सोशल मीडिया एक ऐसी चीज़ है जो किसी को नहीं छोड़ती, चाहे कितना ही बड़ा नेता हो या कोई भी आम आदमी पता नहीं होता कब कौन ट्रोल हो जाए. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही हैं जिसमें पाकिस्तान के अली जिन्ना अंग्रेजी में एक भाषण दे रहे हैं. इस भाषण में वो उर्दू को राष्ट्र भाषा घोषित करने की कह रहे हैं लेकिन बात अंग्रेजी में कर रहे हैं. इस बात पर कुछ सोशल मीडिया यूजर की नज़र पड़ गयी है और उन्होंने जिन्ना को जमकर ट्रोल किया है.  लोगों ने इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर किया है और जमकर कमेंट भी किये हैं.

 

 

देखिये वीडियो, इस वीडियो को देखने के बाद अप भी अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे और जिन्ना की बेवकूफी पर हसेंगे..

वीडियो में जिन्ना अंग्रेजी में बोल रहे हैं कि उर्दू को हम नेशनल भाषा बनायेंगे.  देखिये इसको बाद लोगों ने क्या मजेदार रिप्लाई किया. आपको बता दें

वाकई इस से बड़ी बेवकूफी क्या होगी कि उर्दू को पाकिस्तान की राष्ट्रभाषा घोषित करने के लिए अंग्रेजी में भाषण दिया है जिन्ना ने आपको बता दें जिन्ना को अंग्रेजी बोलनी आती ही नहीं थी.

जानिये जिन्ना पर गुस्सा होने के बाद भी नाथूराम गोडसे ने महात्मा गाँधी को गोली क्यों मारी ?

महात्मा गाँधी, वो नाम है जिसके बारे में सभी जानते हैं, भारतीय करेंसी पर छपे इस फ्रीडम फाइटर की कहानी कुछ अलग है l भारतीय हिस्ट्री की हर एक  किताब में शामिल महात्मा गाँधी के बारे में आप सभी जानते ही होंगे और ये भी जानते होंगे उनकी हत्या नाथूराम गोडसे ने गोली मारकार की थी l

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30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी की गोली मारकर हत्या कर दी थी। लेकिन नाथूराम गोड़से घटना स्थल से फरार नही हुआ, बल्कि उसने आत्मसमर्पण कर दिया l नाथूराम गोड़से समेत 17 दोषियों पर गांधी की हत्या का मुकदमा चलाया गया l

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अब सवाल ये है आखिर नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली क्यों मारी थी ? अभी तक आप सभी ने इस सवाल के जवाब में ये पढ़ा होगा..

अक्तूबर 1947 को पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण कर दिया तो दूसरी ओर पाकिस्तान से लाशे और हिंदू शरणार्थी आने का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा था l  इसी बीच माउंटबैटन ने भारत सरकार से पाकिस्तान सरकार को 55 करोड़ रुपए की राशि देने का परामर्श दिया था l  आक्रमण और पलायन को देखते हुए केन्द्रीय मन्त्रीमण्डल ने उसे टालने का निर्णय लिया लेकिन गान्धी जी उसी समय यह राशि तुरन्त पाकिस्तान को दिलवाने के लिए आमरण अनशन पर बैठ गए. गोडसे जैसे तैसे इस बात को सहन कर गए l  बावजूद इसके गांधी जी से नाराज गोडसे के मन में अभी तक उनकी हत्या कोई खयाल नहीं आया था  l इतना सब होने के बाद भी बंटवारे, हिंदूओं का कत्लेआम और महिलाओं के साथ बलात्कार को लेकर गोडसे का गुस्सा जिन्ना और मुस्लिमों के प्रति अधिक था न कि गांधी जी के प्रति था, दिल्ली में गोडसे पाकिस्तान से आने वाले हिंदू शरणार्थियों के कैंपों घूम घूम लोगों की सहायता के कार्य में लगा था और दिन रात उनकी सेवा करता रहता था l

इसी बीच गोडसे की नजर पुरानी दिल्ली की एक मस्जिद पर गई जहां से पुलिस जबरदस्ती हिंदू शरणार्थी को बाहर निकाल रही थी हिन्दुओं पे हो रहे इस अत्याचार को देखकर नाथूराम गोडसे वहीं रुक गए,

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मंदिर और गुरुद्वारों में जगह भरने के बाद कोई जगह नहीं मिली तो बारिश और सर्दी से बचने के लिए पाकिस्तान से आए शरणार्थियों ने एक खाली पड़ी मस्जिद में शरण ले ली थी l जैसे ही यह बात महात्मा गाँधी को पता चली तो वे उस मस्जिद के सामने धरने पर बैठ गए और शरणार्थियों से मस्जिद खाली करवाने के लिए सरकार पर दवाब बनाने लगे l  जिस वक्त पुलिस लोगों को मस्जिद से बाहर निकाल रही थी l  उस समय गोडसे भी वहां मौजूद थे और जब उन्होंने ठंड में कांपते और भूख से बिलखते बच्चों को रोते हुए मज्जिद से बाहर आते देखा तो उन्होंने तभी फैसला लिया की बस अब गाँधी को मरना होगा और फिर मौका देखकर उन्होंने गाँधी की हत्या की थी l

गौरतलब है महात्मा गाँधी हमेशा से ही मुस्लिम तुस्टीकरण की नीति के आगे झुकते रहे, जिन्ना की जिद के आगे झुककर देश का विभाजन स्वीकार कर बैठे l  नाथूराम गोडसे का योगदान महात्मा गाँधी के साथ कई स्वतंत्रा आन्दोलन में काबिले तारीफ़ रहा है l

यही कारण है कि महात्मा गांधी की हत्या को हत्या न बताकर गोडसे ने उसे वध की संज्ञा दी और अपने इस कार्य के लिए निर्णय इतिहास पर छोड़ दिया कि अगर भविष्य में तटस्थ इतिहास लिखा जाएगा तो वह जरूर इस पर न्याय करेगा