पीएम मोदी के सामने इस दिनों सबसे बड़ा मुद्दा देश की सिक्यूरिटी का है, इस काम में उनकी मदद कर रहे हैं नेशनल सिक्यूरिटी एडवाइसएर अजीत डोभाल. सभी जानते हैं भारत और चीन के बीच इन दिनों तनातनी चल रही है और इसी मुद्दे को लेकर पूरी सरकार चिंतित है. ऐसे में अजीत डोभाल के ऊपर काफी ज़िम्मेदारी है. उन्होंने हमेशा से ही ऐसे-ऐसे कारनामे किये हैं जिनसे भारत का मान बढ़ा है.  इन दिनों अजीत डोभाल चीन मुद्दे को लेकर चीन गये हैं और भारत में इस बीच उनकी एक वीडियो वायरल हो रही है.

 

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इस वीडियो में अजीत डोभाल ने जो कहा है उसे सुनकर विरोधियों की नींद उड़ जायेगी और आप भी आसानी से समझ जाएंगे कि पीएम मोदी को अजीत डोभाल पर इतना भरोसा क्यों है. अजीत डोभाल ने इस वीडियो में साफ़ बताया है कि भारत कहां कमजोर है.

देखिये वीडियो! 

उरी हमले के बाद पूरे भारत में गुस्सा फ़ैल रहा था, और पूरा देश से आवाज आ रही थी कि मोदी सरकार पाकिस्तान की नापाक हरकत से बदला ले और देश का मान बचाए l हालाँकि सरकार ने पाकिस्तान को जवाब तो गजब का दिया l सर्जिकल स्ट्राइक करके पाक के कब्जे वाले कश्मीर में घुसकर 38 आतंकियों को मार गिराया और 8 आतंकी कैम्प तबाह कर दिया l जिसके बाद देश में एक अलग ही माहौल है और सेना का भी हौसला बढ़ा है l ये पूरा ऑपरेशन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की निगरानी में चला, आखिर ये अजीत डोभाल हैं कौन..क्यूँ इतनी चर्चा में रहते हैं अजीत डोभाल? जानिए कुछ रोचक तथ्य अजीत डोभाल के बारे में l

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जनवरी 2005 में खुफिया ब्यूरो के प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त डोभाल, साल 1968 बैच के आईपीएस अधिकारी रहे हैं। मूलत: उत्‍तराखंड के पौडी गढ़वाल से आने वाले अजीत डोभाल ने अजमेर मिलिट्री स्‍कूल से पढ़ाई की है और आगरा विवि से अर्थशास्‍त्र में एमएम किया है। वे केरल कैडर से 1968 में आईपीएस अधिकारी के रूप में चुनकर आए हैं। कुछ साल वर्दी में बिताने के बाद, डोभाल ने 33 वर्ष से अधिक समय खुफिया अधिकारी के तौर पर बिताए और इस दौरान वह पूर्वोत्तर, जम्मू कश्मीर और पंजाब में तैनात रहे।

प्रधानमंत्री मोदी जी ने इन्हें सौंपी है पाकिस्तान और आतंकवादियों को सबक सिखाने की जिम्मेदारी। आतंकी और राष्ट्रविरोधी जिसे भेड़िया कहते है । जिसके बारे में कहा जाता है कि भगवान इस बंदे में दया नाम का पुर्जा लगाना भूल गया है । प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने उन्हें महज 6 साल के करियर के बाद ही इंडियन पुलिस मेडल से सम्मानित किया था जबकि परंपरा के मुताबिक वो पुरस्कार कम से कम 17 साल की नौकरी के बाद ही मिलता था. यही नहीं राष्ट्रपति वेंकटरमन ने अजीत डोभाल को 1988 में कीर्तिचक्र से सम्मानित किया तो ये भी एक नई मिसाल बन गई.

जानिए अजीत डोभाल के बारे में ऐसी जानकारियां जिन्हें पढ़कर गर्व करेगे आप…

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अजीत डोभाल पहले ऐसे शख्स थे जिन्हें सेना में दिए जाने वाले कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था. अजीत डोभाल की कामयाबियों की लिस्ट में आतंक से जूझ रहे पंजाब और कश्मीर में कामयाब चुनाव कराना भी शामिल है. यही नहीं उन्होंने 6 साल पाकिस्तान में भी गुजारे हैं और चीन, बांग्लादेश की सीमा के उस पार मौजूद आतंकी संगठनों और घुसपैठियों की नाक में नकेल भी डाली है। अजीत डोभाल की पहचान सुरक्षा एजेंसियों के कामकाज पर उनकी पैनी नजर की वजह से बनी है. ऐसी ही साफ समझ की बदौलत अजीत डोभाल ने अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को संकट से उबारा था. 24 दिसंबर 1999 को एयर इंडिया की फ्लाइट आईसी 814 को आतंकवादियों ने हाईजैक कर लिया और उसे कांधार ले जाया गया. भारत सरकार एक बड़े संकट में फंस गई थी. ऐसे में संकटमोचक बनकर उभरे थे अजीत डोभाल.

अजीत उस वक्त वाजपेयी सरकार में एमएसी के मुखिया थे. आतंकवादियों और सरकार के बीच बातचीत में उन्होंने अहम भूमिका निभाई और 176 यात्रियों की सकुशल वापसी का सेहरा डोभाल के सिर बंध गया था. अजीत डोभाल ने सीमापार पलने वाले आतंकवाद को करीब से देखा है और आज भी आतंकवाद के खिलाफ उनका रुख बेहद सख्त माना जाता है

.  ये 10 फैक्ट जानकर आपको भी गर्व होगा अजित डोभाल पर..

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1. एक ऐसा भारतीय, जो खुलेआम पाकिस्तान को एक और मुंबई में आतंकी हमले के बदले बलूचिस्तान छीन लेने की चेतावनी देने से गुरेज़ भी नहीं करता….

2. एक ऐसा जासूस, जो पाकिस्तान के लाहौर में 7 साल तक मुसलमान बनकर अपने देश की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा हो….

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3. वे भारत के ऐसे एक मात्र नागरिक हैं, जिन्हें शांतिकाल में दिया जाने वाले दूसरे सबसे बड़े पुरस्कार कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है.. डाभोल कई ऐसे खतरनाकसकारनामों को अंजाम दे चुके हैं, जिन्हें सुनकर जेम्स बांड के किस्से भी फीके लगते हैं….. वर्तमान में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पद पर आसीन अजीत डाभोल से बड़े-बड़े मंत्री भी सहमे रहते हैं…

4. डोभाल ने पाकिस्तान और ब्रिटेन में राजनयिक जिम्मेदारियां भी संभालीं और फिर करीब एक दशक तक खुफिया ब्यूरो की ऑपरेशन शाखा का लीड किया। रिटायर होने के बाद वे दिल्ली स्थित एनजीओ विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन चला रहे थे, जो वार्ता और विवाद निबटारे के लिए मंच उपलब्ध कराता है।

अजीत डोभाल ने कंधार और ब्लू स्टार ऑपरेशन में क्या भूमिका निभाई…

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5. भारतीय सेना के एक महत्वपूर्ण ऑपरेशन ब्ल्यू स्टार के दौरान उन्होंने एक गुप्तचर की भूमिका निभाई और भारतीय सुरक्षा बलों के लिए महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई, जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल हो सका…..
इस दौरान उनकी भूमिका एक ऐसे पाकिस्तानी जासूस की थी, जिसने खालिस्तानियों का विश्वास जीत लिया था और उनकी तैयारियों की जानकारी मुहैया करवाई थी….

6. जब 1999 में इंडियन एयरलाइंस की उड़ान आई सी-814 को काठमांडू से हाईजैक कर लिया गया था. तब उन्हें भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार बनाया गया था। बाद में इस फ्लाइट को कंधार ले जाया गया था और यात्रियों को बंधक बना लिया गया था.. लगातार 110 घंटे आतंकवादियों से नेगोसियेट करने के बाद सिर्फ 3 आतंकवादियों को छोड़ा जबकि मांग 40 की थी

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7. कश्मीर में भी उन्होंने उल्लेखनीय काम किया था और उग्रवादी संगठनों में घुसपैठ कर ली थी। उन्होंने उग्रवादियों को ही शांति रक्षक बनाकर उग्रवाद की धारा को मोड़ दिया था.. उन्होंने एक प्रमुख भारत- विरोधी उग्रवादी कूका पारे को अपना सबसे बड़ा भेदिया बना लिया था….

8. अस्सी के दशक में वे उत्तर पूर्व में भी सक्रिय रहे। उस समय ललडेंगा के नेतृत्व में मिजो नेशनल फ्रंट ने हिंसा और अशांति फैला रखी थी. लेकिन तब डोवाल ने ललडेंगा के सात में छह कमांडरों का विश्वास जीत लिया था और इसका नतीजा यह हुआ था कि ललडेंगा को मजबूरी में भारत सरकार के साथ शांति विराम का विकल्प अपना पड़ा था…

 आखिर पीएम मोदी अजीत डोभाल पर इतना विश्वास क्यों करते हैं…

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9. डोभाल ने वर्ष 1991 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट द्वारा अपहरण किए गए रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू को बचाने की सफल योजना बनाई थी. कश्मीर में अपने कार्यकाल के दौरान, डोभाल आतंकवादी समूहों को तोड़ने में सफल रहे।

10. हाल ही में 4 जून को मणिपुर के चंदेल गांव में उग्रवादियों के हमले में 18 जवान शहीद हो गए थे। डोभाल ने पूर्वोत्तर भारत में सेना पर हुए हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई और भारतीय सेना ने सीमा पार म्यांमार में कार्रवाई कर उग्रवादियों को मार गिराया. भारतीय सेना ने म्यांमार की सेना और एनएससी एन खाप्लांग गुट के बागियों के सहयोग से ऑपरेशन चलाया, जिसमें करीब 30 उग्रवादी मारे गए .. रणनीति को अंजाम देने के लिए डोभाल ने पीएम मोदी के साथ बांग्लादेश जाने का प्लान टाल दिया।