नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से देश विकास की दिशा में आगे बढ़ता जा रहा है. पीएम मोदी ने अपना कार्यकाल संभालने के बाद से ही देश की व्यवस्था को सुधारने के लिए ज़रूरी कदम उठाने शुरू कर दिये थे. उन्होंने नोटबंदी जैसा ऐतिहासिक कदम उठाया और सर्जिकल स्ट्राइक जैसा साहसिक कदम भी.

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उनकी पॉलिसी और फैसलों की वजह से वो पूरे विश्व में मशहूर हो रहे हैं. पूरी दुनिया में इस समय प्रधानमंत्री मोदी के चर्चे चल रहे हैं. इस बीच खबर आई है कि देश में जो काम 1991 के बाद कभी नहीं हुआ वो मोदी सरकार में हो गया है और इसके पीछे पीएम मोदी के प्रयास हैं.

साल 1991 में आर्थिक उदारीकरण के बाद 26 साल के अंतराल में पहली बार ऐसा हुआ है कि चालू खाता घाटे में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की फंडिंग हो रही है. अब भारत का निर्यात आयात के मुकाबले बढ़ता जा रहा है. यह देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के पीएम मोदी की काबिलियत में निवेशकों के बढ़ते भरोसे का बड़ा संकेत है.

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जिस वित्तीय घाटे की भरपाई अब तक विदेशी मुद्रा बाजार में कंपनियों द्वारा उधार लेने, एनआरआई की फंडिग और पोर्टफोलियो इन्फ्लो के जरिए होती थी, उसमें अब बदलाव दिखने लगे हैं. FDI में रिकॉर्ड बढ़ोतरी का इस्तेमाल कंपनियां और सेंट्रल बैंक पुराने उधारों को चुकता करने में कर रहे हैं.

वित्त वर्ष के खत्म हुए पहले 10 महीनों में (अप्रैल 2010 से जनवरी 2017) के दौरान कुल FDI 53.3 बिलियन डॉलर रही, जो पहले इसी अवधि के दौरान 47.2 बिलियन डॉलर थी और 2016 के पूरे वित्त वर्ष में यह 55.6 बिलियन डॉलर रही.

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बता दें कि भारत एक ऐसी अर्थव्यवस्था बनता जा रहा है, जहां स्थिर विकास मिलता है. जबकि दक्षिण कोरिया और इंडोनेशिया जैसे उभरते बाजार राजनीतिक और आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं. भारत की ईज अॉफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग भी 2017 में बढ़कर 130 हो चुकी है, जो 2015 में 142 थी. यह बात स्पष्ट है कि ये पीएम मोदी के ही प्रयास हैं जिनकी वजह से हर क्षेत्र में देश आगे बढ़ रहा है l