मोदी सरकार ने सत्ता में आने के बाद से ही कई ऐसे काम किये हैं जिनके चर्चे  कई दिनों तक सोशल मीडिया पर बने रहे. बात करिए चाहे नोटबंदी जैसे कड़े कदमों की या फिर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे महत्वपूर्ण कदम की जिसने देश की जनता को सालों के इंतज़ार के बाद ये एहसास दिला दिया कि देश की सरकार यूँ ही अपने सैनिकों का खून नहीं बहने देगी. ऐसे में इन सारी उपलब्धियों के बावजूद बीजेपी सरकार पर आये दिन ये आरोप लगते रहे हैं कि केंद्र सरकार कोई काम नहीं कर रही. वगेरह-वगेरह.

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ऐसे में हाल ही में बीजेपी सरकार को लेकर विश्व की सबसे बड़ी और बेहतरीन मैगज़ीन फोर्ब्स ने एक खुलासा करके सबको हैरान कर दिया है.

जानिए क्या खुलासा किया है फोर्ब्स मैगज़ीन ने

दरअसल इस बार मोदी सरकार ने एक ऐसे क्षेत्र में अपने काम से झंडा गाड़ा है जिसके बारे में शायद ही कोई सोच सके. एक सर्वे में हुए खुलासे के मुताबिक अपने देश के नागरिकों का भरोसा जीतने के मामले में भारत सरकार विश्व में नबंर वन साबित हुई है. भारतीय नागरिकों ने विश्व में सबसे ज्यादा भरोसा मोदी सरकार और उनकी नीतियों पर दिखाया है.

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इकोनॉमिक कॉर्पोरेशन ओर्गनाईजेशन कि रिपोर्ट में हुआ ये खुलासा 

हाल ही में प्रकाशित हुई इकोनॉमिक कॉर्पोरेशन ओर्गनाईजेशन की एक रिपोर्ट मे कहा गया है कि 73 फीसदी भारतीय नागरिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर अटूट भरोसा करते हैं. माना जा रहा है कि ये विश्व में सबसे अधिक पक्ष में आये वोट हैं. इस लिस्ट में दूसरे पायदान पर हैं कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रुडो हैं. जस्टिन की सरकार उन पर 62 फीसदी भरोसा करती है. इस लिस्ट में तीसरे पायदान पर हैं तुर्की के लोग जो इस रिपोर्ट के मुताबिक अपनी सरकार पर 58 प्रतिशत भरोसा रखती है.

इस लिस्ट में रूस और जर्मनी जैसे शक्तिशाली देश भी भारत से पीछे हैं और लिस्ट में चौथे और पांचवे पायदान पर उन्हें जगह मिली हैं.  रूस की जनता ने जहाँ देश कि सरकार पर 58% वोट दिए हैं वहीँ दूसरी तरफ जर्मनी की जनता ने देश की सरकार को 55 प्रतिशत वोट दिए हैं.

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इस लिस्ट में सबसे ज्यादा हैरान करने वाला नाम था अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का जिनकी महज़ 30 प्रतिशत जनता को उनपर भरोसा है.  इस लिस्ट में ग्रीस सबसे कम यानि कि महज़ 13 फीसदी जनता का भरोसा जीत सकी है. हालाँकि इसका एक कारण यूरोप के माइग्रेशन क्राइसिस को बताया जा रहा है.

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वहीं हाल ही में एक भ्रष्टाचार और घोटाले के दौरान राष्ट्रपति पार्क गीन-हई के महाभियोग ने दक्षिण कोरियाई सरकार में लोगों के आत्मविश्वास को घटाकर 25 फीसदी पर ला दिया है. फोर्ब्स मैगज़ीन में छपे इस सर्वे के अनुसार पिछले कुछ सालों में अलग-अलग देशों की जनता का भरोसा उनकी सरकार से बदल रहा है. इस सर्वे में कुल 15 देशों का नाम लिया गया था जिसमे भारत सबसे आगे तो वहीँ ग्रीस सबसे पीछे रहा है. हम आपको यहाँ बता दें कि ये सभी आंकड़े 2016 के आधार पर लिए गए हैं.

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हाल ही में सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर भी हुआ था बड़ा खुलासा 

एक समय था जब पूरे देश में ख़ुशी का माहौल था  कि भारतीय सेना ने उरी हमले का बदला ले लिया. अजीत डोभाल की निगरानी में भारतीय सेना ने बेहद सटीक तरीके से सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन को अंजाम दिया था. इन सबके बाद लोग मोदी सरकार की तारीफ कर रहे थे और इस कदम की प्रशंसा कर रहे थे. लोगों का कहना है मोदी ने बहुत ही साहसिक फैसला लिया था और देश के मान-सम्मान को बचाया , नही तो पाकिस्तान हम पर आए दिन आतंकियों के घुसपैठ के जरिए और सीजफायर तोड़ते हुए हम पर हमला करता रहा है. ऐसा भी नही है कि इन सब का भारतीय सेना ने कभी जवाब नही दिया, जवाब मुंहतोड़ दिया है लेकिन अशांति का माहौल पाकिस्तान हमेशा से बनाता रहा है. सीमा पर हो रहे लगातार हमले पर मोदी ने सख्ती से निपटने के लिए अजीत डोभाल के नेतृत्व में सर्जिकल स्ट्राइक करने का फैसला लिया और अजीत डोभाल ने इसे बेहद ख़ुफ़िया तरीके से सफल भी किया.

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सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े 3 सवाल…

सर्जिकल स्ट्राइक के बाद विपक्ष ने सरकार पर सवाल उठाया था कि क्या वाकई सर्जिकल स्ट्राइक हुई है ? विपक्ष ने सरकार से इसके सबूत भी मांगे थे और सेना पर भी सवाल उठाये थे, वाकई शर्म की बात थी कि विपक्ष ने सेना पर भी सवाल उठाया था. अब एक ऐसी खबर  जिससे सर्जिकल स्ट्राइक का सच सामने आ गया है.  दरअसल पुणे में रहने वाले एक शख्स ने सरकार ने सर्जिकल स्ट्राइक से जुड़े 3 सवाल पूछे थे. प्रफुल्ल शारदा  ने यह जानकारी क़ानून के तहत मांगी थी.

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ये हैं वो तीन सवाल…

1. भारतीय सेना ने सितंबर, 2016 से पहले कितनी बार सर्जिकल स्ट्राइक की थी और उनमें से कितनी सफल रही थीं?

2  इन सर्जिकल स्ट्राइक में हमारे कितने जवान शहीद हुए? 

3. सितंबर, 2016 के बाद ऐसी कितनी सर्जिकल स्ट्राइक की गई और उनमें से कितनी स्ट्राइक सफल रही थीं?

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रक्षा मंत्रालय से आया ये जवाब…

पहले सवाल को लेकर रक्षा मंत्रालय ने कहा कि हमारे पास सितम्बर में हुई सर्जिकल स्ट्राइक से पहले किसी भी प्रकार के सर्जिकल स्ट्राइक का कोई रिकॉर्ड नहीं है.  दुसरे सवाल में जवाब आया कि 28 सितम्बर को हुई सर्जिकल स्ट्राइक में भारत के किसी भी जवान को हानि नहीं हुई है.  तीसरे सवाल के जवाब में पता चला कि भारत में यह पहली सर्जिकल स्ट्राइक थी.