भारत के वर्तमान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के खतरनाक कारनामों के सामने जेम्स बांड के किस्से भी फीके पड़ जाते हैं. वे भारत के ऐसे एकमात्र नागरिक हैं जिन्हें शांतिकाल में दिया जाने वाले भारत का दूसरा सबसे बड़ा पुरस्कार कीर्ति चक्र दिया गया है. पीएम मोदी भी उनपर बहुत भरोसा करते हैं.

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आज जो वीडियो हम आपको दिखाने जा रहे हैं उसमें NSA अजीत डोभाल पाकिस्तान में उनके साथ हुए एक रोचक किस्से का जिक्र कर रहे हैं. एक पत्रकार ने जब उनसे कहा कि पाकिस्तान में हुआ कोई रोचक किस्सा बताइए तो अजीत डोभाल ने बताया कि एक बार एक पाकिस्तानी ने उन्हें देखकर ही पहचान लिया कि वो हिन्दू हैं.

इस पाकिस्तानी शख्स ने अजीत डोभाल जी को अपने पास बुलाया और उनको देखते ही बोला कि तुम हिन्दू हो. अजीत जी को इस बात से हैरानी हुई कि आखिर उस आदमी ने उन्हें पहचाना कैसे.

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फिर उस आदमी ने उन्हें अपने पास बैठाया और उनसे बात की. इस सारे वार्तालाप के बारे में अजीत डोभाल ने बताया. वीडियो में सुनें पूरा किस्सा.

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जनवरी 2005 में खुफिया ब्यूरो के प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त डोभाल, साल 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं. मूलत: उत्‍तराखंड के पौड़ी गढ़वाल से आने वाले अजीत डोभाल ने अजमेर मिलिट्री स्‍कूल से पढ़ाई की है और आगरा विवि से अर्थशास्‍त्र में एमएम किया है.

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वे केरल कैडर से 1968 में आईपीएस अधिकारी के रूप में चुनकर आए हैं. कुछ साल वर्दी में बिताने के बाद, डोभाल ने 33 वर्ष से अधिक समय खुफिया अधिकारी के तौर पर बिताए और इस दौरान वह पूर्वोत्तर, जम्मू कश्मीर और पंजाब में तैनात रहे. नीचे दिये वीडियो में देखिये कैसे अजीत डोभाल अपने स्पीच के जरिये अपनी दूरदर्शिता का परिचय दे रहे हैं.

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जीत डोभाल पहले ऐसे शख्स हैं जिन्हें सेना में दिए जाने वाले कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है. अजीत डोभाल की कामयाबियों की लिस्ट में आतंक से जूझ रहे पंजाब और कश्मीर में कामयाब चुनाव कराना भी शामिल है. यही नहीं उन्होंने 7 साल पाकिस्तान में भी गुजारे हैं और चीन, बांग्लादेश की सीमा के उस पार मौजूद आतंकी संगठनों और घुसपैठियों की नाक में नकेल भी डाली है . अजीत डोभाल की पहचान सुरक्षा एजेंसियों के कामकाज पर उनकी पैनी नजर की वजह से बनी है. ऐसी ही साफ समझ की बदौलत अजीत डोभाल ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को संकट से उबारा था. 24 दिसंबर 1999 को एयर इंडिया की फ्लाइट आईसी 814 को आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया और उसे कांधार ले जाया गया. भारत सरकार एक बड़े संकट में फंस गई थी. ऐसे में संकटमोचक बनकर उभरे थे अजीत डोभाल.

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अजीत उस वक्त वाजपेयी सरकार में एमएसी के मुखिया थे. आतंकवादियों और सरकार के बीच बातचीत में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और 176 यात्रियों की सकुशल वापसी का सेहरा डोभाल के सिर बंध गया था. अजीत डोभाल ने सीमापार पलने वाले आतंकवाद को करीब से देखा है और आज भी आतंकवाद के खिलाफ उनका रुख बेहद सख्त माना जाता है.

डोभाल ने पाकिस्तान और ब्रिटेन में राजनयिक जिम्मेदारियां भी संभालीं और फिर करीब एक दशक तक खुफिया ब्यूरो की ऑपरेशन शाखा का लीड किया. रिटायर होने के बाद वे दिल्ली स्थित एनजीओ विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन चलाया गया, जो वार्ता और विवाद निबटारे के लिए मंच उपलब्ध कराता है.

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भारतीय सेना के एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के दौरान उन्होंने एक गुप्तचर की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई, जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका.