भारतीय सैनिकों ने जिस बुरहान वानी को 72 हूरों के पास भेजकर मानो एक उपलब्धि हासिल की थी आज उसी बुरहान वानी की 8 जुलाई को बरसी है. बता दें शनिवार 8 जुलाई को बुराहन वानी की बरसी को ध्यान में रखते हुए घाटी में भारी पुलिस बल और सेना के जवानों को तैनात कर दिया गया है.  सरकार को आशंका है कि शनिवार को वानी की बरसी के मौके पर आसामजिक तत्व उत्पात मचा सकते हैं. हिज्बुल मुजाहिद्दीन के आतंकी कमांडर बुरहान वानी के मारे जाने पर जहाँ पूरे देश में ख़ुशी थी वहीँ इस आतंकी की मौत पर अब कांग्रेस की तरफ से ऐसा बयान आया है जिसे सुनकर शायद आपको भी यकीन ना ही हो.

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क्या कहा है कांग्रेस के नेता ने बुरहान वानी के मुद्दे पर 

यूँ तो कांग्रेस पार्टी का मंत्र बन चुका है विवादित बयान देकर सुर्ख़ियों में बने रहने का लेकिन इस बार हिजबुल के आतंकी के बारे में कांग्रेस पार्टी के नेता सैफूद्दीन सोज़ ने शुक्रवार को बयान दिया है उसे सुनकर आपको भी झटका लग सकता है. कांग्रेस नेता ने अपने इस विवादित बयान में कहा है कि अगर आज उनकी सत्ता होती तो आतंकी बुरहान वानी की कभी भी मारा ही नहीं जाता और वो आज जिंदा होता. सोज़ ने आगे कहा कि अगर कांग्रेस की सरकार होती तो वो वानी के साथ बातचीत कर के मामले को सुलझा लेते.

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कश्मीरियों का दर्द समझना चाहिए

कांग्रेसी नेता सैफुद्दीन यहीं नहीं रुके. अपने इसी विवादित बयान ने अपने और जज्बात डालते हुए उन्होंने कहा कि अगर आज गलती से भी देश में हमारी सत्ता होती तो हम कतई भी बुरहान को मारने नहीं देते. नेताजी ने आगे कहा कि, “मैं उससे बातचीत करता और उसे समझाता कि पाकिस्तान, कश्मीर और भारत के बीच दोस्ती हो सकती है, जिसमें वह भी अपनी भागीदारी निभा सकता था, लेकिन बुरहान अब मर चुका है और हमें कश्मीरियों के दर्द को समझना चाहिए.

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कौन था बुरहान वानी

बुराहन मुजफ्फर वानी आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन का कमांडर था.  ख़बरों के अनुसार बुरहान वानी कश्मीर में त्राल के  एक अच्छे और संपन्न परिवार से ताल्लुक रखता था. बुरहान के पिता एक स्कूल में प्रिन्सिपल थे लेकिन वो शायद अपने ही बेटे को अच्छी शिक्षा देने से चूक गए जिसके चलते महज़ 15 साल की उम्र में बुरहान घर छोड़कर आतंकवादी बन गया. बताते हैं कि बुरहान वानी का बड़ा भाई खालिद मुजफ्फर भी आतंकवादी था जो पिछले साल सुरक्षा बलों के हाथों मारा गया था.

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हिजबुल का पोस्टर बॉय बन चुका था बुरहान 

बुरहान वानी 2014 में उस वक़्त चर्चा में आ गया था जब उसने सेना की वर्दी में हथियार के साथ अपनी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर डाला था. बता दें इसके बाद ऐसे कई मौके आये जब उसने सेना कि वर्दी में तस्वीरें डालना शुरू कर दिया. बुरहान अब लोगों की दुखती नस पकड़ चुका था. बार-बार सेना की वर्दी में तस्वीर डालने का बुरहान का एक ही मकसद था कि वो युवाओं को आतंकवाद की तरफ आकर्षित करना चाहता था. इसी के चलते बुरहान ने कई बार फेसबुक,ट्विटर और वॉट्सऐप पर भड़काने वाली वीडियो और तस्वीरे भी अपलोड की थी और शायद यही कारण था कि बुरहान अब हिजबुल का ‘पोस्टर बॉय’ बन चुका था.

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सेना ने कैसे इस पोस्टर बॉय को दिलाई मुक्ति?

अमूमन तौर पर बुरहान बुलेटप्रूफ जैकेट पहने रखता था लेकिन अपनी मौत वाले दिन बुरहान ने सादे कपड़े पहने थे.  बुरहान के बारे में बताया जाता है कि वो कभी भी एक नंबर नहीं रखता था, बुरहान समय-समय पर अपना नंबर बदलते रहता था जिसकी वजह से उसे ट्रैक करना सेना के लिए नामुमकिन सा हो चुका था. इसी बीच सेना को खुद को बुरहान वानी की गर्लफ्रेंड बताने वाली एक लड़की सामने आई जिसने सारी गुत्थी ही सुलझा दी.

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बुरहान की गर्लफ्रेंड भी लेना चाहती थी बुरहान से बदला  

खुद को बुरहान की गर्लफ्रेंड बताने वाली इस लड़की की नाराज़गी इस बात की थी कि बुरहान उसके अलावा भी अन्य लड़कियों से संपर्क में था जिसकी वजह से खुद को बुरहान की गर्लफ्रेंड बताने वाली ये लड़की नाराज़ थी और शायद इसी वजह से उसने सेना को बुरहान का पता देने की सोची. बताया जा रहा है कि इसी लड़की ने ही बुरहान का नंबर सेना को दिया जिससे सेना ने उसे ट्रैक कर लिया.  8 जुलाई को खबर मिली की वानी कोकरनाग के पास बमडूरा गांव के एक मकान में पहुंच चुका है उसे यहाँ प्लान के तहत लाया गया था जहाँ वह अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने वाला था इसलिए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप वहां पहले ही पहुँच चुका था.

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4 फुट की दूरी से मारा गया था बुरहान

बुरहान वानी कभी अकेला नहीं चलता था उसके साथ हमेसा उसका साथी सरताज रहता था. उस दिन भी वह सरताज और परवेज के साथ ही था. उसे मारने के लिए जवानों ने पूरे इलाके में डबल लेयर का घेरा बनाया उसके बाद सेना ने उस घर में पीछे से आग लगा दी जिस घर में वानी था. कुछ ही देर में सभी आतंकी बहार आ गये वानी उस समय नशे में था और ढंग से चल भी नहीं पा रहा था सरताज और परवेज उसे सहारा दे रहे थे सेना का पहला टारगेट वानी ही था इससे पहले की आतंकी कुछ सोचते उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दी गई. सेना परवेज और सरताज को जिन्दा पकड़ना चाहती थी लेकिन उनकी तरफ से हरकत देख उन्हें भी मार गिराया गया वानी को महज 4 फुट की दूरी से गोली मारी गई थी.

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बुरहान वानी की पहली बरसी पर कश्मीर में कुछ ऐसा है नज़ारा

बुरहान वानी की पहली बरसी के चलते सरकार को आशंका थी कि शनिवार को घाटी में आसामजिक तत्व उत्पात मचा सकते हैं। इसी बात के मद्देनजर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए हैं.  कहीं कोई चूक ना हो जाये इसलिए श्रीनगर और दक्षिण कश्मीर में कर्फ़्यू और दफ़ा 144 लागू कर दिया गया है. बुरहान वानी के इलाक़े त्राल और इसके आसपास के गांवों में पुलिस और सीमा सुरक्षा बलों का कड़ा पहरा है. हालाँकि बुरहान वानी की बरसी पर कश्मीर में सन्नाटा पसरा है. इस बारे में बात करते हुए अधिकारी बताते हैं कि बुरहान वानी की बरसी मनाना मूर्खता है क्योंकि वो कोई हीरो नहीं था.