सोच समझकर कदम बढ़ा रहे हैं.

क्या हुआ 7 जुलाई को:

लालू के घर सब कुछ सामान्य चल रहा होता है कि तबतक सीबीआई के 27 अधिकारियों की टीम उनके घर पहुंचती है और राबड़ी देवी और उनके छोटे बेटे तेजस्वी यादव से पूछताछ करती है। सीबीआईकी टीम ने राबड़ी से लगभग 8 घंटे तक पूछताछ की और तेजस्वी से भी करीब छह घंटे तक सवाल किए गए। बताया जा रहा है कि पटना मॉल में हिस्सेदारी को लेकर तेजस्वी से सवाल पूछे गए। सीबीआई ने लालू यादव के 12 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की थी।

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क्या है पूरा मामला:

सीबीआई के अडिशनल डायरेक्टर राकेश अस्थाना ने मीडिया को बताया कि लालू प्रसाद यादव के रेलमंत्री रहने के दौरान रखरखाव के लिए  रेलवे को दो होटलों का टेंडर एक प्राइवेट कंपनी को दिया गया था और इसके बदले में लालू को तीन एकड़ जमीन दी गई। 2004 से 2009 के बीच ये टेंडर इंडियन रेलवे कैटरिंग ऐंड टूरिजम कॉर्पोरेशन (IRCTC) के जरिए दिए गए थे, और उस समय लालू यादव रेल मंत्री थे। अस्थाना ने कहा कि लालू और अन्य आरोपियों के खिलाफ 2004 से 2014 के बीच रची गई इस साजिश के लिए प्रिवेंशन ऑफ करप्शन ऐक्ट, 1988 के तहत केस दर्ज किया गया है।

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जैसे ही छापा पड़ा तो नीतीश ने क्या किया:

जब लालू के घर छापेमारी की खबर मीडिया में आई तो सीएम नीतीश कुमार ने वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक राजगीर में बुलाई। सीएम ने राज्य के डीजीपी पीके ठाकुर, प्रिंसिपल सेक्रटरी होम आमिर सुब्हानी और चीफ सेक्रटरी अंजनी कुमार सिंह के साथ बैठक की। इस मामले को लेकर राज्य में हिंसा न हो इसके लिए बिहार पुलिस हेडक्वॉटर्स की ओर से पूरे राज्य में सतर्क रहने को कहा गया. इतना ही नही विरोध प्रदर्शन को देखते हुए बीजेपी कार्यालय के बाहर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

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सुशिल मोदी ने कहा…

सीबीआई की इस कार्रवाई के लिए सुशिल मोदी ने नीतीश कुमार, पूर्व जेडीयू नेता शिवानंद तिवारी और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह को धन्यवाद किया है। सुशील मोदी ने कहा, ‘नीतीश, शिवानंद तिवारी और ललन सिंह की मेहनत रंग लाई है। अब सबकुछ साफ हो गया है। ‘ललन सिंह और शिवानंद ने दिल्ली और पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस करके लालू पर रेलवे के होटल लीज पर देने के एवज में जमीन लिखवाने का आरोप लगाया था।’