रामनाथ कोविंद ने देश के 14वें राष्‍ट्रपति के तौर शपथ ले ली है. शपथ ग्रहण के बाद पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और नव निर्वाचित राष्ट्रपति ने अपनी कुर्सियों की अदला-बदली की. अब रामनाथ कोविंद भारत के प्रथम नागरिक होंगे. मंगलवार को दोपहर 12:15 बजे शपथ ग्रहण समारोह संसद भवन के केंद्रीय कक्ष में हुआ. भारत के मुख्य न्यायाधीश ने नए राष्ट्रपति को शपथ दिलाई.

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भारत के मुख्य न्यायाधीश बने कुछ देर के लिए राष्ट्रपति

आपको बता दें की एक नियम के अनुसार जब पूर्व राष्ट्रपति और नव निर्वाचित राष्ट्रपति अपनी कुर्सियों की अदला-बदली करते हैं तो कुर्सियों को बदलने के बीच में जो कुछ मिनट होते हैं उनमें भारत के मुख्य न्यायाधीश को कार्यवाहक राष्ट्रपति समझा जाता है. इसी तरह जब प्रणब मुखर्जी और रामनाथ कोविंद ने कुर्सियों की अदला-बदली की तो उस समय भारत के राष्ट्रपति जस्टिस खेहर को समझा गया.

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रामनाथ कोविंद, प्रणब दा के साथ पहुंचे 

रामनाथ कोविंद जब प्रणव मुखर्जी के साथ बग्गी में बैठकर राष्ट्रपति भवन पहुंचे तो इस सफ़र के दौरान वो प्रणब मुखर्जी की बाईं और बैठे थे जबकि कोविंद दांई तरफ बैठे हुए नज़र आए. शपथ ग्रहण करने के बाद इनकी जगहें बदल जाएंगी और ये एक दूसरी की जगह ले लेंगे. नए राष्ट्रपति को सेना के तीनों अंगों द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया जाएगा.

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ऐसे थे भारत के 13 वें राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी

प्रणब मुखर्जी देश के 13 वें राष्ट्रपति थे. प्रणब मुखर्जी  साल 2012 से देश के राष्ट्रपति पद की गरिमा बढ़ा रहे थे. 24 जुलाई को प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रपति कार्यालय में आखिरी दिन था क्योंकि 25 जुलाई को देश के 14 वें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद राष्ट्रपति पद की शपथ लेकर देश के नए राष्ट्रपति बन चुके हैं. प्रणब मुखर्जी वो शख्सियत हैं जिन्हें कांग्रेस के एक निष्ठावान एवं विश्वसनीय व्यक्ति के रूप में जाना जाता है, शायद यही एक वजह थी जिसके चलते प्रणब मुखर्जी को देश का राष्ट्रपति बनाया गया था.

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आपको बता दें कि प्रणब मुखर्जी इतने सरल स्वभाव के थे कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि एक दिन वो देश के राष्ट्रपति बनेंगे. एक बार जब वे युवा सांसद थे तो वो अपने आवास के बरामदे में बैठे हुए थे और तभी उनकी नज़र राष्ट्रपति को ले जाने वाली बग्गी पर पड़ी. जिसे देखते ही प्रणब दा ने अपनी बड़ी बहन से मजाक करते हुए कहा कि इस आलीशान राष्ट्रपति भवन का आनंद उठाने के लिए वो अगले जन्म में घोड़ा बनना पसंद करेंगे.

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अपने से करीब 10 साल छोटे भाई के मुंह से इस तरह की बात को सुनकर प्रणब मुखर्जी की बड़ी बहन अन्नपूर्णा बनर्जी ने उसी समय भविष्यवाणी करते हुए कहा था कि घोड़ा छोड़ो तुम इसी जन्म में भारत के राष्ट्रपति बनोगे और आगे चलकर उनकी कही हुई ये बात सच भी साबित हुई. प्रणब मुखर्जी भारत के 13वें राष्ट्रपति बने.

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24 जुलाई को प्रणब मुखर्जी को जब विदाई दी गई तो इस मौके पर प्रणब दा काफ़ी भावुक हो गए थे. उनको पता था कि ये क्षण आने वाले वक्त में उनके जीवन में बहुत महत्व रखने वाला है. इस विदाई समारोह में प्रणब मुखर्जी को उपहार के रूप में एक एक मोमेंटो और एक कॉफी टेबल बुक प्रदान की गई.इस कॉफी टेबल बुक में  मोदी के अलावा सोनिया गांधी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, लोकसभा उपाध्यक्ष थंबी दुरई और राज्यसभा के उपसभापति पी जे कुरियन और संसद के कई सदस्यों के दस्तखत हैं