महाभारत’ एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें भारतीय ही नहीं, विश्‍व इतिहास का रहस्य छुपा हुआ है। महाभारत संबंधी अब तक जितनी भी खुदाई हुई है या उस काल के तथ्‍य मिले हैं, वे सभी मानव इतिहास के रहस्यों से परदा उठाते हैं महाभारत में कई घटना, संबंध और ज्ञान-विज्ञान के रहस्य छिपे हुए हैं। महाभारत का हर पात्र जीवंत है, चाहे वह कौरव, पांडव, कर्ण और कृष्ण हो या धृष्टद्युम्न, शल्य, शिखंडी और कृपाचार्य हो। महाभारत सिर्फ योद्धाओं की गाथाओं तक सीमित नहीं है। महाभारत से जुड़े शाप, वचन और आशीर्वाद में भी रहस्य छिपे हैं, क्योंकि महाभारत का हर व्यक्ति रहस्यमय था।

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महाभारत प्रारम्भ होने से पहले भगवान कृष्ण ने सभी योद्धाओ से पूछा की यह युद्ध अकेले समाप्त करने में सभी योद्धाओ को कितना समय लगेगा.. भीस्म ने कहा उन्हें 20 दिन लगेंगे. द्रोणाचार्य का उत्तर था 25 दिन. कर्ण ने 24 दिन मांगे वही अर्जुन ने 28. परन्तु बर्बरीक के उत्तर ने कृष्ण भगवान को आश्चर्यचकित कर दिया. बर्बरीक ने कहा उन्हें मात्र 1 मिनट ही चाहिए इस युद्ध पर विजय हासिल करने पर वो भी सिर्फ अपने बल पर. पूरी कहानी कुछ इस प्रकार है

भीम का पोता और घटोत्कच का पुत्र बर्बरीक. बर्बरीक को युद्ध की कला का ज्ञान अपनी माँ मौर्वी से प्राप्त हुआ था. वह अपने बचपन से ही बहादुर योद्धा था बर्बरीक की तपस्या से खुश होकर भगवान शिव ने उससे 3 तीरो से सम्मानित किया
 
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पहले तीर उसके दुश्मनो को लाल स्याही से रंग देगा

दूसरे तीर से उनको जिनको बर्बरीक बचाना चाहता है
तीसरा तीर उन् सभी चीज़ो को नष्ट कर देगा जिन्हे पहले तीर से रंगा गया है या फिर वह सभी चीज़े जिन्हे रंगा नही गया

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बर्बरीक के गुरु ने गुरु दक्षिणा के रूप में उससे 2 वचन लिए
1. बर्बरीक अपने व्यक्तिगत प्रतिशोध के लिए तीर का इस्तेमाल न करे
2. बर्बरीक हमेशा युद्ध के कमज़ोर वर्ग के साथ हो

 

बर्बरीक दुनिया का सर्वश्रेष्ठ धनुर्धर थे। बर्बरीक के लिए तीन बाण ही काफी थे जिसके बल पर वे कौरवों और पांडवों की पूरी सेना को समाप्त कर सकते थे। युद्ध के मैदान में भीम पौत्र बर्बरीक दोनों खेमों के मध्य बिन्दु एक पीपल के वृक्ष के नीचे खड़े हो गए और यह घोषणा कर डाली कि मैं उस पक्ष की तरफ से लडूंगा जो हार रहा होगा। बर्बरीक की इस घोषणा से कृष्ण चिंतित हो गए।

भीम के पौत्र बर्बरीक के समक्ष जब अर्जुन तथा भगवान श्रीकृष्ण उसकी वीरता का चमत्कार देखने के लिए उपस्थित हुए तब बर्बरीक ने अपनी वीरता का छोटा-सा नमूना मात्र ही दिखाया। कृष्ण ने कहा कि यह जो वृक्ष है ‍इसके सारे पत्तों को एक ही तीर से छेद दो तो मैं मान जाऊंगा। बर्बरीक ने आज्ञा लेकर तीर को वृक्ष की ओर छोड़ दिया।
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जब तीर एक-एक कर सारे पत्तों को छेदता जा रहा था उसी दौरान एक पत्ता टूटकर नीचे गिर पड़ा। कृष्ण ने उस पत्ते पर यह सोचकर पैर रखकर उसे छुपा लिया की यह छेद होने से बच जाएगा, लेकिन सभी पत्तों को छेदता हुआ वह तीर कृष्ण के पैरों के पास आकर रुक गया।
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तब बर्बरीक ने कहा कि प्रभु आपके पैर के नीचे एक पत्ता दबा है कृपया पैर हटा लीजिए, क्योंकि मैंने तीर को सिर्फ पत्तों को छेदने की आज्ञा दे रखी है आपके पैर को छेदने की नहीं।
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तब कृष्ण ने बर्बरीक से पूछा की वह किस की तरफ से युद्ध लड़ना चाहेगा तब बर्बरीक ने बताया की अपने गुरु को दिए हुए वचन के अनुसार को कमज़ोर वर्ग की ओर से युद्ध का हिस्सा बनेगा तब कृष्णा ने बर्बरीक की बात का विरोध करते हुए कहा की 3 तीरो की शक्ति मिलकर उससे युद्ध भूमि पर सबसे शक्तिशाली योद्धा बनाती है इसलिए उसके किसी भी वर्ग का पक्ष लेने पर दूसरे वर्ग को कमज़ोर बना देगा, आखिर में बार बार कमज़ोर का साथ देते उससे सबको नष्ट करना पड़ेगा स्वं को भी. ऐसे हालातो को रोकने के लिए कृष्ण ने बर्बरीक का सर माँगा
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पर बर्बरीक ने जब महाभारत जैसे महाकाव्य युद्ध को देखनी की जिज्ञासा प्रकट की तोह कृष्ण ने उन्हें यह कहकर दिलासा दिया की उसका सर धड़ से अलग होने के बावजूद भी उसका सर सचेत अवस्था में होगा और उससे एक पहाड़ की छोटी पर रखा जाएगा ताकि वह पूरा युद्ध देख सके
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एक सच्चा योद्धा और कृष्ण का शिष्य होने का धर्म निभाते हुए बर्बरीक अपना सर धड़ से अलग करने को राज़ी हो गया
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कृष्ण का वचन निभाते हुए भीम ने तब उस महान क्षत्रिय का सर पहाड़ी की छोटी पर स्थापित किया
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युद्ध के अंत में जब पांडव आपस में बेहेस रहे थे की किस के कारण यह युद्ध में विजय हासिल हुई है तब कृष्ण ने कह की यह सब उन्हें बर्बरीक से पूछना चाहिए क्यूंकि वह ही एकलौता तटस्थ गवाह है. तब बर्बरीक ने कहा की वह कृष्ण ही है जिनकी समझदारी सूज भुज के कारण यह युद्ध जीता गया