प्रणव मुखर्जी 25 जुलाई को राष्ट्रपति पद से सेवानिवृत्त होने जा रहे हैं. उनके राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान भारत में कई परिवर्तन आए हैं. उनके ही दौर में मोदी सरकार ने नोटबंदी का ऐतिहासिक फैसला लिया और उन्हीं के कार्यकाल के दौरान भारत में GST लागू हुई. भारत में GST लागू करने का राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का भी सपना था और जिस रात को GST लागू हुआ उन्होंने ये बात कही भी थी.

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रविवार को प्रणब मुखर्जी का विदाई समारोह हुआ

आपको बता दें कि रविवार को संसद भवन के सेंट्रल हॉल में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का विदाई समारोह आयोजित किया गया था. इस समारोह में मोदी सरकार के साथ-साथ विपक्ष के भी कई नेता मौजूद थे. अपने विदाई समारोह में प्रणव मुखर्जी ने कहा कि ‘इस शानदार समारोह के लिए पार्लियामेंट का शुक्रिया.’ इसी के साथ प्रणब मुखर्जी ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा कि ‘मैं नरेन्द्र मोदी की एनर्जी का मुरीद हूँ और उनके साथ जुड़ी अच्छी यादें लेकर जा रहा हूँ.’

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प्रणब मुखर्जी इससे पहले भी पीएम मोदी की कई बार तारीफ़ कर चुके है. इससे पहले उन्होंने कहा था कि ‘नरेंद्र मोदी ने निस्संदेह ही भारतीय अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाया है और उन्होंने विभिन्न प्रकार की पहल की हैं जिससे भारत के आगे बढ़ने का निश्चित संकेत मिला है.’ इसी के साथ प्रणब मुखर्जी ने आगे कहा कि, मोदी के कुछ निर्णय निस्संदेह युगप्रवर्तक हैं.

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सुमित्रा महाजन ने पढ़ा सम्मान पत्र

प्रणब मुखर्जी के विदाई समारोह में लोकसभा स्पीकर सुमित्रा महाजन ने सम्मान पत्र पढ़ते हुए कहा कि, ‘प्रणब मुखर्जी ने आदर्शों की मिसाल पेश की है.’ इसके बाद उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि, हम प्रणब मुखर्जी को प्रणव दा के रूप में ज्यादा जानते हैं. इस समारोह में केंद्र सरकार के अधिकतर सभी मंत्रियों के साथ विपक्ष के बड़े नेता भी सेंट्रल हॉल में मौजूद थे. प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 25 जुलाई को समाप्त हो रहा है. वे देश के 13वें राष्ट्रपति हैं. उनके बाद अब 25 जुलाई को NDA के रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति पद ग्रहण करेंगे.

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प्रणब मुखर्जी ने मोदी सरकार को दी सलाह 

प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति पद छोड़ने से पहले सरकार को सलाह देते हुए कहा कि उन्हें कोई भी कानून लाने के लिए अध्यादेश के विकल्प से बचाना चाहिए. उन्होंने कहा कि केवल बहुत महत्वपूर्ण परिस्थितियों में ही इसका इस्तेमाल करना चाहिए. विदाई समारोह में राष्ट्रपति ने अपनी बात रखते हुए कहा कि,’ मेरा मानना है कि अध्यादेश का इस्तेमाल सिर्फ अपरिहार्य परिस्थितियों में ही किया जाना चाहिए और आर्थिक मामलों में अध्यादेश का प्रावधान होना ही नहीं चाहिए.’ आपको बता दें कि भारत की वर्तमान मोदी सरकार शत्रु संपत्ति अध्यादेश पांच बार पेश कर चुकी है, विपक्ष को इसके प्रावधानों पर आपत्ति है इसलिए कभी भी ये पास नहीं हो पाता.

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प्रणब मुखर्जी ने ये बात ज़ोर देकर कही कि, अध्यादेश का रास्ता केवल ऐसे मामलों में अपनाना चाहिए जिनमें विधेयक संसद में पेश हो चुका हो या संसद की किसी समिति द्वारा उस पर चर्चा हो चुकी हो. उम्मीद है कि पीएम मोदी, प्रणब दा की इस सलाह पर गौर करेंगे.