नीतीश के इस्तीफा देने के बाद आया बिहार राजनीति में भूचाल 

बिहार की राजनीति में नीतीश कुमार ने इस्तीफा देकर भूचाल सा ला दिया है. लालू यादव को लगे इस बड़े झटके से वह बौखला से गये हैं. लालू यादव नीतीश पर हत्या का आरोप लगा रहे हैं.नीतीश कुमार ने राजद व कांग्रेस के गठबंधन से बनायी सरकार से इस्तीफा दे दिया है. सालों बाद सत्ता में वापसी करने वाले लालू यादव एक बार फिर से सत्ता से दूर हो गये हैं. ऐसा कहा जा रहा था कि तेजस्वी यादव के इस्तीफे को लेकर शुरु हुए विवाद का अंत नीतीश के इस्तीफ़ा देने के बाद ख़त्म हो गया| इसी के साथ बीजेपी को रोकने के लिए बनाया गया महागठबंधन भी टूट गया. वहीं 26 जुलाई को इस्तीफा देने के कारण को स्पष्ट किया है. नीतीश कुमार ने बताया कि जब तक मुझसे हुआ मैंने सरकार चलायी.

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नीतीश कुमार पर गंभीर आरोप

लालू यादव ने प्रेस कांफ्रेस कर नीतीश कुमार पर धोखा देने का अरोप लगाया गया है. लालू ने कहा कि नीतीश कुमार बीजेपी और आरएसएस से मिल गये है. ये पूरा कार्यक्रम पहले से ही फिक्स था. लालू ने बताया कि नीतीश कुमार पर मर्डर का आरोप है 2009 में नीतीश कुमार पर हत्या का केस है और उस केस का संज्ञान भी लिया जा चुका है. प्रेस कांफ्रेस के दौरान लालू काफी हमलावर नजर आ रहे थे.लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार ने किसी का इस्तीफ़ा नही माँगा था और न ही किसी तरह का विवाद था. हमसे हमारा पक्ष माँगा गया था जो हमने उन्हें दे दिया था.

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शरद यादव अगर खिलाफ चले गये तो एक दिन बाद ही गिर सकती है नीतीश की सरकार

27 जुलाई को 6 वीं बार नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद की सपथ ले ली है. बिहार विधानसभा में आज नीतीश कुमार अपना बहुमत साबित करेंगे. वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट इस बात का दावा कर रहे हैं कि बहुमत परीक्षण में सबसे अहम् भूमिका शरद यादव है.इस तरह हम कह सकते हैं कि शरद यादव अगर नीतीश के खिलाफ चले गये तो नीतीश की सरकार एक दिन बाद ही गिर जायेगी.

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बिहार में कुल विधानसभा सीटों का आंकड़ा 

आपको बात दें कि बिहार में कुल 243 विधान सभा सीटें हैं. वहीं उसी में से राजद के नेता लालू यादव के पास 80, जनता दल यूनाइटेड के मुखिया नीतीश कुमार के पास 71 एवं बीजेपी और उसके साझेदार के पास 58 और कांग्रेस के पास 27 सीटें हैं. बाकी अन्य सीटें भाकपा और निर्दलियों के पास हैं.

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नीतीश का दावा उनके पास 132 विधायक

विधान सभा में बहुमत साबित करने के लिए नीतीश कुमार को 122 विधायकों का समर्थन चाहिए. वहीं एनडीए व जदयू के विधायकों को मिलाकर आंकड़ा 129 होता है.नीतीश अपने पक्ष में 132 विधायकों के होने का दावा कर रहे हैं. वहीं लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव इस बात का दावा कर रहे हैं कि जदयू के 24 विधायक उनके संपर्क में है. नीतीश की पार्टी में 11 यादव तथा 5 मुस्लिम विधायक हैं जिनके ऊपर संदेह जताया जा रहा है कि कहीं वो राजद से हाथ न मिला लें.

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अली अनवर दे सकते हैं बड़ा झटका

नीतीश कुमार के इस कदम का विरोध महागठबंधन में शामिल सभी पार्टियाँ तो कर ही रही है लेकिन इसी कड़ी में एक ऐसे नेता का नाम सामने आया है जो नीतीश को बड़ा झटका दे सकता है. दरअसल नीतीश पार्टी के नेता अली अनवर ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बीजेपी के साथ जाना मेरे जमीर के खिलाफ है. अली अनवर ने आगे कहा कि नीतीश कुमार अपनी अंतरात्मा की आवाज़ सुनकर बीजेपी के साथ सरकार बना रहे है, लेकिन मेरी अंतरात्मा इस बात को नही मानती. अगर मुझे मौका मिला तो पार्टी के सामने मै अपने बात जरुर रखूँगा. कुछ विधायक ऐसे भी हैं जो शरद यादव के करीबी बताये जा रहे हैं.

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शरद यादव ने गुरुवार को अली अनवर के साथ की थी बैठक

 

27 जुलाई गुरुवार को दिल्ली में शरद यादव ने बिरेन्द्र कुमार व अली अनवर के साथ बैठक की. लालू यादव ने भी मीडिया से कहा था कि वह जल्द ही शरद यादव से फ़ोन पर बात करेंगे. इस तरह सभी को उम्मीद है कि शरद यादव की तरफ से सांसदों की बैठक के बाद कोई बड़ा फैसला हो सकता है. उन्होंने मीडिया से बात करके बताया है कि कुछ दिन बाद वह अपने फैसले का एलान करेंगे. आपको बता दें पिछले साल शरद यादव जदयू अध्यक्ष पद से हटाये जाने को लेकर नीतीश कुमार से नाराज हैं. नीतीश शरद को हटाकर खुद अध्यक्ष बन गये थे !