दुखद घटना से हर कोई आहत है. वहीँ दूसरी ओर कुछ अवसरवादी लोग इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अमरनाथ यात्रा का महत्व कश्मीरी मुस्लिमों के लिए भी उतना ही है जितना कि हिन्दुओं के लिए. इस यात्रा पर आए हिन्दु श्रधालुओं के चलते कश्मीर के कारोबारियों का बहुत मुनाफा होता है. जो लोग कश्मीर में हुई इस घटना को सांप्रदायिक रूप देना चाहते हैं उन्हें कुछ भी कहने से पहले सोचना चाहिए. amarnath yatra

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जानिये मंदिर का इतिहास…

अमरनाथ गुफ़ा को लेकर लोगों के कई विचार हैं कुछ लोग मानते हैं कि अमरनाथ मंदिर लगभग 5,000 साल पुराना है और धर्म ग्रंथ भी इस बात की पुष्टि करने में मदद करते हैं. ये गुफ़ा कैसे अस्तित्व में आई इसका कोई पुख्ता सबूत तो नहीं मिलता लेकिन इसके पीछे एक कहानी कश्मीर से लेकर पूरे हिन्दुस्तान में कही जाती है और लोग इसी कहानी को मानते भी हैं.

 

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तो ऐसे हुई थी मंदिर की खोज…

इस कहानी के अनुसार, बकरियां चराते हुए एक कश्मीरी मुस्लिम गड़रिया इस इलाके में बकरियां चरा रहा था. बकरियां चराते हुए उसकी मुलाक़ात एक साधू से हुई जिसने मलिक को आग सेकने के लिए एक अंगीठी दी. इस अंगीठी में कोयला भरा हुआ था लेकिन जब मलिक उस अंगीठी को लेकर घर पहुंचा तो अंगीठी में पड़ा कोयला सोना बन गया. ये देखकर मलिक खुश हो गया और उस साधू को धन्यवाद करने के लिए उस जगह के लिए घर से निकल गया लेकिन उसे वहां साधू नहीं मिला बल्कि वहां एक गुफ़ा मिली. गडरिये ने जैसे ही गुफ़ा के भीतर प्रवेश किया तो उसने वहां पर देखा कि भगवान् शंकर बर्फ के बने शिवलिंग के रूप में वहां विराजमान हो गए थे. इसके बाद उसने गावं वापस लौटकर ये कहानी सबको सुनाई. इस तरह बर्फानी बाबा की पवित्र गुफ़ा की खोज हुई जिसको हम अमरनाथ के नाम से जानते हैं.

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क्या है मान्यताएं…

बूटा मलिक की ये कहानी आज भी कश्मीर में सुनी और सुनाई जाती है. इस पवित्र गुफ़ा की ऊँचाई 150 फीट है और लंबाई 90 फीट. श्रीनगर से इसकी दूरी लगभग 145 किलोमीटर है. इस गुफ़ा में मौजूद आकृतियां बर्फ से बनी हैं  और इन आकृतियां की संख्या चार है. वर्षो से इन्हें हिन्दू देवी-देवताओं के रूप में पूजा जाता है. हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार अमरनाथ में भगवान् शिव बर्फ की शिवलिंग के रूप में विराजमान हैं. साथ ही यहाँ गणेश जी, माता पार्वती और काल भैरव को भी पूजा जाता है. अमरनाथ गुफ़ा में बर्फ  से बने भगवान् मई से अगस्त के बीच अवतरित होते हैं और फिर खुद ही अंतर्ध्यान भी हो जाते हैं.

 

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अमरनाथ की यात्रा पर गए यात्री न केवल यात्रा करते हैं वो कश्मीर की वादियों की खूबसूरती का आनंद भी लेते हैं. इन यात्रियों में से कुछ वैष्णों देवी और लद्दाख भी जाते हैं. इस दौरान कश्मीर के व्यापारियों को काफी मुनाफ़ा होता है l