पीएम बनने के बाद पीएम नरेंद्र मोदी ने पड़ोसी देशों से अच्छे संबंधों की वकालत की थीl शपथ में सार्क देशों के प्रमुखों को बुलायाl इसके बाद देश में सबसे पहले जिस बड़े राष्ट्रपति का स्वागत किया था, वह थे चीन के शी जिनपिंगl वे भारत दौरे आए. मोदी उऩ्हें अपने गृह राज्य गुजरात ले गएl साबरमती नदी के किनारे उन्हें झूले पर बैठायाl ऐसा माहौल बना कि शायद अब रिश्ते बेहतरी की तरफ तेज़ी से बढ़ेंगेl लेकिन चीन के अड़ियल रवैये की वजह से तीन सालों में ऐसा नहीं हो पायाl एक ओर यहां राष्ट्रपति जिनपिंग मोदी के साथ थे तो दूसरी ओर अरुणाचल में कुछ चीनी सैनिकों ने घुसपैठ भी कर दी थीl

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पाकिस्तान से चीन की करीबी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भी भारत के लिए परेशानियां खड़ी कर रही हैं और NSG में भीl सुरक्षा परिषद में चीन बार-बार मसूद अज़हर को बचा लेता हैl उसे अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने में अपना वीटो इस्तेमाल करता आया हैl हाल ही में चीनी सैनिकों ने सक्किम राज्य के ‘दोकाला’ क्षेत्र में दाख़िल होकर भारतीय सेना के 2 बंकर ध्वस्त कर दिए। इसके बाद से चीन के साथ डोकाला में चल रही तनानती के बीच अब आखिरकार मोदी सरकार ने एक बड़ा एलान किया हैl

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पीएम मोदी ने सेना के हाथ खोल दिए हैं। कई रक्षा विशेषज्ञ कह चुके हैं कि चीन छोटी मगर भीषण जंग छेड़ सकता है। इसे देखते हुए पीएम मोदी ने हथियार खरीदने के मामले में सेना को छूट देने का फैसला ले लिया है। इसके साथ ही पिछले काफी समय से यह महसूस भी किया जा रहा था कि सेना के पास जरूरत के हिसाब से हथियारों और गोला-बारूद का भंडार नहीं है। चीन की बढ़ती दखलअंदाजी को देखते हुए इस संबंध में लगातार मांग भी उठ रही थीl

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इसलिए सरकार ने उप सेना प्रमुख को भी अब किसी भी इमरजेंसी से निपटने के लिए हथियारों, पुर्जों और गोला-बारूद की कमी को पूरा करने के लिए पूरे अधिकार दे दिए हैं। इसका मतलब ये कि अब अगर सेना को अगर ये लगे कि जंग की तैयारी के लिए हमारे पास कोई हथियार होना चाहिए तो सेना बिना किसी की मंजूरी के या बिना किसी के इंतज़ार के भी अपने आप सौदे कर सकती है।

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इसके साथ ही सेना के उपसेना अध्यक्ष की इमरजेंसी हथियार खरीदने की पावर को भी 40 हजार करोड़ कर दिया गया है। रक्षा विशेषज्ञ सुशील शर्मा के मुताबिक, यह सेना को मजबूत बनाने की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है। इससे सेना बिना इंतजार अपनी जरूरत का सामान खरीद सकेगी। फाइलों के इधर से उधर मूव होने के चलते होने वाली देरी से भी बचा जा सकेगाl

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आपको बता दें कि सेना के पास करीब 46 तरह के हथियार हैं, जिसमें 10 तरह के हथियारों के कलपुर्जे हैं, जबकि 20 तरह के गोला-बारूद और माइंस हैं। इसमें आर्टलरी और टैंक से जुड़ा गोला बारूद शामिल है। सेना हर समय किसी भी हालात में 40 दिन की लड़ाई की तैयारी रखती है। सुशील शर्मा के मुताबि‍क, अभी हमारे पास 25 दि‍न की तैयारी है। इसे देखते हुए यह बहुत बड़ा फैसला है।

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सेना को मंत्रिमंडल की सुरक्षा मामलों की समिति तथा रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद से मंजूरी लेने की भी जरूरत नहीं होगी। सेना को 46 प्रकार के हथियार और दस तरह के हथियार सिस्टम के कलपुर्जे खरीदने की मंजूरी दी गई है। 20 अन्य प्रकार के हथियारों की खरीद का अधिकार सेना को देने का प्रस्ताव विचाराधीन है।