भारतीय रेलवे को 1951 में राष्ट्रीयकृत किया गया था और यह आज एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क बन चुका है और एक ही प्रबंधन के तहत संचालित दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है.

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हम सब जानतें है कि इतना बड़ा नेटवर्क होने के साथ-साथ भारतीय ट्रेनों में बहुत सारे कोच भी होते हैं और इन पर कुछ संख्या अंकित होती है, परन्तु क्या आपने कभी सोचा है कि ये नंबर क्या बताते हैं.

कोच पर आमतौर से 4, 5 या 6 अंकों की संख्याएं लिखी होती है, जिसमें से पहले दो अंक निर्माण वर्ष को दर्शाते हैं यानी गाड़ी किस सन में बनी है. उदाहरण के लिए, 8439– जिसका अर्थ है 1984 में निर्मित, 04052– जिसका मतलब है 2004 में निर्मित, या फिर 92132– जिसका अर्थ है 1992 में निर्मित कोच.

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कुछ मामलों में पहले दो अंक उस वर्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसमें कोच को क्षेत्रीय रेलवे में लाया गया था और कभी-कभी उस वर्ष का प्रतिनिधित्व भी करते हैं जिस वर्ष कोच को फिर से निर्मित किया गया था, लेकिन उत्तर रेलवे की कुछ राजधानी गाड़ियों के कोचों पर अंकित संख्या इस पैटर्न पर आधारित नहीं हैं. उन गाड़ियों के कोच पर 2951/2 या  2953/4 इत्यादि संख्या अंकित होती हैं.

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कुछ कोच पर संख्याओं के वर्णों के रूप में प्रत्यय भी दिखाई दे सकते हैं. इस प्रक्रिया के तहत 3, 4 या 5 अंकीय सीरियल नंबर वाले कई पुराने कोचों को पुन: नामित किया गया है. अक्सर रेलवे जोन को प्रदर्शित करने के लिए उसके संक्षिप्त नाम को प्रत्यय की तरह प्रयोग किया जाता है. उदाहरण के लिए किसी कोच का नंबर ‘ER 89472A’ या ‘SE978052A’ भी हो सकता है.

2000 के बाद से, निर्माण वर्ष के रूप में ’00’, ’01’, आदि को कोच पर शुरूआती संख्या के रूप में दर्शाया जाता है. कभी-कभी, रेलवे जोन को प्रदर्शित करने के लिए उसके संक्षिप्त नाम को उपसर्ग के रूप में प्रयोग किया जाता है.

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उदाहरण के लिए,’SK 01252 AB’ जहां ‘SK’उस कोच को इंगित करता है जिसकी देखभाल संयुक्त रूप से दक्षिण मध्य रेलवे और कोंकण रेलवे द्वारा किया जाता है.