अमरनाथ यात्रा से लौट रहे बस यात्रियों पर सोमवार को हुए हमले ने पूरे देश को हिला दिया है. आतंकवाद इन दिनों चरम पर है और जनता इस समय बेहद परेशान है. हमले में 7 लोग मरे हैं और कई लोग घायल हुए हैं लेकिन ये हमला रुक सकता था. जी हाँ अगर सरकार चाहती तो इस हमले को रोक सकती थी वो भी सिर्फ एक चेतावनी को सावधानी से लेकर.

ड्राईवर की सूझभूझ से टला बड़ा हादसा…

आपको बता दें जिस बस पर हमला हुआ है उसका ड्राईवर सलीम है और उसे एक भी खरोच नहीं आई है. सलीम ने खुद बताया कि सामने से उसपर फायरिंग हो रही थी लेकिन उसने बस नहीं रोकी और तेज़ रफ़्तार से बस भगता रहा. ख़ास बात ये है सलीम को एक भी खरोंच नहीं आई है. अब सवाल ये है आखिर इस हमले के बारे में जब पहले ही पता था तो क्यों इसे रोकने की कोशिश नहीं की गयी ? \

पहले मिली थी चेतावनी…

दरअसल कुछ समय पहले आतंकी संगठन जमात उद दावा के सेकेंड कमानने एक वीडियो बनाते हुए   भारत को चेतावनी दी थी कि वो कश्मीर आज़ाद कराएगा और पीएम मोदी को भी उसने धमकी दी थी. उसने वीडियो में कहा था अगर मीडिया चाहे तो कश्मीर को आज़ादी मिल सकती है.  आपको बता दें मक्की के इस बयान से पहले कश्मीर में 13 जून को हमला हुआ था. उम्मीद थी कि बुरहान वानी की बरसी पर कश्मीर में जरूर हमला होगा लेकिन आतंकियों ने अमरनाथ यात्रा को निशाना बनाया.

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13 करोड़ का इनामी है मक्की…

हाफिज सईद को नज़रबंद होने के बाद से ही मक्की कमान सम्भाल रहा है और उसपर 13 करोड़ का इनाम है. उसने पुणे के जर्मन बेकरी में धमाके के 8 दिन पहले मुजफ्फराबाद में भाषण दिया था और पुणे समेत भारत के 3 शहरों में आतंकी हमले करने की धमकी दी थी.

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ड्राईवर ने बताई अमरनाथ यात्रा पर हुए हमले की वजह, अगर उसने वो एक कदम ना उठाया होता तो जा सकती थी और लोगों की जान..

अमरनाथ यात्रा के लिए इस बार पहलगाम और बालटाल- इन दो रूटों से 29 जून को बेहद कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच शुरू करने का इंतजाम किया गया था.  आपको बता दें इस बार यात्रा के लिए केवल 11000 लोगों को अनुमति दी गयी थी जबकी करीब 1 लाख लोगों ने इस यात्रा के लिए आवेदन किया था.   45 दिनों तक चलने वाली यात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पूरे मार्ग पर सैटलाइट ट्रैकिंग सिस्टम, ड्रोन्स, मोबाइल बंकर वाहन और रोड ओपनिंग पार्टीज (आरओपी) की तैनाती की गई थी. सुरक्षा प्रबंधों को पुख्ता बनाने के लिए केंद्र ने राज्य सरकार को 40 हजार अर्धसैनिक बल और प्रदान किए थे लेकिन फिर भी आतंकियों ने हमला करते हुए 7 लोगों को मार गिराया और सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए.

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कैसे हुआ आतंकी हमला…

आपको बता दें सोमवार की शाम जब 3 बस अमरनाथ से यात्रा करके लौट रही थीं तो एक बस का टायर पंचर हो गया था. पंचर की वजह से बस कुछ देर रुकी और बाकी 2 बसों से थोड़ा पीछे रह गई.   जैसे ही बस ठीक हुई और आगे चली आतंकियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू करदी. वः द्रश्य कितना भय्व्य होगा यह कल्पना से भी दूर है. आतंकवादियों ने दर्शन करके लौट रहे हिन्दू यात्रियों पर 3 तरफ से गोली बरसानी शुरू की और लगातार बरसाते रहे.

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ड्राईवर ने वो कदम नहीं उठाया होता तो जा सकती थी कई और लोगों की जान…

जब बस पर आतंकवादी गोलियां बरसा रहे थे तो लोगों को समझ नहीं आ रहा था क्या करें ? अधिकाँश लोग सीट के नीचे छिप रहे थे और एक दूरसे की चींख सुन रहे थे.  वो पल इतना डरावना था कि लोगों ने बाद में आने के बाद इस द्रश्य के बारे में बताने से भी इनकार कर दिया. हमले में 7 लोग मारे गये और कई लोग घायल हो गये, घायलों में बस का ड्राईवर भी शामिल है. वो ड्राईवर जो मुसलमान है.

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ड्राईवर सलीम के इस कदम से बची थी कई लोगों की जान…

पुलिस के मुताबिक़ बस 7 बजे के बाद हाईवे पर गई थी जो नियमों के विरुद्ध है लेकिन  क्या इसका मतलब ये है 7 बजे के बाद आतंकियों को हमला करने की इजाजत है ?  जब बस पर हमला हुआ था तो ड्राईवर कुछ देर तक समझ नहीं पाया था क्या करूं ! उसने बिना कुछ सोचे समझे बस की स्पीड बढ़ा दी और उस इलाके से बस को निकलाना चाहा.  ड्राईवर सलीम की ही हिम्मत थी कि बस में कई यात्री सुरक्षित बच गये नहीं तो हादसा और भी गंभीर हो सकता था. वो मुसलमान है और उसने हिन्दू यात्रियों को बचाया है शयद इस बात का ज़िक्र कोई नहीं करेगा लेकिन सच यही है सलीम की ही दिलेरी से बे में अनेक यात्री सुरक्षित बच गये.

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पहले से थी हमले की खबर…

आतंकवादियों ने पहले पुलिस चौकी पर हमला किया था और फिर आगे चलकर यात्रियों पर लेकिन पुलिस तब भी सो रही थी.  यह बात सभी जानते हैं  कुछ दिन पहले ही IB ने हमले की आशंका बताई थी और लोगों को सचेत किया था हालाकिं कश्मीर के हुर्रियत कॉन्फ्रेंस नेता सैयद अली शाह गिलानी ने यात्रियों पर हमले की आशंका को खारिज करते हुए कहा था कि यात्री हमारे मेहमान है.

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तो इस वजह से हुआ था हमला…

एक खबर के अनुसार आतंकी  बटेंगू में पुलिस जीप पर फायरिंग कर रहे थे लेकिन उसी मुठभेड़ के वक्त यात्रियों से भरी बस बीच में आ गई. इसलिए यात्री हमले के शिकार हो गए, वजह जो भी थी हमला इतनी सुरक्षा के बीच होना वाकई बहुत गलत है.