भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश तेज़ी से आगे बढ़ रहा है. मोदी सरकार को तीन साल पूरे हो चुके हैं, और ये कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि इतने वक्त में मोदी सरकार ने वो कर दिखाया जो पिछली सरकारें नहीं कर पाईं. चाय बेचने वाले एक साधारण से इन्सान से देश के प्रधानमंत्री बनने तक नरेन्द्र मोदी का सफ़र भी बेहद रोचक है. वैसे तो मोदी जी का जीवन खुली किताब की तरह रहा है, लेकिन अभी भी पीएम मोदी के बारे में ऐसी कई बातें हैं, जिनसे आप अभी भी अनजान हैं. आज हम आपको कुछ ऐसी बातें बताने जा रहे हैं .

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नरेंद्र मोदी अक्सर कहा करते हैं कि, ” चीन में एक बहुत प्रचलित कहावत है और उस कहावत के अनुसार कोई इंसान अगर एक साल के लिए सोचता है, तो वो अनाज बोता है, अगर वो दस साल के लिए सोचता है, तो फल के वृक्ष बोता है, लेकिन अगर वो पीढ़ियों के लिए सोचता है, तो मनुष्य बोता है.”

 

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अब ऐसे में नरेंद्र मोदी द्वारा कही गयी इस कहावत पर गौर कीजिये तो आपको भी प्रधानमंत्री मोदी का मकसद साफ़ नज़र आने लगेगा. दरअसल वो अपने प्रधानमंत्री पद का इस्तेमाल कर मनुष्य बोने में लगे हुए हैं. हम यूँ ही ये बात नहीं कह रहे, उदाहरण के तौर पर आप खुद उनके कदमों को उठा कर देख लीजिये. आपको भी ये बात आईने की तरह साफ़ समझ आ जाएगी.

ऐसे ना समझ आये तो आपको उदाहरण के तर्ज़ पर समझते हैं पीएम मोदी और उनके कदमों का असली मकसद.

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पहला कदम: विपक्ष आजतक उनकी कमी ढून्ढ नहीं पाया

 विपक्ष आजतक उनकी कमी ढून्ढ नहीं पाया या यूँ कहिये कि पीएम मोदी ने ऐसा कोई काम किया ही नहीं है जिसपर विपक्ष निशाना साध पाए. कदम फूंक-फूंक कर रखने में माहिर पीएम मोदी ने विपक्ष को कभी आलोचना का मौका दिया ही नहीं है. पीएम मोदी द्वारा उठाये गए कदम ऐसे साबित हुए जिनपर ऊँगली उठाने के बजाये खुद विपक्षी नेता भी पीएम मोदी का अनुसरण करते नज़र आये. उदाहरण के तौर पर स्वच्छता मिशन ही ले लीजिये जहाँ शशि थरूर और अरविंद केजरीवाल पीएम मोदी के इस सराहनीय कदम में हिस्सेदार बने थे.

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दूसरा कदम: दुनिया को दिखाई साबरमती रिवरफ्रंट की खासियत

वो पल भला किसे याद नहीं होगा जब चीनी राष्ट्रपति के आवभगत में पीएम मोदी ने कोई कसर ना छोड़ते हुए उन्हें अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट पर ले गए थे. हालाँकि राहुल गाँधी ने इस मामले पर जमकर पीएम मोदी की आलोचना की थी लेकिन पीएम मोदी का मकसद तो पूरा हो ही चुका था. मकसद था पर्यटन के हिसाब से दुनिया को साबरमती रिवरफ्रंट की खासियत दिखाना.

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तीसरा कदम: अपने छोटे-छोटे कदमों से ही लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित करना 

पीएम नरेन्द्र मोदी की एक खासियत ये भी है कि वो छोटे-छोटे ही सही लेकिन ऐसे फैसले लेकर जनता का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं जो अन्य कोई शायद ही कभी सोच भी पाए. अब यहाँ उदाहरण के तौर पर चाहे  गेजेटेट अधिकारियों द्वारा अटेस्ट कराने की प्रथा खत्म करने का फैसला देख लीजिये, या फिर अधिकारियों को समय पर दफ्तर पहुंचाने के परंपरा की शुरुआत करनी हो. 

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चौथा बड़ा कदम: जबतक विपक्ष पीएम मोदी के कदम को समझता है तबतक पीएम मोदी इन सब से काफी दूर निकल चुके होते हैं 

आम लोग भले ही पीएम मोदी के फैसलों से खुश और सहमत हों लेकिन विपक्ष हमेशा ही पीएम मोदी के फैसलों से अचंभित नज़र आया है. पीएम मोदी कोई भी कदम उठाते हैं और कई बार ऐसा देखा गया है कि जबतक विपक्ष उनके इस कदम को समझ पता हो वो काफी दूर निकल चुके होते है. अब यही देख लीजिये जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी के जन्मदिवस को मनाने की बात करना किसी भी पार्टी के लिए सोच से परे की चीज है, खासकर उस कांग्रेस पार्टी के लिए जिसने सफाई अभियान में सिर्फ अपनी सहमति देने के चक्कर में ही शशि थरूर को पार्टी के प्रवक्ता पड़ से निष्कासित कर दिया था.

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पांचवा बड़ा कदम: मीडिया के माहिर खिलाड़ी बन चुके हैं पीएम मोदी

ये कहना तो गलत नहीं है कि पीएम नरेंद्र मोदी आज के समय में मीडिया के एक माहिर खिलाड़ी बन चुके हैं. माहिर खिलाड़ी इसलिए बोला जा सकता है क्योंकि मीडिया ने बरसों पीएम नरेंद्र मोदी को बहुत सताया है,  जाहिर है वो इससे बहुत कुछ सीख कर आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं.

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छठा बड़ा कदम: पीएम मोदी रहे ना रहे सिस्टम चलते रहना चाहिए. 

देश में कोई भी सरकार आये उसका कार्यकाल 5 साल का ही होता है, ऐसे में पीएम मोदी इस बात से अच्छी तरह रूबरू हैं. उन्हें ये बात अच्छे से पता है कि उन्हें देश केवल पांच साल के लिए मिला है, लेकिन वो कभी ये बात ज़ाहिर नहीं होने देते. गौर करिए तो हर मिशन के साथ उनका समय फिक्स नज़र आता है. उनका मतलब साफ है कि मोदी रहे न रहे, सिस्टम चलते रहना चाहिए.

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सातवाँ बड़ा कदम: सिर्फ योजना बनाते ही नहीं है, उन्हें पूरा भी करते हैं पीएम मोदी 

अबतक तो सभी इस बात को मान चुके होंगे कि पीएम मोदी सिर्फ देशहित में योजना बनाते भर नहीं हैं बल्कि उसको उसके असली मकसद तक पहुँचाने के लिए पूरे जोश के साथ तबतक जुटे रहते हैं जबतक वो काम पूरा ना हो जाये. इससे न सिर्फ उस योजना के लिए उन्हें सफलता मिलती है, बल्कि आम लोगों पर इसका अच्छा असर पड़ता है.

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आँठवा बड़ा कदम: हर काम का होता है फॉलोअप

पीएम मोदी की एक बड़ी खासियत ये भी मानी जाती है कि वो अपने हर काम का फॉलोअप रखते हैं. फॉलोअप रखने से मतलब हुआ कि पीएम मोदी न सिर्फ काम शुरू करते हैं बल्कि उसे अंजाम तक पहुंचाते हैं. फिर वो आदर्श ग्राम योजना हो, स्वच्छता अभियान हो या फिर जन धन योजना हो.  

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नौवां बड़ा कदम: बदले की राजनीति में नहीं रखते हैं भरोसा

पीएम नरेंद्र मोदी बदले की राजनीति में कभी भी भरोसा नहीं करते हैं.  उन्होंने भले ही चुनाव के दौरान कई बातें कहीं, लेकिन खुद वो व्यक्तिगत रूप से बदला लेने में यकीन नहीं करते हैं, ये कहना इसलिए भी आसान है क्योंकि उनके अबतक के कार्यकाल में किसी भी कदम से ये बात ज़ाहिर नहीं हुई कि वो किसी से बदला लेना चाहते हैं. साथ ही  वो कानून के काम में भी ज्यादा दखलंदाजी नहीं दिखाते हैं. पीएम मोदी मानते हैं कि कानून अपने तरीके से काम करें तो ही बेहतर है.

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दसवां बड़ा कदम: कम्पूटर से तेज़ है पीएम मोदी का दिमाग

पीएम मोदी का दिमाग कंप्यूटर से तेज इसलिए चलता है क्योंकि कंप्यूटर को भी आप उतनी ही तेजी से दौड़ा सकते हैं  जितनी तेजी से दौड़ने की ताकत वैज्ञानिक उसमें भरते हैं, लेकिन पीएम मोदी एक सामान्य इंसान होते हुए भी वैज्ञानिकों को प्रभावित करने का दम रखते हैं.  पीएम मोदी न सिर्फ वैज्ञानिकों के छोटे-बड़े कामों  में शरीक होते हैं, बल्कि दुनिया के हर उस छोटे से कार्यक्रम को अपना समर्थन देते हैं, जहां उन्हें लगता है कि इससे मानवता का भला होगा.