एक ऐसा वीडियो जिसे देखकर आपको भारतीय होने पर गर्व तो होगा ही, लेकिन साथ ही हिंदू होने पर भी गर्व होगा l बाबा भोले को गंगाजल चढ़ाने के लिए निकले महादेव के दीवानों ने कुछ ऐसा कर दिया, जिसे देखकर आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे l कावड़ियों की आस्था तो देखने लायक है ही, लेकिन इनकी आस्था और जुनूनी हो गयी, जब आस्था के साथ देशभक्ति का रंग मिल गया l उत्तर प्रदेश के मुजफ्फनगर के नेशनल हाईवे पर लाखों कावड़िया नंगे पैर, बारिश में भीगते हुए, हाथों में 101 फुट लम्बा तिरंगा लिए हुए भोले बाबा और भारत माता की जय के नारों के साथ आगे बढ़ते जा रहे हैं l

मेरठ के तिरंगा शिव कांवड़ समिति का ये ग्रुप हरिद्वार से पवित्र गंगा जल लेकर निकने थे , लेकिन जैसे ही देशभक्ति के जज्बे से भरी अनोखी कांवड़ यात्रा नेशनल हाइवे पर पहुंची तो सभी देखने वाले खड़े होकर तिरंगे को निहारते रहे, और ‘महादेव की जय’ के नारे लगाने लगे । 101 फिट लंबे तिरंगे की कांवड़ यात्रा उन लोंगो को देश भक्ति का सन्देश दे रहा था, जो अपने धर्म के प्रमुख त्योहारों में सिंर्फ और सिर्फ अपने कौम के बारे में सोचते हैं l जिन्हें वन्दे मातरम गाने पर ऐतराज है, और ‘भारत माता की जय’ कहने में जिनकी जान जाती है, उनके लिए इस कावड़ यात्रा ने एक सन्देश दिया है कि, मेरा देश ही मेरा धर्म है, मेरी पूजा है l एक अगस्त को खत्म होने वाली इस यात्रा का उद्देश्य भक्ति भाव के साथ-साथ देशभक्ति की भावना को बढ़ाना भी है l

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सावन का महीना है, और कावड़ियों की यात्रा शुरू हो चुकी है, लेकिन इस यात्रा ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है l वायरल हुए इस वीडियो में दिखायी दे रहा है, कि आगे भगवान भोले की मूर्ति और पीछे 101 फुट का तिरंगा लेकर भगवान शिव के भक्त आगे बढ़ते जा रहे हैं l

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ये यात्रा सोचने पर मजबूर करती है, कि हिंदुस्तान में एक धर्म ऐसा भी है, जिसमें लोग देशभक्ति को ही अपना धर्म समझते हैं, और अपने प्रमुख त्यौहार को तिरंगे के साथ मनाते है, लेकिन वही एक धर्म ऐसा भी है, जिसमें धर्म को पहले और देश को बाद में रखते है, ऐसी स्तिथियाँ सोचने पर मजबूर करती हैं l

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देश में एक खास धर्म ऐसा भी है, जिसमें लोग धर्म के लिए समर्पित तो हैं, लेकिन अपने-अपने तरीके से, और उस धर्म में देशभक्ति को जोड़ना ठीक नही समझते l कावड़िया यात्रा के दौरान आपने तिरंगा देखा और देशभक्ति के जज्बे को, लेकिन इस फोटो में आपको तिरंगे की झलक दिखाई नही देगी l अब आप ही सोचिए जिनके त्योहारों में हाथों में लाठी, तलवार और भाले दिखते हों, वो तिरंगा कहाँ से पकड़ेंगे l लोगों को उस कावड़ यात्रा से सीख लेनी चाहिए कि धर्म कोई भी हो, देश सबसे पहले होना चाहिए l