देश में कई दिनों से चली उठा-पटक के बाद कल गुरुवार 20 जुलाई को रामनाथ कोविंद ने भारी मतों से जीत हासिल की है. रामनाथ कोविंद देश के 14 वें  राष्ट्रपति चुने जा चुके हैं. हालाँकि एनडीए ने जिस वक़्त से राष्ट्रपति पद के लिए रामनाथ कोविंद का नाम घोषित किया था वो तभी से सुर्ख़ियों में आ गए थे. वहीँ विपक्षी दलों ने भी रामनाथ कोविंद के मुक़ाबले पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को मैदान में उतार दिया था, लेकिन फिर भी रामनाथ कोविंद भारी मातों के साथ जीत गए और उनकी यह जीत बीजेपी में खुशी की लहर लेकर आई है. क्योंकि ऐसा पहली बार हुआ है जब बीजेपी का कोई नेता इतने बड़े ओहदे पर पंहुचा हो इससे पहले भी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम देश के राष्ट्रपति रह चुके हैं वो भी बीजेपी समर्थक थे,लेकिन वो राष्ट्रपति बनने से पहले किसी भी राजनीति पार्टी से नहीं जुड़े हुए थे बल्कि वे एक वैज्ञानिक के तौर पर जानें जाते थे और देश के राष्ट्रपति बनाये गए थे.

यूपीए की प्रत्याशी मीरा कुमार चुनाव हार गई हैं और उनके चुनाव हार जानें के बाद बीजेपी उनके समर्थन में आ गई है और समर्थन में आते ही बीजेपी के वरिष्ठ नेता नंदकिशोर यादव ने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा है कि इस चुनाव में ‘बिहार की बेटी’ मीरा कुमार का अपमान हुआ है. नंदकिशोर यादव यहीं नहीं रुके उन्होंने यहाँ तक कि यह भी कह डाला कि राष्ट्रपति चुनाव में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के पास पर्याप्त मत नहीं थे फिर भी उन्होंने मीरा कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया, जिससे बिहार की बेटी को पराजय हासिल हुई.

आपको बता दें कि नंदकिशोर यादव का सीधा निशाना लालू प्रसाद यादव पर था उन्होंने कहा कि मीरा कुमार को हराने के लिए राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया जिससे मीरा कुमार का अपमान हुआ है। उन्होंने कहा कि इस हार के लिए वे लालू प्रसाद यादव को ज्यादा कसूरवार मानते हैं और इसके लिए लालू प्रसाद यादव को बिहार वासियों से क्षमा मांगनी चाहिए क्योंकि वह हार के संभावित नतीजे को जानते हुए भी मीरा कुमार के पक्ष में खड़े थे।

वहीँ इस वक्त राष्ट्रपति के नाम कि चर्चा हो रही थी कि किसे खड़ा किया जाए तो उस वक्त रामनाथ कोविंद को राजग की ओर से राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाये जाने पर उन्हें जनता दल यूनाईटेड (जदयू) की ओर से समर्थन देने की घोषणा हुई थी जिसके बाद बिहार में सत्तारूढ़ महागठबंधन के बीच घमासान मच गया था और इसी बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी मीरा कुमार की उम्मीदवारी को विपक्ष की बड़ी भूल करार दिया था और कहा था कि बिहार की बेटी का चयन जीतने के लिए होना चाहिए था न कि हारने के लिए। ख़ास बात तो यह है कि इस चुनाव से पहले भी जब केन्द्र में संप्रग की सरकार थी तब 2 बार मीरा कुमार को राष्ट्रपति बनाने का अवसर था लेकिन उस समय उनका चयन नहीं किया गया और आज जब सभी को पता था कि इस बार मीरा कुमार करारी हार का सामना करेंगी तो उन्हें खड़ा कर दिया गया.