भारत चीन के बीच बढ़ रहा है गतिरोध 

चीन और भारत के बीच गतिरोध बना हुआ है. दोनों देशों के सैनिक सीमाओं पर खड़े हैं, जहाँ एक ओर चीनी सैनिक जबरन भारत की सीमाओं में घुसना चाहते हैं तो दूसरी ओर भारत के सैनिक चीन की नापाक हरकतों के खिलाफ मोर्चा खोलकर खड़े हैं. आपको बता दें कि सीमा विवाद भारत और चीन के बीच बहुत लम्बे समय से बना हुआ है और इसका कोई स्थायी हल नहीं निकल पा रहा है. जिस सिक्किम को चीन ने भारत का राज्य होने का दर्जा दिया था आज उसी सिक्किम को लेकर वो भारत को धमकियाँ दे रहा है.

source

भारत में चीन के कई लोग रहते हैं जिनमें कई लोग ऐसे भी हैं जिनके पूर्वज चीन के निवासी रहे हैं लेकिन अब वो भारत के नागरिक बन चुके हैं. ऐसे ही लोगों से जब भारत और चीन के बीच चल रहे गतिरोध के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कुछ ऐसे जवाब दिए.

चीनी मूल के भारतीय नागरिक रखते हैं ऐसे विचार 

चीनी मूल के पॉल लियॉन्ग जो अब मेघालय की राजधानी शिलांग में रहते हैं ने कहा कि, ‘हम पूर्ण रूप से भारतीय नागरिक है और भारत ही हमारा घर है. इसलिए भारत में असुरक्षित महसूस करने का कोई सवाल ही नहीं उठता.’ उन्होंने आगे कहा कि, ‘मैं बहुत बार अपने रिश्तेदारों से मिलने चीन गया हूं लेकिन भारत में जितनी स्वतंत्रता से हमारा परिवार रहता है वह बात चीन में नहीं है और चीन भी हमें वहां जाने पर एक हिन्दुस्तानी नागरिक के तौर पर ही देखता है.’ पॉल लियॉन्ग के पूर्वज कोंगटूंग प्रांत से हैं जो दक्षिण चीन का हिस्सा है लगभग 150 साल पहले उनके पूर्वज मेघालय आए और फिर यहीं बस गए.

source

केवल पॉल ही ऐसे शख्स नहीं है जो चीनी मूल के होकर अब भारत में हों उनके अलावा भी कई लोग अब भारत के रंग में रंग चुके हैं. उनके जैसे कई लोग हैं जिनको अब भारतीय होने पर गर्व महसूस होता है. चीन और भारत के बीच डोकलाम क्षेत्र को लेकर जो सीमा विवाद छिड़ा हुआ है उसपर इन लोगों की स्पष्ट राय है कि वो एक और युद्ध नहीं चाहते और और इस पूरे विवाद को लेकर उनकी राय भारत के पक्ष में है. उनकी भावनाएं भारत से जुड़ी हैं और वो भारत का ही समर्थन करते हैं.

जब बीजिंग से भारत में रह रहे चीनी नागरिकों के लिए आया था अलर्ट 

चीन द्वारा कुछ समय पहले भारत में रह रहे उसके चीनी नागरिकों को भी अलर्ट किया गया था. पॉल के छोटे भाई जॉर्ज लियॉन्ग ने एक समाचार पत्र से बात करते हुए कहा कि, ‘आजतक चीन ने हम लोगों के लिए कुछ भी नहीं किया है और बीजिंग से अलर्ट रहने की जो बातें हो रही हैं उनसे हमें कोई मतलब नहीं है. हमें केवल भारत से मतलब है.

source

चीन और भारत के बीच हुए 1962 के युद्ध के समय यहाँ निवास कर रहे चीनी परिवारों को अरेस्ट करके जेल में डलवा दिया गया था. जब युद्ध खत्म हुआ तो रिहा होने वाले कई लोगों में से कुछ तो यहीं रूक गए जबकि कुछ ऑस्ट्रेलिया और यूरोप जाकर बस गए.

source

लियांग लिएन भी शिलांग में रहती हैं और उनका मंगेतर चीन की एक कंपनी में नौकरी करता है. वो कहती हैं कि, ‘ मेरा मंगेतर भी चीनी मूल का है लेकिन अब वो भारतीय नागरिक है और मैं उससे मिलने के लिए अक्सर चीन जाती हूँ, लेकिन मैं वहां ज्यादा समय नहीं गुजार सकती. चीन की भाषा और संस्कृति हमसे बहुत अलग है. वहां लोगों से बातचीत करने में काफी मुश्किलें आती हैं. भारत हमारा घर है इसलिए मेरा मन भारत में ही लगता है. मैं जन्म से ही भारतीय हूँ और भारतीय होने पर मैं गर्व महसूस करती हूँ.’

source

इस समय भारत और चीन के बीच जो तनातनी चल रही है उसको लेकर लियांग लिएन कहती हैं कि यह मु्द्दा दोनों मुल्कों के बीच का राजनीतिक मसला है लेकिन हम हिन्दुस्तानी हैं और भारत सरकार हमारे लिए जो कायदे कानून बनाएगी हम उसको मानेंगे और उसी के अनुसार चलेंगे.
इस वक्त मेघालय में चीनी मूल के भारतीय नागरिकों के लगभग 20 परिवार हैं. शिलांग में रहने वाले इन लोगों में से अधिकतर ने स्थानीय जनजाति की महिलाओं से विवाह करके इसाई धर्म को अपना लिया है. ये सारे लोग भारतीय होने पर गर्व महसूस करते हैं.