अमरनाथ यात्रियों से भरी बस में हमला हुआ और इस हमले 7 लोगों की जान चली गयी. यह घटना 10 जुलाई की रात में करीब 8.20 के आसपास हुई. इस घटना के बाद पूरा देश सकते में हैं कि आखिर इतनी सुरक्षा के बावजूद इस तरह के आतंकी हमले कैसे हो जाते हैं! इस घटना के बाद तमाम राजनीतिक दलों की तरफ से कड़ी निंदा करने वाले बयान आये, जिसमें उन्होंने इस घटना की कड़ी निंदा और इस पर कार्रवाई करने की मांग की है लेकिन सोचने वाली बात तो ये है कि सरकार ऐसी घटनाओं को रोक नही पा रही है और हालात और ख़राब होते जा रहे हैं लेकिन बदले में संतुष्टि के लिए कड़ी निंदा की बात कर दी जाती है. इस बार भी अभी तक वही हुआ, एक तरफ घटना हुई तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर ट्रैफिक बढ़ गया और कड़ी निंदा होने लगी. प्रधानमंत्री मोदी भी इससे पीछे नही रहे और उन्होंने भी इस हमले की कड़ी निंदा की. उन्होंने लिखा कि

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प्रधानमंत्री मोदी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से किये गये इस ट्वीट पर लोगों ने काफी रिप्लाई किये. जिसमें कुछ ने तो श्रद्धांजलि दी तो कुछ ने पीएम मोदी से इस पर कड़ी निंदा की जगह कड़ी कार्रवाई की गुजारिश की. जय नाम के एक यूजर ने लिखा कि “जितनी शिद्दत से आप कड़ी निंदा करते है उतनी ही शिद्दत से सैनिको को खुली छूट दे देता तो कश्मीर में अमन चैन कबका आगया होता”

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वैसे देखा जाए तो हमले होने में देर नही लगती कि सरकार की तरफ से कड़ी निंदा पहले ही आ जाती है. क्या कड़ी निंदा से हमले में हुए नुकसान की भरपाई हो सकती है? कश्मीर में जो हालात हैं,  उसको देखते हुए सेना के हाथ में चार्ज नही दे देना चाहिए क्या ? क्या हम ऐसे ही अपने लोगों की जान गंवाते रहेंगे क्या? इन सबके बीच बड़ा सवाल ये भी उठता है कि आखिर हिंदुस्तान के आम नागरिकों की जान सुरक्षित नही है लेकिन अलगावादियों को Z श्रेणी की सुरक्षा दी जा रही है, आखिर क्यों नही उनकी सुरक्षा हटा ली जाती ?

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आपको बता दें कि अमरनाथ की गुफा में भगवान शिव के दर्शन के लिए जा रही बस पर हमला हुआ और इसमें 7 लोगों की जान चली गयी .  जिसमें 5 गुजरात और 2 महाराष्ट्र के थे. यह हमला अनंतनाग के बटेंगू में हुआ. कहा जा रहा है कि मरने वालों की संख्या और हो सकती थी लेकिन बस चालक ने समझदारी दिखाते हुए काफी लोगों की जान बचायी. पीएम मोदी के इस ट्वीट पर एक अकाउंट से लिखा गया कि “सुबह पत्थरबाज को 10 लाख देने घोषणा और शाम को # AmarnathYatra में 7 यात्रियो की मौत, कहा हैं मानवअधिकारो की वकालत करने वाले देशद्रोही”

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कुछ लोगों ने सरकार पर ही सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर जम्मू-कश्मीर में भी आप की पार्टी सरकार में पार्टनर है और केंद्र में आप हो ही तो फिर ऐसी घटनाएँ क्यों?  अभिषेक नाम के एक यूजर ने लिखा कि “सरकार किसकी है?” वैसे सवाल भी वाजिब है कि केंद्र में और राज्य में भी बीजेपी की सरकार है तो फिर ये हमला क्यों नही रुक रहा.

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अमरनाथ

अमरनाथ यात्रा का धार्मिक पहलू भी मुस्लिम समुदाय के साथ एक दिलचस्प रिश्ते से जुड़ा है. करीब 14,000 फुट की ऊंचाई पर बसी यह गुफा और शिवलिंग की खोज एक मुसलमान चरवाहे बूटा मलिक ने 19वीं शताब्दी में की थी. पुजारी भले ही हिन्दू हों, लेकिन आज भी गुफा के संरक्षकों में मलिक के परिवार के लोग हैं, इसलिए आतंकियों का यह हमला एक समुदाय के खिलाफ नहीं, बल्कि कश्मीर की साझा संस्कृति और अर्थव्यवस्था पर हमला है.