भारत का हुआ विभाजन

लम्बे संघर्ष के बाद अगस्त 1947 में एशिया का उपमहाद्वीप कहा जाने वाला हिन्दुस्तान अंग्रेजों की गुलामी से आज़ाद हो गया. अग्रेजों ने भारत को आजाद तो किया लेकिन साथ ही भारत को दो राष्ट्रों में विभाजित कर दिया. अंग्रेजों ने भारत को आज़ाद करने की शर्त ही यही रखी थी कि अखंड भारत खंडित हो जाए, भारत और पाकिस्तान के रूप में, हुआ भी ऐसा ही माउंटबेटन की योजना के तहत भारत के दो टुकड़े हो गए.

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अंग्रेजों ने नक़्शे पर महज़ एक लकीर खींचकर भारत और पाकिस्तान के टुकड़े कर दिए. इसके बाद जो हुआ वो मानवता के इतिहास के सबसे काले दौर के रूप में जाना जाता है. इस दौर की कुछ घटनाओं को सुनकर आज भी लोगों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं.

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एशिया की दूसरी बड़ी घटना 

भारत-पाकिस्तान विभाजन के बाद एशिया की दूसरी बड़ी घटना थी पाकिस्तान से पूर्वी पाकिस्तान का अलग होना. पाकिस्तान के लिए पूर्वी पाकिस्तान का अलग होना एक झटके की तरह था. पूर्वी पाकिस्तान में 1970 के आते-आते राष्ट्रीयता की भावना बहुत कमज़ोर पड़ चुकी थी. जिसका परिणाम ये हुआ कि पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा एक हिंसक लड़ाई के बाद उससे अलग हो गया. अब सवाल ये है कि ऐसी क्या वजह रही जो पाकिस्तान की राजधानी ढाका को नहीं बनाया गया बल्कि कराची को बनाया गया और क्यों पूर्वी पाकिस्तान, पाकिस्तान से अलग हुआ?

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ये थी वजहें जिस कारण पूर्वी पाकिस्तान के लोग थे खफ़ा 

समस्या का आगाज़ 1947 में पाकिस्तान के बनते ही हो गया था. जैसे ही पाकिस्तान का विभाजन हुआ पूर्वी पाकिस्तान (अब बांग्लादेश) ने दावा किया कि संख्या के लिहाज से वो ज्यादा हैं और लोकतांत्रिक रूप से पाकिस्तान की राजधानी कराची न होकर ढाका होनी चाहिए. ये हो नहीं पाया क्योंकि कराची में सरकार में शामिल लोग, सरकारी अधिकारी, मंत्री और उद्योगपतियों की संख्या बहुत अधिक थी इसलिए उसे फायदा हुआ. अगर पाकिस्तान की राजधानी ढाका को बना लिया जाता तो हो सकता था कि आज पाकिस्तान दो टुकड़ों में न बंटता लेकिन ऐसा हुआ नहीं. पूर्वी पाकिस्तान के लोग कई सुविधाओं से वंचित रहे क्योंकि वो लोग राजधानी से हज़ारों मील दूर थे.

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पाकिस्तान की राजधानी को लेकर पूर्वी पाकिस्तान में और पश्चिमी पाकिस्तान में विवाद होना शुरू हो गया था. हालत इस हद तक खराब हो गए थे कि हर चीज़ में पश्चिमी पाकिस्तान के लोगों को विशेष अधिकार दिए जाते और पूर्वी पाकिस्तान के लोगों को पीछे कर दिया जाता.

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पाकिस्तान से टूटकर बना बांग्लादेश

पूर्वी पाकिस्तान के लोगों की नाराजगी की एक वजह ये भी थी कि जूट बेचकर जो विदेशी मुद्रा कमाई जाती थी उसे रक्षा के नाम पर खर्च कर दिया जाता. पूर्वी पाकिस्तान के लोगों का सवाल था कि आखिर क्यों कश्मीर को लेकर पाकिस्तान इतना खर्च कर रहा है, जबकि इसी पैसे का उपयोग और कामों के लिए भी किया जा सकता है, जैसे- खाने की आपूर्ति के लिए और बढ़ती जनसंख्या के लिए घर दिलाने में. इसके साथ ही पूर्वी पाकिस्तान के लोग ये भी मानते थे कि सारी अच्छी नौकरियां पश्चिमी पाकिस्तान के लोगों को मिलती हैं.

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पाकिस्तान सरकार ने 1955 में पूर्वी बंगाल का नाम बदल दिया और उसका नाम पूर्वी पाकिस्तान रख दिया. यहीं से पाकिस्तान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान को दबाना शुरू हो गया और सत्तर के दशक में ये अपने चरम पर पहुँच गया. याहया खान द्वारा पूर्वी पाकिस्तान के नेताओं को प्रताड़ित किया जाने लगा जिसके परिणाम स्वरुप शेख मुजीवु्र्रहमान की अगुआई में बांग्लादेश में आंदोलन शुरू हो गया. अगर पश्चिमी पाकिस्तान चाहता तो पूर्वी पाकिस्तान के लोगों के दर्द को समझकर और उन्हें समझाकर इस विभाजन को रोक सकता था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. शुरुआत से ही पाकिस्तान ने पूर्वी पाकिस्तान को दबाया जिस वजह से वहां के लोगों के मन में पश्चिमी पाकिस्तान के लोगों को लेकर गुस्सा भड़क गया और ये गुस्सा इतना बढ़ा कि इससे एक नए देश का जन्म हो गया.