हमारे समाज में माना जाता है कि आईएएस पीसीएस का एग्जाम देश के सबसे कठिन इम्तिहान हुआ करते हैं और शायद हो भीं. कहा जाता है कि आईएएस-पीसीएस के लिए इंटरव्यू देना भी अपने आप में एक अनूठा अनुभव है. यहां ना ही सिर्फ आपका ज्ञान बल्कि आपके व्यक्तित्व के बारे में और भी बहुत कुछ परखा जाता है. ऐसे में आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि बीते शुक्रवार को यूपी लोक सेवा आयोग की तरफ से आयोजित सिविल जज एंट्रेंस एग्जाम (PCS -J) 2016 का रिजल्ट आ गया है जिसमें प्रतापगढ़ के लालगंज के रहने वाले विनोद पाण्डे ने इस एग्जाम में सफलता मिली हैं. अबतक मिली जानकारी के मुताबिक विनोद पाण्डेय को इस इग्ज़ाम में तीसरी रैंक मिली है.

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एग्जाम की सफलता बांटते हुए उस वक़्त विनोद एक न्यूज़ एजेंसी को इंटरव्यू दे रहे थे जब उन्होंने इस एग्जाम में पूछे जाने वाले अजीबोगरीब मगर हैरान कर देने वाले सवालों का ख़ुलासा किया. विनोद ने बताया कि उन्होंने इन्हीं सवालों का जवाब देकर सिविल जज का एग्जाम क्रैक किया. विनोद ने आगे बताया कि, “मैं मूल रूप से प्रतापगढ़ की लालगंज तहसील के रामगढ़ रैला गांव का रहने वाला हूं और मेरे पिता पोस्ट ऑफिस में एजेंट हैं. मेरा बचपन काफी गरीबी में बीता. 1997 में 12वीं क्लास पास होते ही मेरा सिलेक्शन एयरफोर्स में बतौर सार्जेंटहो गया था.”

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अब जानिए विनोद से इस परीक्षा में किये गए कैसे-कैसे सवाल जिनके जवाब सुनकर आप हैरान रह जायेंगें.
दरअसल 18 सितंबर 2017 को इलाहाबाद में विनोद पांडे से डॉ. लॉरिक यादव की अध्यक्षता वाले बोर्ड ने उनका इंटरव्यू लिया गया था. विनोद ने बताया कि इंटरव्यू के दौरान पैनल में एक हाईकोर्ट जज और दो सब्जेक्ट एक्सपर्ट्स मौजूद थे और उनका इंटरव्यू तकरीबन 20 मिनट तक चला था.

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विनोद से पूछा गया पहला सवाल: आपको पता चले कि आपकी पत्नी के किसी से अवैध सम्बंध हैं, आप क्या करेंगे?

विनोद ने कहा कि, ” मैं आईपीसी की धारा 497 का प्रयोग करके उस व्यक्ति के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराऊंगा.”

ऐसे में विनोद से इसी से जुड़ा दूसरा सवाल किया गया कि क्या ऐसी स्थिति में आप अपनी पत्नी के खिलाफ भी कोई कार्रवाई कर सकते हैं ?

जिसके जवाब में विनोद ने बताया कि, ” इस स्थिति में मेरी पत्नी दोषी नहीं मानी जाएगी. मैं उसके खिलाफ कोई लीगल एक्शन नहीं ले सकता.”
अगला सवाल: किन लेखक की किताब आपने सबसे ज्यादा पढ़ी है?विनोद ने जवाब दिया कि, “स्वामी विवेकानंद और एपीजे अब्दुल कलाम की.

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अब विनोद से अगला सवाल किया गया कि, आपने डॉ. कलाम की बुक्स से क्या सीखा? आपको इनसे क्या प्रेरणा मिली?

तो जवाब में विनोद ने कहा, “लक्ष्य हमेशा बड़ा बनाओ, छोटा लक्ष्य बनाना अपराध है.” “सपने वो नहीं जो सोते वक़्त आते हैं, सपने वो होते हैं जो सोने ना दें.” कलाम साब की इन पक्तियों ने मुझे प्रेरित किया.
विनोद से अगला सवाल किया गया कि, “उन्होंने हाल ही में कौन सी फिल्म देखी? और उस फिल्म से उन्हें क्या प्रेरणा मिली?
विनोद का जवाब: ‘दंगल’, इस फिल्म में दिखाया गया कि बेटा और बेटी एक समान होती हैं. जरूरत है कि हम बेटियों तो भी बेटों की ही तरह समझें. शिक्षा जैसी उनकी हर इच्छा हमें पूरी करनी चाहिए.
विनोद की हाज़िरजवाबी से प्रभावित जजों ने अब कहा कि, “आप खुद तो इकलौते बेटे हैं लेकिन आप की दो बेटियां-बेटियां हैं आपने कभी बेटे के लिए प्रयास क्यों नहीं किया?”
जवाब में विनोद ने बताया कि, “मेरी बेटियां बेटों से कम नहीं हैं. वो मेरे जीवन में उर्जा का संचार करती हैं. मुझे ऐसा लगता है कि बेटियां भी अपने माँ बाप को वो सब दे सकती हैं जिसकी अपेक्षा हम सिर्फ बेटों से ही करते हैं.”
यहाँ जिज्ञासावश जजों ने पूछा कि क्या आपके परिवार ने आपको बेटों के लिए कभी दबाव नहीं डाला?
जिसके जवाब में विनोद ने बताया कि, “मेरे परिवार ने बेटों के लिए मुझपर काफी दबाव बनाया लेकिन मैं और मेरी पत्नी ने तय कर लिया था कि हमारी बेटियां ही हमारे बेटे हैं.”

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अगला सवाल, “आप अपने जीवन की दो ऐसी घटनाएं बताइए जिनमे आपको बेहद ख़ुशी और बहुत दुःख हुआ हो.”
जवाब : “सबसे ज्यादा ख़ुशी एयरफोर्स की जॉब मिलने से हुई थी, और दुखी होने वाली कोई घटना नहीं है.”

अगला सवाल: किसी भी केस के लिए लीव पेटिशन कब फाइल कर सकते हैं?
जवाब: जब अपील के सारे रास्ते ख़त्म हो जाते हैं तब.  लीव पेटिशन को एक्सेप्ट करने का अधिकार सुप्रीम कोर्ट के पास है.
सवाल: जजों की नियुक्ति कैसे होती है?
विनोद का जवाब: भारतीय संविधान की धारा 124(2) के अनुसर जजों की नियुक्ति होती है.
सवाल : आप एडमिनिस्ट्रेटर किसे मानते हैं?
जवाब: सरकारी तन्त्र और जिसकी सरकार हो उसे.

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