सावन का पहला सोमवार, जहाँ शिव के भक्त बड़े ही जोश में अमरनाथ यात्रा पर निकले थे, लेकिन आतंकियों को आस्था पर वार कर देश में दहशत फैलानी थी. जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में हुए इस हमले में आतंकियों ने निशाना बनाया दर्शन कर लौट रही यात्रियों से भरी एक बस को. अमरनाथ यात्रियों से भरी ये बस श्रद्धालुओं को लेकर बालटाल से मीर बाजार को जा रही थी जब देर शाम 8.20 बजे के करीब बटेंगो में यह हमला हुआ. अबतक मिली जानकारी के अनुसार इस हमले में छह श्रद्धालुओं की मौत हो गई है और साथ ही इस दुर्भाग्यपूर्ण हमले में पुलिसकर्मियों सहित 14 लोग घायल भी हुए हैं.  

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IB ने पहले ही जताई थी इस हमले की आशंका 

इस आतंकी हमले से जुड़ी एक दुर्भाग्यपूर्ण बात ये सामने आ रही है कि इस हमले की आशंका जताते हुए IB ने पहले ही बताया था कि हो ना हो आतंकी इस समय अमरनाथ यात्रा पर घात लगाकर बैठे है और उनकी तैयारी देख कर बड़े हमले की आशंका जताई जा रही है. हालाँकि  IB की इस चेतावनी पर ज़्यादा गौर नहीं किया गया और जिसका दुखद परिणाम आज हमारे सामने है.

दुर्भाग्यपूर्ण हमले पर भी राजनीति?

बताया जा रहा है कि इस हमले के लिए आतंकियों ने गुजरात से आ रही एक बस को अपना निशाना बनाया है.  श्रीनगर से 50 किलोमीटर दूर अनंतनाग के बाटेंगू में  यात्रियों से भरी इस बस पर हमला करने से पहले आतंकियों ने पास में स्थित एक पुलिस कैंप और नाके पर भी हमला किया था. हालाँकि आतंकियों के इस नीच कदम का यहाँ कोई ख़ास असर नहीं हुआ जिसके बाद उन्होंने यात्रियों से भरी बस पर हमला किया.  इस हमले से जहाँ पूरे देश भर में गुस्सा और दुःख है वही अलका लम्बा ने देश के इस संवेदनशील मुद्दे पर अपनी गन्दी राजनीति का दाव खेलते हुए इस 2017 में गुजरात में होने वाले चुनाव से जोड़ दिया.

क्या कहा अलका लांबा ने?

हमले के बाद पुलिस ने खबर जारी की कि इस आतंकी हमले में कुल साथ लोग आतंकियों का निशाना बने.  साथ ही इस हमले में कम से कम 19 अन्य लोग घायल भी हुए हैं बताया जा रहा है जिनमें कुछ पुलिसकर्मी भी शामिल हैं. लेकिन इस हमले की खबर मिलते ही अलका लांबा ने सुना कि इस हमले में 7 गुजरती लोगों की मौत हो गयी है. अलका लांबा ने इस बात को ट्वीट करते हुए कहा कि, “मोदी सरकार की पूरी नाकामी के बाद अब भक्तों का आखिरी सहारा मानवाधिकार ही बचा है. जैसा की 2002 में हुआ था.”

कन्हैया कुमार ने भी खेली गन्दी राजनीति 

यही नहीं इस बात में अलका लांबा का समर्थन देते हुए है कन्हैया कुमार भी मैदान में कूद पड़े. जहाँ देश इस हमले से दुखी है, लोगों ने अपने परिजनों को खोया है, ऐसे में सोच कर भी बुरा  लगता है कि कैसे लोग इस तरह के आतंकी हमलों में भी राजनीति घुसेड़ना नहीं भूलते. कन्हैया कुमार ने भी इस मुद्दे पर ट्वीट करते हुए कहा, “क्या? गुजरात में इस साल चुनाव होने वाले हैं? अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले में मरनेवालों में से सब गुजरती हैं?  अब समझ नहीं आ रहा कि ये सुरक्षा में सेंध है या फिर सोची समझी साजिश.”

लोगों ने लगायी अलका की क्लास

वाकई जब इस तरह के हमले होते हैं तो जहाँ लोग ये उम्मीद करते हैं कि देश के सभी नागरिक और नेता सभी साथ मिलकर खड़े हों लेकिन अलका लांबा जैसे नेताओं के राज में शायद ही ऐसा हो पाए. इस सवेंदनशील मुद्दे पर जैसे ही अलका लांबा ने ट्वीट किया तो लोगों ने उसका जवाब देते हुए अलका लांबा को ऐसा आइना दिखाया जिसके बाद शायद उन्हें अकल आ जाये.

एक यूजर ने ट्वीट करते हुए कहा कि, “इस तरह से अमरनाथ यात्रा पर हुए हमलों को गुजरात चुनाव से जोड़ कर क्या आप मुस्लिम वोट अपने पार्टी के खाते में चाहती हैं? बेशर्मी की हद होती है अलका, आप इस तरह से इस दुर्भाग्यपूर्ण हमले पर चुनाव प्रचार नहीं कर सकती.”

तो वहीँ एक दूसरे यूजर ने अलका लाम्बा को ट्वीट कर के कहा कि, “अगर आपका मुंह बड़ा है तो ज़रूरी नहीं है अलका कि आप इससे गंदगी ही निकाले. वैसे गलती आपकी भी नहीं है, गलती आपकी संगत की है. केजरीवाल के साथ में रहोगी तो यही होगा.”

तो वहीँ एक यूजर आशुतोष ने अलका लांबा को बताया कि, “क्या आपके इस ट्वीट का ईशारा केजरीवाल की तरफ है? ये हमला केजरीवाल के पाकिस्तान में मौजूद दोस्तों ने ही तो किया है, ना? आपको समझना चाहिए कि बिना सबूत के आप को कुछ भी नहीं कहना चाहिए.”

बीजेपी नेता ने भी अलका लांबा को दिया मुंहतोड़ जवाब 

अलका लांबा का ये ट्वीट वाकई शर्मसार करने वाला है. जहाँ उन्हें इस मामले पर शायद थोड़ी संवेदना दिखानी चाहिए थी वहां उन्होंने ये घटिया ट्वीट कर के भी अपनी राजनीति की दाल गलाने की सोची. तो उनके ट्वीट पर जहाँ लोगों ने जमकर उन्हें खरी-खोटी सुनाई वहीँ दूसरी तरफ बीजेपी से महिला मोर्चा की कार्यकारिणी की सदस्य प्रीति गाँधी ने अलका लांबा को जवाब देते हुए कहा कि, “ये बेशर्म महिला बेकसूर यात्रियों की दुर्भाग्यवश मौत पर भी राजनीति जोड़ रही है. शुक्रिया दिल्ली, इन जैसों को चुनाव जितवाने के लिए.”

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चश्मदीद ने सुनाई पूरी कहानी

इस भयानक हमले को बयां करते हुए इस बस में मौजूद एक यात्री योगेश ने बताया कि, “हादसा उस वक़्त हुआ जब हम अमरनाथ दर्शन से लौट रहे थे. योगेश ने बताया कि हमारी बस शाम को 5 बजे निकली थी लेकिन दो घंटे के सफर के बाद ही अनंतनाग से लगभग  2 किलोमीटर पहले ही हमारी बस खराब हो गई. काफी मशक्कत के बाद हमारी बस जैसे ही चलने को हुई तो बस की खिड़कियों पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसने लगीं.

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हमने मौत को अपने सामने देखा था. बस में मौजूद कई लोगों को गोलियां लगीं थीं, और हमे भी बचने की कोई उम्मीद नहीं दिख रही थी लेकिन हमारे बस के ड्राईवर ने हिम्मत नहीं छोड़ी थी. बस ड्राईवर सलीम की ही बहादुरी का अंजाम है कि बस में मौजूद (उन सात के अलावा) सभी लोग जीवित रह पाए. सलीम की बहादुरी का अंदाज़ा आप इस बात से भी लगा सकते हैं कि सलीम बस चला रहे थे और आंतकी बस पर गोलियां बरसाए जा रहे थे. चश्मदीदों ने बताया कि आतंकी तबतक फायरिंग करते रहे जब तक बस मिलिट्री कैंप तक नहीं पहुँच गयी.  कैंप में पहुँचने के बाद सेना ने बस में मौजूद लोगों को  बचाने का काम किया.