प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इजरायल दौरा 

भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कुछ दिनों पहले इजरायल यात्रा पर गये हुए थे. नरेंद्र मोदी भारत के ऐसे पहले प्रधानमंत्री है जिन्होंने इजरायल की एतिहासिक यात्रा सकुशल संपन्न की. नरेंद्र मोदी 3 दिवसीय इजरायल और जर्मनी दौरे के लिए रवाना हुए थे जिसमे मोदी की इजरायल यात्रा ऐतिहासिक साबित हुई है. इजरायल दौरे पर इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एयरपोर्ट पर जोरदार स्वागत किया बेंजामिन नेतन्याहू अपने पूरे मंत्रिमंडल की मौजूदगी में वहां मौजूद थे. मोदी और नेतन्याहू के बीच दोनों देशों के हित में कई सारे अहम् समझौते हुए थे. एक तरह से हम कह सकते हैं मोदी की इजरायल यात्रा रंग लायी है.

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रक्षा के क्षेत्र में इजरायल है काफी मजबूत 

हम आपको बता दें कि रक्षा के क्षेत्र में इजरायल काफी मजबूत देश है. भारत में 2012-2016 के बीच ख़रीदे गये 40 प्रतिशत हथियार इजरायल से ही ख़रीदे गये हैं. अमेरिका और रूस के बाद हथियारों के मामले में इजरायल तीसरा निर्यातक देश है. ऐसा ही समझौता भारत के साथ हुआ है इजरायल भारत का सहयोग करेगा जिसमे भारतीय वायु सेना को मजबूत बनाने के लिए इजरायल के सहयोग से मीडियम रेंज की सरफेस टु एयर मिसाइल सिस्टम विकसित करने का फैसला किया गया है. बता दिया जाये कि यह मिसाइल की खासियत कुछ ऐसी होगी जिससे दुश्मनों का बचना मुश्किल होगा.

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भारत इजरायल की मदद से बनाने जा रहा है बेहद खास मिसाइल

इस मिसाइल  की रेंज 70 किलोमीटर तक होगी जो दुश्मनों खात्मा करने में बेहद कारगर सिद्ध होगी. इस मिसाइल सिस्टम को भारतीय वायु सेना की तत्काल ऑपरेशनल जरूरत के तौर पर देखा जा रहा है. 17 हजार करोड़ रुपये के इस प्रॉजेक्ट में 3-3 मिसाइल वाले 4 लॉन्चर होंगे जिसके लिए सेना और रक्षा संगठन डीआरडीओ ने इस  सिस्टम के प्रोजेक्ट के लिए  सहमति पत्र पर साइन कर दिए हैं जल्द ही इसके लिए काम शुरू कर दिया जायेगा.

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मेक इन इंडिया की यह मिसाइल छुड़ायेगी दुश्मनों के छक्के

यह मिसाइल दुश्मनों के छक्के छुड़ाने के लिए अहम् साबित होगी. इससे हमारी सेना को और ज्यादा मजबूती मिलेगी बता दें कि इस मिसाइल को विकसित करने के लिए इजरायल की कंपनी आईएआई का सहयोग मिलेगा. सबसे बड़ी बात यह  मेक इन इंडिया के लिए अहम् होगा क्यों कि इस मिसाइल के सारे उपकरण स्वदेशी ही होंगे. पीएम नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के बाद इस मिसाइल का परवान तेजी से परवान चढ़ गया. इस प्रोजेक्ट में भारत के डिफेंस पीएसयू और भारतीय प्राइवेट कंपनी को भी हिस्सा लेने का मौका मिलेगा।

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पहले के भी युद्ध में इजरायल ने भारत का साथ दिया था

भारत के लिए इजरायल ने हमेशा मदद की है बता दें कि 1962 चीन के युद्ध तथा 1965 और 1971 के पाकिस्तान युद्ध में इजरायल ने भारत के लिए मदद की थी. फिलाहल में भारत के पास दो मीडियम रेंज की मिसाइल हैं जिसमे एक 10 किलोमीटर क्षमता वाला ओएसए-एके एवं दूसरा  24 किलोमीटर क्षमता वाला क्वाद्रथ सिस्टम मौजूद है. आपकी जानकारी को बता दें अप्रैल 2017 में इजरायल और भारत के बीच 12 हजार करोड़ रूपये का रक्षा सौदा मंजूर हुआ है.

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इस मिसाइल के लिए न सिर्फ आर्मी का एयर डिफेन्स मजबूत होगा बल्कि यह हमारी तीनों सेनाओं की क्षमता को एकसार बनाने के लिए इसे बेहद जरूरी समझा जा रहा है.यह मिसाइल सिस्टम 50 किलोमीटर की दूरी से एक साथ कई हवाई निशानों को साध सकता है. सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार यह मिसाइल बेहद एडवांस होने के साथ-साथ हर मौसम में काम करने में कारगर सिद्ध होगी.