आज से सैकड़ों वर्ष पूर्व भारत को अखंड भारत कह के पुकारा जाता था क्योंकि भारत के क्षेत्र में बर्मा, इंडोनेशिया, कंबोडिया, नेपाल, तिब्बत, भूटान, बांग्लादेश,  वियतनाम, मलेशिया, जावा, सुमात्रा से लेकर अफगानिस्तान, पाकिस्तान सहित कई छोटे बड़े देश शामिल थे. हालांकि सब क्षेत्रों के राजा अलग-अलग होते थे जिन्हें भारत के जनपदों के रूप में जाना जाता था. वक्त के साथ-साथ अखंड भारत कई खंडों में विभाजित हो गया और इसी से निकलकर छोटे बड़े कई देश बन गए. प्राचीन जम्बुद्वीप से लेकर आज के हिन्दुस्तान तक सारा क्षेत्र हिन्दुओं के रहने का स्थान था.

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आज भारत कई खंडों में बट चुका है और भारत में हुए 11 युद्धों ने भारत का नक्शा ही बदल कर रख दिया आज हम इन युद्धों के बारे में ही आपको बताने जा रहे हैं.
भगवान् राम और रावण के बीच हुए युद्ध के बाद दसराज्य का युद्ध हुआ. इस युद्ध के संबंध में ऋग्वेद में चर्चा की गई है. ये माना जाता है कि दसराज्य युद्ध भगवान् राम और रावण के बीच हुए युद्ध के 150 साल बाद हुआ था.

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दसराज्य युद्ध के बाद भारत की धरती पर सबसे बड़ा युद्ध लड़ा गया जिसके बारे में पूरी दुनिया जानती है और जिसे हम महाभारत के नाम से भी जानते हैं. ये युद्ध पांडवों और कौरवों के बीच आज से लगभग 5000 वर्ष कुरुक्षेत्र के मैदान में लड़ा गया. ये युद्ध 18 दिन तक चला था.

ये युद्ध बहुत विनाशकारी रहा और इसके बहुत ही भयानक परिणाम हुए. इस युद्ध के कारण धर्म और संस्कृति का लगभग विनाश हो गया. लाखों लोगों ने इस युद्ध में जान गंवाई, लाखों महिलाएं विधवा हो गईं और इसी के साथ कई सारे बच्चे अनाथ हो गए. इस युद्ध के बाद से भारत की दशा बदलना शुरू हो गई. इस युद्ध के बाद से ही भारत का अखंड रूप बदलने लगा और भारत बिखरना शुरू हो गया. नई संस्कृतियों और नए धर्मों का जन्म होने लगा और वक्त के साथ-साथ सब कुछ बदलना शुरू हो गया. अब हम आपको बताते हैं उन 10 युद्धों के बारे में जिन्होंने भारत का नक्शा बदलने की शुरुवात की.

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धनानंद और चंद्रगुप्त के बीच लड़ा गया युद्ध

देश का इतिहास बदलने में चंद्रगुप्त मौर्य और धनानंद के युद्ध का भी बड़ा हाथ रहा. चंद्रगुप्त मौर्य, चाणक्य के शिष्य थे और उन्हीं के मार्गदर्शन में चंद्रगुप्त मौर्य ने ये युद्ध लड़ा था. भारत में मौजूद 18 जनपदों में से एक था महाजनपद- मगध और इस मगध राज्य का राजा था धनानंद. जिसे एक क्रूर शासक के तौर पर देखा जाता था. चंद्रगुप्त मौर्य ने (322 से 298 ईपू)  युद्ध में धनानंद को हरा दिया. इसके बाद चंद्रगुप्त मौर्य ने मौर्य समाज की स्थापना की. कलिंग में हुए युद्ध ने अशोक का हृदय परिवर्तन कर दिया और उन्होंने बौद्ध धर्म अपना लिया और वो पश्चाताप करने के लिए भिक्षु बन गए. अशोक ने 260 ईपू में कलिंगवासियों पर आक्रमण किया था वो एक महान शासक थे लेकिन उनके भिक्षु बन जाने के बाद भारत के पतन की शुरुआत फिर से शुरू हो गई भारत फिर कई टुकड़ों में बंट गया.

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इसके बाद कई राजाओं ने भारत पर राज किया लेकिन वो भारत को वापस एक सूत्र में बांधने में नाकाम रहे. कुछ समय बाद भारत में एक महान राजा का उदय हुआ जिनका नाम हर्षवर्धन (606 ई.-647 ई.) था.
इन्होंने भारत के एक बड़े भूभाग पर राज किया. उनके ही दौर में अरब में हजरत मोहम्मद ने एक नए धर्म की स्थापना कर दी थी. अपने राज के दौरान हर्षवर्धन ने भारत को बाहरी आक्रमणों से बचाए रखा. हर्षवर्धन के गुजरने के बाद भारत में घुसपैठ बढ़ने लगी. भारत के समुद्री किनारों पर अरबों ने डेरा ज़माना शुरू कर दिया. इसके बाद भारत पर सिकंदर ने आक्रमण किया.

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सिकंदर का आक्रमण

सिकंदर ने (328 ईसा) भारत पर जब आक्रमण किया तब भारत पर फारस के हखामनी शाहों ने अधिपत्य जमाया हुआ था. इससे पता चलता है कि सबसे पहले ईरानी वंश के हखामनी लोगों ने भारत पर आक्रमण किया था. हालांकि ये भी आर्यों के ही वंशज थे.

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सिकंदर और पोरस के बीच हुई जंग (326 ईसा पूर्व)

सिकंदर से पहले भी वैसे तो कई छोटे बड़े आक्रमण भारत पर होते रहे थे लेकिन सिकंदर द्वारा किया गया आक्रमण किसी बाहरी मुल्क के द्वारा किया गया सबसे बड़ा आक्रमण था. हालांकि पोरस ने सिकंदर को हरा दिया था लेकिन बाद में पोरस के एक सहयोगी राज्य ने पोरस से दगाबाजी कर दी और पोरस की हार हो गई. इसके बाद भारत का पश्‍चिमी छोर कमज़ोर पड़ने लगा. पूरा अफगानिस्तान पहले भारत का ही हिस्सा था जो इस युद्ध के बाद सबसे ज्यादा कमज़ोर पड़ा.

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खलीफाओं द्वारा भारत पर किया गया आक्रमण

भारत पर 7वीं सदी के बाद अरब और तुर्क क्षेत्र में रहने वाले मुस्लिम शासकों ने आक्रमण करना शुरू कर दिया कुछ इतिहासकार मानते हैं कि 870 ई में अरब से आए एक सेनापति जिसका नाम याकूब एलेस था, ने भारत के हिस्से अफगानिस्तान को अपने कब्जे में ले लिया. भारत में राजा आपस में ही लड़ रहे थे और धीरे-धीरे बाहर से आए शासक भारत पर कब्ज़ा जमाते जा रहे थे. इस्लाम भारत के कई हिस्सों पर अपना अधिपत्य जमा चुका था और बढ़ते वक्त के साथ इस्लाम ने पूरी दुनिया की तस्वीर बदल दी.

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महमूद गजनवी  ने किये भारत पर आक्रमण (997-1030)

महमूद गजनवी  एक तुर्क शासक था जिसने भारत पर 17 बार आक्रमण किया. महमूद गजनवी  ने सोमनाथ मंदिर पर भी आक्रमण किया और वहां स्थित शिवलिंग को भी तोड़ डाला. मंदिर को भी ध्वस्त कर दिया, कहते हैं कि उसने हजारों पुजारी मौत के घाट उतार दिए और वह मंदिर का सोना और भारी खजाना लूटकर ले गया. उसके आक्रमणों से भारत को बहुमूल्य धन और ज्ञान की क्षति हुई क्योंकि धन लूटने के साथ ही उसने कई ज्ञानी लोगों को भी मौत के घाट उतार दिया था.

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मोहम्मद गोरी का भारत पर आक्रमण

कई विदेशी शासकों के बाद मोहम्मद गोरी ने भी भारत पर आक्रमण किया. उसने भी भारत में कत्लेआम किये और भारत में कई जगहों पर लूटपाट भी मचाई.

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तैमूर लंग का आक्रमण

तैमूर लंग की तुलना चंगेज खान से की जाती है वो भी चंगेज खान की ही तरह क्रूर शासक था. 1369 ई में उसने समरकंद का शासन संभाला. इसके बाद उसने क्रूरता की सारी हदें पार करते हुए कई लड़ाइयाँ लड़ीं और विजय प्राप्त की. उसके बारे में कहा जाता है कि उसने एक बार दो हजार जिंदा आदमियों की एक मीनार बनवाई और उनको ईंट और गारे में चुनवा डाला.

बाबर ने किया भारत पर आक्रमण

बाबर ही वो शासक था जिसके कारण आज तक हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच अयोध्या विवाद बना हुआ है और खत्म होने का नाम नहीं ले रहा. बाबर के ही कारण पूरा भारत मुगलों के अधीन हो गया था. मुगल वंश के संस्थापक कहे जाने वाले बाबर को लुटेरा कहा जाता था. उसके द्वारा उत्तर भारत में कई लूटों को अंजाम दिया गया था.

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भारत पर अंग्रेजों का आक्रमण

अंग्रेजों को पता था कि भारत से उन्हें बहुत कुछ मिल सकता है इसलिए वो सोची-समझी रणनीति बनाकर व्यापार करने भारत आए. भारत में अंग्रेजों को व्यापार करने का अधिकार 1618 में जहांगीर ने दिया था. अंग्रेजों को ये अधिकार देने के पीछे जहांगीर की भी चाल थी क्योंकि वो चाहता था कि सारे रजवाड़े उसके अधीन आ जाएं. जहांगीर और अंग्रेजों ने मिलकर 1618 से लेकर 1750 तक भारत के रजवाड़ों के साथ छल करके उन्हें अपने कब्जे में ले लिया. इसके बाद धीरे-धीरे अंग्रेजों ने भारत में पकड़ बनानी शुरू कर दी और अपना राज चलाना शुरू कर दिया अंग्रेजों ने भारत पर 200 साल तक राज किया.

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1947 भारत विभाजन 

जब 1947 में एक बार फिर से भारत का विभाजन हुआ तो विभाजन के समय माउंटबेटन, जवाहरलाल नेहरू , महात्मा गाँधी , मोहम्मद जिन्ना ,चर्चिल ओर लियाकत अली खान आदि नेता भारत की राजनीति में ज्यादा प्रभावशाली थे. यह विभाजन जिन्ना की शर्त पर हुआ था क्योंकि वो खुद सत्ता के उच्च पद पर बैठना चाहता था. उसकी वजह से भारत से भारत के दो बहुमूल्य हिस्से अलग हो गए अलग हुए दोनों हिस्सों को क्रमशः पश्चिमी पाकिस्तान ओर पूर्वी पाकिस्तान(अब बांग्लादेश) कहा जाता था जिनका आधिकारिक नाम पाकिस्तान ही था. इस विभाजन के बाद पाकिस्तान की नजर कश्मीर पर पड़ी ओर कुछ समय बाद पाक ने कश्मीर पर हमला कर दिया. इस युद्ध में पाकिस्तान की बुरी तरह से हार हुई.

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भारत-चीन युद्ध 1962

चीन की सेना द्वारा भारत के सीमाओं से सटे क्षेत्रों में आक्रमण किया गया. कुछ दिन तक ये युद्ध चला जिसके बाद एकपक्षीय युद्धविराम की घोषणा कर दी गई. इस युद्ध के बाद भारत को अपनी सीमा के 38000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को छोड़ना पड़ गया.

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भारत-पाकिस्तान युद्ध 1965

1962 चीन-भारत युद्ध के बाद पाकिस्तान ने सोचा कि वो भारत को हरा सकता है और इसी गलतफहमी में उसने 1965 में कश्मीर पर कब्जा करने का प्रयास किया जिसके चलते उसे भारत के हाथों हार झेलनी पड़ी. इस युद्ध में पाकिस्तान बुरी तरह से हारा, और फिर पाकिस्तान के हुक्मरान कश्मीर को लेकर पूरे पाकिस्तान में ज़हर फैलाने लगे और आज तक भी उसके हुक्मरानों की वो रणनीति जारी है. वो कश्मीर की आज़ादी के नाम पर पूरे पाकिस्तानियों की आँख में धूल झोंकते हैं.

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पाकिस्तान ने फिर किया भारत पर हमला

1971 में भारत और पाकिस्तान के बीच फिर एक बार युद्ध हुआ, इस युद्ध में भी पाकिस्तान की बुरी तरह से हार हुई और इस जंग के बाद ही एक नए देश बांग्लादेश का जन्म हुआ. इस युद्ध में भी पाकिस्तान ने कश्मीर पर कब्जा करने की कोशिश की थी लेकिन इस बार भी भारत ने उसको उसकी औकात दिखा दी.
आज तक भारत ने कभी किसी भी देश पर युद्ध नहीं थोपा हर बार किसी देश या बाहरी शासक द्वारा ही जबरन उसपर युद्ध थोपा गया. बाहरी आक्रमणों ने अखंड भारत को कई टुकड़ों में बाँट दिया. पहले पूरा भारत वर्ष हिन्दुओं के रहने का स्थान था लेकिन आज भारत में कई धर्म और समुदाय के लोग प्यार और सौहार्द से रहते हैं.

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भारत के वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी का सपना है कि भारत एक बार फिर गौरवशाली राष्ट्र के रूप में दुनिया में जाना जाए. उनको भी भारत के स्वर्णिम काल के बारे में पता है, जब पूरी दुनिया भारत पर आश्रित होती थी. वो उसी दौर को वापस लाना चाहते हैं और उसी प्रयास में वो लगे हुए हैं. वो चाहते हैं कि भारत विश्व गुरु बने और भारत की ख्याति पूरी दुनिया में फैले. जिस तरह से वो भारत के विकास के लिए काम कर रहे हैं उससे लगता है कि आने वाले वक्त में भारत वापस अपने गौरव को पा लेगा.