वैसे तो रक्षाबंधन का त्यौहार कुछ दिनों बाद आएगा लेकिन लालू यादव और नीतीश कुमार की राजनीति का रक्षा बंधन भाई बहन के रक्षाबंधन से पहले ही टूट गया. ये बंधन बना तो इसलिए था ताकि लालू यादव और नीतीश कुमार दोनों मिलकर नरेन्द्र मोदी से एक दूसरे की रक्षा कर सकें लेकिन लालू यादव और नीतीश कुमार का भरत मिलाप अपनी ही रक्षा नहीं कर पाया. जब लालू यादव और नीतीश कुमार मिले थे तब इनके सुर एक जैसे थे. उस वक्त ये दोनों नेता मिले सुर मेरा तुम्हारा वाले तर्ज़ पर पीएम मोदी को कोस रहे थे और बिहार में पीएम मोदी के खिलाफ राजनीतिक फार्मूला ढूंढ निकालने में लगे हुए थे. लेकिन आज समय बदल चुका है इसी लिए कहते है कि राजनीति में न तो कोई किसी का पक्का दोस्त होता है और न ही कोई पक्का दुश्मन.

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राजनीति भी कई बार कुम्भ के मेले की तरह बन जाती है जिसमें नेता मिलते भी रहते हैं और बिछुड़ते भी रहते हैं. राजनीति के कुम्भ में ऐसे ही दो नेताओं का आज से 20 महीने पहले मिलन हुआ था जो मिलन अब टूट चुका  है. काफी दिनों से पार्टी में चल रही गतिविधियों को देखते हुए अटकले लगायी जा रही थी कि हो सकता है नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दें. ऐसे में आख़िरकार बुधवार 26 जुलाई को सभी अटकलों को सही साबित करते हुए नीतीश कुमार ने बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे ही दिया.

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नीतीश कुमार द्वारा दिए गए इस्तीफे के बाद जब मीडिया ने नीतीश कुमार से इस्तीफे का कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि, ” मुझसे जितना संभव हो सका उतने दिन मैंने सरकार चलाई, लेकिन अब जो हालात हैं ऐसे में मेरे लिए काम कर पाना संभव नहीं रह गया है और इसलिए मैंने इस्तीफा देने का फैसला किया है.

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यही नहीं आपको बता दें कि नीतीश कुमार ने जैसे ही इस्तीफ़ा दिया उधर राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने उनका इस्तीफा मंजूर भी कर लिया, मानों ऐसा लगता है कि जैसे यह सब पहले से सोची समझी साजिश के तहत हो रहा हो कि आप अपना इस्तीफा दीजिये तो सही हम आपके साथ हैं. जी हाँ इधर नीतीश कुमार ने इस्तीफ़ा दिया उधर देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी ट्वीट करके कहा कि  “भ्रष्टाचार के ख़िलाफ लड़ाई में जुड़ने के लिए नीतीश कुमार जी को बहुत-बहुत बधाई. सवा सौ करोड़ नागरिक ईमानदारी का स्वागत और समर्थन कर रहे हैं.” जिसके बाद नीतीश कुमार ने बीजेपी का समर्थन पाते ही 27 जुलाई को आनन् फानन में ही सुबह ही मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली.

आपको बता दें कि ये वो ही नीतीश कुमार हैं जिनको एक समय में नरेन्द्र मोदी से मिलना तक पसंद नहीं था और न ही उन्हें नरेन्द्र मोदी फूटी आँख सुहाते थे. इतना ही नहीं नीतीश कुमार को तो नरेन्द्र मोदी से हाथ तक मिलाना पसंद नहीं था. इसीलिए नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव के साथ हाथ मिलाकर बिहार से बीजेपी को बाहर रखने के लिए गठबंधन कर लिया था. ताकि बिहार में बीजेपी की सरकार ना आ सके. लेकिन आज समय बदल गया है उन्ही नीतीश कुमार ने समय का फायेदा उठाते हुए NDA का दामन थाम लिया और बीजेपी का समर्थन पाकर एक नयी सरकार बना ली है.

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सूत्रों की मानें तो नीतीश कुमार को इस बात का बुरा लगा है कि लालू प्रसाद यादव ने इलज़ाम लगाया था कि नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने बनाया है. इस वक्त तो हालातों को देखते हुए यही पंक्तियाँ याद आ रही है कि ” टूटा नहीं दिल का रिश्ता गुफ्तगू याद तेरी आती रही…”

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नीतीश कुमार द्वारा उठाए गए इस कदम से लालू परिवार और बिहार की राजनीति में भूचाल सा आ गया है. जी हाँ एक टीवी चैनल को इंटरव्यू देते हुए लालू प्रसाद यादव की पत्नी राबड़ी देवी का नीतीश कुमार पर गुस्सा फूट फूट कर निकला जिसमें उन्होंने कहा है कि लालू प्रसाद यादव ने तो नीतीश कुमार को अपना छोटा भाई समझा था और उनके पास ही सारे अधिकार थे हमने कभी भी उसमें पाबंदियां नहीं लगायी हैं. ना ही हमारा सभापति है, न स्पीकर और न ही मुख्यमंत्री. राबड़ी देवी ने कहा कि नीतीश कुमार ने तो बड़े भाई की पीठ पर छुरा भोकने का काम किया है, जिसका जवाब तो उन्हें जनता ही देगी.

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राबड़ी देवी से जब पूछा गया कि आपके परिवार पर तो इतने आरोप लग रहे हैं वो क्यों ?

राबड़ी देवी का जवाब था कि कोई आरोप नहीं है बल्कि ये सब सोची समझी साजिश के तहत है जो नीतीश कुमार ने बीजेपी के साथ मिलकर बनाई . जिसकी तैयारी पिछले एक साल से चल रही थी और हम लोगों को सब पता था कि नीतीश कुमार हमारी पीठ पीछे छुरा भोकते हुए दिन में तो हमसे बात करते थे लेकिन रात को बीजेपी से उनकी बात होती थी.

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इतना ही नहीं राबड़ी देवी से जब कहा गया कि नीतीश कुमार को घुटन महसूस हो रही थी और उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए ये इस्तीफ़ा दिया है. इतने में ही राबड़ी देवी गुस्से से आग बबूला हो गयीं और उन्होंने  कहा कि नीतीश कुमार भ्रष्टाचार की क्या बात करते हैं वो खुद एक कातिल है उनपर केस भी चल रहा है. अगर इतने ही साफ़ सुथरे हैं तो मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दें और मैदान में  आयें…

राबड़ी देवी से जब कहा गया कि अगर वे कातिल थे तो आपने उनसे दोस्ती

क्यों की और गठबंधन क्यों किया ?

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इसपर भी उनका जवाब था कि वो और लालू प्रसाद नीतीश कुमार के पास नहीं गए थे बल्कि नीतीश कुमार खुद उनके पास आये थे और पैर पकड़ कर रो रहे थे तो लालू प्रसाद को उन पर दया आ गई और उन्होंने दोस्ती का हाथ बढ़ा लिया. लेकिन आज उनके इस धोखे से एक बात तो साफ हो गई है कि लालू जी ठीक ही कहते हैं कि नीतीश कुमार के पेट में दांत है…

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राबड़ी से जब पूछा कि सबका कहना है कि आप लोग परिवारवाद और पुत्र मोह कि वजह से मिटे हैं. आपके पास तो ना जानें कितनी दौलत है कितने बड़े बड़े घर हैं…

इतना सुनते ही राबड़ी देवी बौखला गई और उन्होंने कहा कि बड़े बड़े घर तो दुनिया में ना जानें कितनों के के पास हैं. राबड़ी बोलीं कि आप चाहें तो नीतीश कुमार, सुशील मोदी और नरेन्द्र मोदी को ही ले लीजिये ये लोग क्या बिना घर या पैसे के हैं ? या यूँ कहूँ कि ये लोग भिखमंगा है? ऐसे तो सभी नेताओं को अपनी जांच करानी चाहिए. इन लोगों ने कौन सा कभी अपनी जांच करायी है हमारी तो हो ही रही है हमारा सारा डाटा सरकार के पास है, CBI के पास है हमें किसी का डर नहीं है.

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राबड़ी देवी यहीं नहीं रुकीं उन्होंने कहा कि यह सब सोची  समझी साजिश है जिससे कि ये लोग उनके पति लालू प्रसाद यादव और बेटे तेजस्वी का राजनीतिक भविष्य ख़त्म कर सकें. तभी सभी विपक्षियों ने मिलकर हमारे पूरे परिवार पर केस कराया है जिसकी कोई ज़रूरत नहीं थी. राबड़ी देवी ने कहा कि हम डरे नहीं है हम फिर भी लड़ेंगे और इस बात का फैसला खुद जनता 27 अगस्त को करेगी.

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Rabri Devi Exclusive

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Posted by Rahul Kanwal on 2017 m. liepa 27 d.