भारत-चीन के बीच चल रहे सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों में बातें चल रही हैं. इस मुद्दे पर बोलते हुए गुरुवार को भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने भारत का रुख साफ़ किया. लोकसभा में बोलते हुए सुषमा स्वराज ने कहा कि चीन और भारत के बीच सीमा रेखा को रेखांकित किया जाना है. सुषमा स्वराज ने चीन को याद दिलाया कि 2012 में एक लिखित समझौता हुआ था जिसमें ये बात साफ़ कर दी गई थी कि भारत,चीन और भूटान के बीच बातचीत के बाद ही इसमें कोई फेरबदल होगा. चीन इस क्षेत्र में लगातार प्रवेश करता रहा है. चीन कई बहाने करके यहाँ आता रहता है और उसका सबसे बड़ा बहाना है सड़क निर्माण. भारत जानता है कि अगर चीन को रोका न गया तो ये सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक खतरा बन सकता है.

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चीन के सरकारी अखबार में सुषमा स्वराज को निशाना बनाते हुए लिखा गया है कि, ‘भारत की महिला विदेश मंत्री भारत के सांसदों से झूठ बोल रही है क्योंकि ये बात पूरी तरह से सच है कि भारतीय सैनिकों ने चीनी इलाकों में अतिक्रमण किया है. भारत के इस जोख़िम भरे कदम से अंतरराष्ट्रीय समुदाय हैरान है और कोई भी देश भारत के इस कदम का समर्थन नहीं करेगा.’

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चीन के मुंह पर तमाचा मारते हुए लोकसभा में सुषमा स्वराज ने गुरूवार को कहा था कि, ‘ चीन कह रहा है कि भारत, डोकलाम से अपने सैनिकों को वापस बुलाए.’ उन्होंने बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि, ‘ अगर बातचीत करनी है तो दोनों ही देश अपनी सेना वापस बुलाएं. भारत ने कोई भी बेतुकी बात नहीं की है. इस मामले में सारे देश हमारे पक्ष में हैं. छोटे से देश भूटान को लेकर चीन इतना आक्रामक हो रहा है.’

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भारत और चीन के बीच चल रहे विवाद को खत्म करने के लिए 26 जुलाई को भारत के NSA अजीत डोभाल ब्रिक्स देशों के NSA की बैठक में शामिल होने जा रहे हैं. चीन-भारत के बीच चल रहे सीमा विवाद में डोभाल विशेष दूत हैं. अजीत डोभाल के वहां पहुँचने से पहले, हॉन्ग कॉन्ग ओरिएंटल डेली न्यूज़ ने लिखा है कि, ‘अगर भारत के नेता चीन को उकसाने का मतलब अबतक नहीं समझ रहे हैं तो उनका अंत कल्पनाओं से परे की त्रासदी के साथ होगा. चीन मानता है कि डोभाल का ये चीन दौरा शांति की पहल करने के लिए भारत का आखिरी मौक़ा है.’

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चीन के रवैये से साफ़ हो जाता है कि चीन बुरी तरह से बौखलाया हुआ है और इसी बौखलाहट का नज़ारा उसके अखबारों में छपी खबरों से पता चल रहा है. भारत अपनी जगह में बिल्कुल सही है और इसी वजह से वो पीछे नहीं हेटगा. चीन और भारत के बीच चल रही तनातनी चीन में सोशल मीडिया के इस्तेमाल करने वालों पर भी दिख रही है. चीन के एक इंटरनेट यूजर ने लिखा है कि, ‘ नीति बनाने वालों को सतर्क रहना चाहिए. ऐसा महसूस हो रहा है कि मोदी ने भारत के लोगों को बहुत ज्यादा-आत्मविश्वास से भर दिया है. माहौल ऐसा हो गया है कि दंभी आशावाद को हवा मिल रही है और उत्तेजना एकदम 1962 के युद्ध के जैसी है.’ चीन के लोग ये भूल रहे हैं कि अब भारत 1962 वाली स्थिति में नहीं है आज दुनिया के ताकतवर मुल्कों में भारत को शुमार किया जाता है. अगर चीन ने कोई भी नापाक हरकत की तो उसे ही ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा और इसी वजह से वो भड़काऊ बयान देकर भारत को उकसाने की कोशिश कर रहा है.

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ख़ैर चीन ऐसी धमकियाँ हमेशा से देता रहा है और उसकी इन धमकियों से भारत को कभी कोई फर्क नहीं पड़ता. ये बात भी साफ़ है कि चीन ने भारत के क्षेत्र में अतिक्रमण किया और फिर भारत पर ही इस बात का इल्जाम लगाने लगा. चीन ने अजीत डोभाल के चीन पहुँचने से पहले ही भारत पर दबाव बनाने के लिए बोल दिया है कि ये भारत के लिए आखिरी मौक़ा होगा. अब देखना ये होगा कि भारत चीन की इस धमकी का कैसे जवाब देता है.