भारत चीन के बीच बढ़ रहे सीमा विवाद में आयेदिन नया मोड़ देखने को मिल रहा. कभी चीन की तरफ से आती बेवजह की धमकी तो कभी भारत का उसपर पलटवार. कभी ख़बर आती है कि भारतीय सेना के पास शायद उतने पर्याप्त हथियार नहीं है कि अगर युद्ध सी स्थिति आती है तो भारत चीन के सामने 10 दिन भी नहीं टिक पायेगा. ऐसे में इन सब के बीच कई ऐसे कदम भी उठाये गए जिससे चीन अपनी हरकतों से बाज़ आ जाये, हालाँकि अभी तक चीन की नीच हरकत कम होने का नाम नहीं ले रही है. लेकिन अब मिली ख़बर के अनुसार पीएम मोदी ने चीन की इस नीच हरकत को रोकने के लिए ऐसा कदम उठाया है जिससे चीन अपने घुटने पर आने को मजबूर हो जायेगा.

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प्रधानमंत्री मोदी ने एक ऐसे शख्स को दिया भारत आने का न्यौता जिसके बाद

दरअसल हम आपको बता दें कि भारत-चीन सीमा विवाद को जल्द-से-जल्द ख़त्म करने के लिए अब पीएम मोदी ने मंगोलिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति खाल्तमा बटुलगा को भारत दौरे पर आमंत्रित किया है. सीमा पर चल रही तनातनी के मद्देनजर इस बुलावे को चीन की अकड़ तोड़ने के लिए उठाये गए कदम से भी जोड़कर देखा जा रहा है.

मंगोलिया के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति खाल्तमा बटुलगा

हम आपको यहाँ ये बता दें कि इस तरह के अनुमान कि खाल्तमा बटुलगा को भारत आने का ये न्यौता चीन की हेकड़ी निकालने के लिए है इसलिए लगाया जा रहा है क्योंकि बटुलगा चीन के मुखर आलोचक माने जाते हैं. बताया जा रहा है कि खाल्तमा बटुलगा ने चुनावी अभियान के दौरान बीजिंग से ज्यादा आर्थिक आजादी की वकालत की थी.

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साल 2014 के एक इंटरव्यू में राष्ट्रपति बटुलगा ने कहा था कि संसाधनों के ह्रास का मतलब ये होगा कि, “फिर तो वहां निश्चित रूप से ही चीन और मंगोलिया के बीच संघर्ष होगा.” आपकी जानकारी के लिए हम आपको बता दें कि चीन और मंगोलिया के बीच संबंध पिछले साल उस वक़्त से प्रभावित हुए हैं जब मंगोलिया के बौद्ध बहुमत ने तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को दौरे पर बुला लिया था.

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ख़बरों में आया कि चीन ने इस यात्रा के बाद कथित तौर पर एक ऐसी सीमा बंद कर दी थी जो कि बेहद ही महत्वपूर्ण मानी जाती थी जिसका नतीजा ये हुआ था कि मंगोलियाई ट्रक ड्राइवरों को सीमा के पास ही खड़े रहना पड़ा था.

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सीमा पर खड़े ट्रक ड्राइवरों के चलते अब मंगोलिया पर दबाव बनाया गया और उसे दलाई लामा को दोबारा न बुलाने का वादा करवाया गया. साल 2015 में, पीएम मोदी ने उलानबाटारस भाग का दौरा किया था और एक बिलियन डॉलर क्रेडिट देने का वादा किया था. ऐसे में अब उम्मीद ये की जा रही है  कि ये राष्ट्रपति बटुलगा के साथ पक्ष में जाएगा, जो चीन के साथ कम आर्थिक संबंधों की वकालत करते हैं.

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बताते चले मंगोलिया का 70 प्रतिशत व्यापार सिर्फ और सिर्फ चीन के साथ ही होता है. इसके अलावा बात करें अगर आयात की तो चीन के साथ उनका 90 प्रतिशत आयात होता है.