राजनीति भी कई बार कुम्भ के मेले की तरह बन जाती है जिसमें नेता मिलते भी रहते हैं और बिछुड़ते भी रहते हैं. राजनीति के कुम्भ में ऐसे ही दो नेताओं का आज से 20 महीने पहले मिलन हुआ था जो मिलन अब टूट चुका  है. आपको बता दें कि यह गठबंधन हुआ तो इसलिए था कि दोनों लोग मिलकर नरेन्द्र मोदी से एक दूसरे की रक्षा कर सकें,  लेकिन इन दोनों का भरत मिलाप अपनी ही रक्षा नहीं कर पाया. जब ये दोनों मिले थे तब इनके सुर एक जैसे थे. उस वक्त ये दोनों नेता मिले सुर मेरा तुम्हारा वाले तर्ज़ पीएम मोदी को कोस रहे थे और पीएम मोदी के खिलाफ लड़ने के लिए नए फार्मूला ढूंढ रहे थे. लेकिन आज समय बदल चुका है इसी लिए कहते है कि राजनीति में न तो कोई किसी का पक्का दोस्त होता है न कोई पक्का दुश्मन .

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वहीँ काफी दिनों से पार्टी में चल रही गतिविधियों के बाद अटकले लगायी जा रही थी कि हो सकता है नीतीश कुमार मुख्यमंत्री  पद से इस्तीफ़ा दे  सकते है . ऐसे में आख़िरकार बुधवार  26 जुलाई को सभी अटकलों को सही साबित करते हुए नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. सिर्फ यही नहीं इधर नीतीश कुमार ने इस्तीफ़ा दिया और उधर राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया, मानों ऐसा लगता है कि जैसे यह सब पहले से सोची समझी साजिश के तहत हो कि आपने इस्तीफा दिया नहीं उधर इस्तीफा मंज़ूर. इस्तीफा देने के बाद जब नीतीश कुमार से मीडिया ने इस्तीफे का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि, ” मुझसे जितना संभव हो सका उतने दिन मैंने सरकार चलाई, लेकिन अब जो हालात हैं ऐसे में मेरे लिए काम कर पाना संभव नहीं रह गया है और इसलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है.

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26 जुलाई को हुई इस घटना ने बिहार की राजनीति में भूचाल सा ला दिया है. जी हाँ जहाँ बिहार में लालू के बेटे तेजस्वी का मामला काफी समय से सुर्खियाँ बटोर रहा था वहीँ कल नीतीश कुमार द्वारा दिए गए इस्तीफे ने एक नया मोड़ लाकर खड़ा कर दिया है. किसी को भी इस बात की भनक तक नहीं थी कि नीतीश कुमार इतनी जल्दी ऐसा सख्त कदम उठा लेंगे जोकि राजनीति में एक भूचाल से कम नहीं माना जाएगा.

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वहीँ बिहार से एक और बड़ी बात निकलकर सामने आ रही है, जो कि लालू के परिवार के लिए घातक साबित हो चुकी है जिसे पढ़कर आप भी यही कहेंगे कि ऊपरी मन से लालू यादव का परिवार कितनी भी ख़ुशी ज़ाहिर क्यों न कर ले लेकिन नीतीश कुमार द्वारा उठाए गए इस कदम से वे लोग कहीं न कहीं आहत तो हैं ही. आपको बता दें कि हाँ यह बात सच भी है कि यह इस्तीफा बहुत बड़ी सोची समझी साजिश के तहत हुआ है जिसे नीतीश कुमार ने अंजाम दिया है वरना इस घटना को अंजाम देने की फिराक में तो कोई और ही था लेकिन तभी…

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आपको बता दें कि JDU के कुछ नेताओं का कहना है कि चारा घोटाले और भी तमाम मामलों से परेशान होकर लालू प्रसाद यादव असल में खुद BJP से डील कर के नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल करने की योजना बना रहे थे, जिस बात की भनक नीतीश कुमार को लग गई थी और उन्होंने मौके का फायेदा उठाते ही लालू की बाजी पलट दी.

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आज लालू प्रसाद यादव का परिवार नीतीश कुमार पर धोखा देने का आरोप लगा रहा है, लेकिन वहीँ सूत्रों के मुताबिक लालू यादव खुद बीजेपी से समझौता कर नीतीश कुमार के पैरों तले से जमीन खिसकाने वाले थे. लेकिन तभी यह खबर नीतीश कुमार तक पहुंच गई और उन्होंने अपने सूत्रों के जरिए पहले तो इस खबर को पुख्ता किया और जब मामला साफ़ हो गया तो उन्होंने आनन-फानन में बीजेपी के कुछ प्रमुख नेताओं से बात चीत करी और फ़ौरन इस्तीफा देकर बीजेपी के साथ हाथ मिलाकर नयी सरकार बनाने की योजना बनाई.

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कहा जा रहा है कि लालू प्रसाद यादव ने जैसे ही अपने परिवार को खतरे में देखा तो उन्होंने अपने ख़ुफ़िया दूतों को केंद्र के दो बड़े मंत्रियों के पास भेजकर अपने परिवार पर आई कानूनी पचड़े को दूर करने की मदद मांगी थी  और उसके बदले रिश्वत के तौर पर ये कहा कि अगर बीजेपी उनका साथ दे तो वे बदले में नीतीश कुमार को सत्ता से बाहर कर देंगे.

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वहीँ JDU के कुछ लोगों का कहना है कि वैसे भी नीतीश कुमार RJD के तमाम मंत्रियों के आचरणों से न खुश थे क्योंकि RJD के तमाम मंत्री लालू प्रसाद यादव के आदेश के मुताबिक ही काम करते थे और नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री होने के बावजूद उनके आदेशों को नजरअंदाज कर दिया जाता था .

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बता दें कि नीतीश कुमार द्वारा दिए गए इस्तीफे के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने भी फ़ौरन ट्वीट किया था कि, “भ्रष्टाचार के ख़िलाफ लड़ाई में जुड़ने के लिए नीतीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई. सवा सौ करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत और समर्थन कर रहे हैं.” ऐसे में अब तो यह बात तो सही साबित हो ही गई है कि राजनीति में कोई किसी का नहीं होता कब कौन किसका दोस्त बन जाए और कब दुश्मन. जी हाँ इस्तीफा देते ही नीतिश कुमार ने बीजेपी का दामन पकड़ लिया है और आज ही बीजेपी की 58 सीटों का समर्थन पाकर नीतिश कुमार ने आज फिर से मुख्यमंत्री पद का शपथ ले लिया है मतलब कि नीतिश कुमार अब 6 वीं बार मुख्यमंत्री बन गए हैं.