चारों तरफ से कई देशों से घिरा है भारत 

भारत चारों तरफ से कई देशों से घिरा हुआ है और उसके पड़ोसी अक्सर उसको परेशान करने की नाकाम कोशिश करते रहते हैं. इनमें पाकिस्तान और चीन तो दो ऐसे देश हैं जो हर वक्त भारत के खिलाफ ही काम करने का सोचते हैं. भारत की सरहदें अक्सर तनाव ग्रस्त रहती हैं एक तरफ पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आता और वहीँ दूसरी तरफ चीन भी भारत से उलझता रहता है. चीन कभी सिक्किम को लेकर भारत से उलझता है तो कभी डोकलाम को लेकर.

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सामान की तरह चीन की धमकियां भी खोखली 

चीन कह रहा है कि अगर भारत ने भूटान से सैनिकों को नहीं हटाया तो वो भारत के ऊपर हमला कर देगा. अभी हाल ही में G-20 की बैठक में पीएम मोदी की मुलाक़ात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई है लेकिन लगता नहीं है कि कोई बात बनी हो. चीन को लेकर इस समय भारत में आक्रोश का माहौल है ऐसे में लोगों ने चीनी सामान का बहिष्कार करना शुरू कर दिया है. वैसे तो चीन, भारत को धमकी दे रहा है लेकिन उसके सामान की ही तरह उसकी धमकियां भी खोखली हैं. भारत पर वो कभी भी हमला नहीं कर सकता और भारत पर हमला न करने की कई वजहें हैं.

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चीन का दोगलापन 

सिक्किम राज्य के भारत में विलय होने के लिए भारतीय संसद में जो विधेयक पास किया गया था वो 1975 में पेश किया गया. 2003 यानी इसके 28 साल बाद चीन ने इसे मान्यता भी दे दी. अब हालत ऐसी है कि सिक्किम को आजाद कराने के लिए हो रहे आंदोलन को चीन अपना समर्थन दे सकता है. दरअसल चीन भूटान के विवाद को लेकर भारत की नाक दबाने के लिए सिक्किम का उपयोग करने की कोशिश कर सकता है. हालाँकि चीन का जिस तरीके का इतिहास रहा है उसको देखते हुए राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ‘चीन केवल धमकी ही दे सकता है.’ इतना ही नही, भारत की स्थिति आज जिस तरीके से है उसे देखते हुए कहा जा सकता है कि चीन युद्ध करने की हिमाकत कभी नहीं कर सकता और अगर वह ऐसा करता भी है तो उसका वैश्विक आर्थिक क्षेत्र में महासत्ता बनने का सपना कभी पूरा नहीं हो पाएगा. उसके इस सपने की मौत उसकी आंखों में ही हो जाएगी.

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जिनपिंग बदलना चाहते हैं चीन की छवि इसलिए भारत से नहीं कर सकते जंग 

वहीँ दूसरी ओर चीन के राष्ट्रपति ने विश्व में अपनी एक अलग छवि बनाई है. वो चाहते हैं कि चीन को उस छवि से मुक्त करवाया जाए, जिसे दुनिया झगड़ालू और हमेशा अपने पड़ोसियों से विवाद करते रहने का मानती है. चीन के राष्ट्रपति चिनपिंग चाहते हैं कि चीन को लोग एक चतुर, चालाक व्यापारी की नजरों से देखें. चीन भले ही स्वयं को साम्यवादी बता रहा हो लेकिन सच्चाई ये है कि उसकी छवि कट्टर पूंजीवादी देश की बनती जा रही है. दावोस में वर्ल्ड इकानॉमी फोरम में वैश्विकरण के समर्थन में भाषण देकर चीन ने सबको चौंका दिया था.

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जंग हुई तो चीन हो जाएगा पीछे 

अब जबकि चीन दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश बनना चाहता है तो उसे अपनी छवि बदलनी ही पड़ेगी. अगर चीन की छवि एक झगड़ालू मुल्क की बनती है तो उसे व्यापार में भारी घाटा होगा और उसका विश्व शक्ति बनने का सपना खत्म हो जाएगा. चीन ने वन बेल्ट वन रोड की जो परियोजना चलाई है उसे भी उसके अड़ियल और झगड़ालू रुख से नुकसान होने की पूरी सम्भावना है तो ऐसे में चीन भारत को धमका तो सकता है लेकिन उसकी हिम्मत नहीं कि वो भारत पर हमला कर सके. चीन अच्छी तरह जानता है कि भारत भी आज बहुत बड़ी शक्ति है और ऐसे में अगर वो भारत से लड़ता है तो नुकसान ज्यादा उसे ही उठाना पड़ेगा.

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चीन चाहता है कि वो एशिया के बाजारों में पैर पसार सके लेकिन भारत के सहयोग के बिना ये संभव नहीं हो सकता. तो ऐसे में चीन की हिम्मत नहीं है कि वो भारत से लड़े अगर वो ऐसा करता है तो वो बहुत पीछे हो जाएगा और इस समय भारत अकेला नहीं उसके साथ दुनिया की कई ताकतें हैं.