देश में इस समय बीजेपी सरकार अपना परचम लहरा रही है, अधिकाँश भारतीय इलाकों में इस समय बीजेपी सरकार है और हाल ही में बिहार में भी बीजेपी ने कदम रख दिया है. इस बीच ख़ास बात ये रही है कि जब गोवा चुनाव हुए थे तो डिफेन्स मिनिस्टर मनोहर पर्रीकर को वहां का सीएम बना दिया गया और डिफेन्स मिनिस्टर की पोस्ट खाली हो गयी. ऐसे में कई लोगों ने सवाल उठाया कि आखिर इतनी बड़ी पोस्ट कैसे बीजेपी खाली रख सकता है ?  जवाब बीजेपी ने हर बार देंफेस से जुड़े सभी काम बेहतरीन तरीके से करते हुए दिया.

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देश की नज़र अभी बिहार और पाकिस्तान पर है ! 

इस समय पूरे देश की निगाहें बिहार और पाकिस्तान पर टिकी हैं जहां एक तरफ बिहार में बीजेपी आई है वहीं दूसरी तरफ पनामा मामले में फंसकर नवाज़ शरीफ को प्रधानमंत्री पद से हटना पड़ा. इस बीच एक ऐसी खबर आई जिसने सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर लिया है.

 

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अमित शाह को मिलेगा डिफेन्स मिनिस्टर का पद ! 

इस बीच एक बड़ी खबर आई है कि अमित शाह को अब डिफेन्स मिनिस्टर बनाया जा सकता है. दरअसल मोदी जी ने  गुजरात से अमित शाह और स्मृति इरानी को गुजरात का चेहरा बनाया है. इसके पीछे कारण ये बताया जा रहा है कि अमित शाह अभी राज्य सभा के मेम्बर नहीं है और वो यदि गुजरात से जीत जाएंगे तो मेम्बर बन जाएंगे. ऐसा करना इसलिए जरूरी है क्योंकि केंद्र के मंत्री मंडल में आने के लिए सांसद होना जरूरी है.

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आपको बता दें ये खबर मीडिया में पोपुलर हो रही हैं कि अमित शाह को अब रक्षा मंत्री बनाया जाएगा और इसके लिए उन्हें केंद्र में लाया जा रहा है. आपको बता दें 2017 में मनोहर पर्रीकर को डिफेन्स मिनिस्टर के पद से हटा दिया गया था और पद की ज़िम्मेदारी अरुण जेटली को दे दी गयी थी.  अभी इस खबर की किसी भी प्रकार की पुष्टि नहीं हुई है और सरकार के किसी सूत्र ने ऐसा नहीं कहा है. आपको बता दें इस समय चीन और भारत के बीच काफी विवाद चल रहा है जिसके चलते भारत में एक बेहतरीन रक्षा मंत्री की मांग उठ रही है.

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यूँ तो अमित शाह और नरेंद्र मोदी की दोस्ती दुनिया से छुपी नहीं है. जहाँ पीएम मोदी होते हैं वहां उनका साया बनकर अमित शाह का होना उतना ही लाज़मी है जितने किसी इंसान और धूप में उसके साए का.  सिर्फ एक दो नहीं ढूँढने जाइये तो ऐसे आपको सौ कारण मिलेंगें जिसके चलते अमित शाह को बीजेपी का दायाँ हाथ माना जाने लगा है. यहाँ ये कहना बिलकुल भी गलत नहीं होगा कि शाह की रणनीति और नेतृत्व के बदौलत ही 2014 चुनाव में बीजेपी और उसके सहयोगी दल को यूपी में 73 सीटें मिली थी. जिसमें अकेले बीजेपी मे 80 सीटों में 72 सीटें अपने नाम की थी,  लेकिन बीते कुछ समय से अमित शाह के हाव-भाव बदले नज़र आ रहे थे. खबर थी कि पीएम मोदी से अपनी दोस्ती के ताक पर रखकर अमित शाह कहीं और खोये हुयें हैं.

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पीएम मोदी से अमित शाह हैं बेहद करीब 

देश की सत्ताधारी पार्टी में मौजूदा समय में पीएम मोदी और अमित शाह को एक ऐसा स्तंभ माना जाता है जो आपस में भी काफी करीब हैं. ऐसा माना जाता है कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद शायद ही कोई ऐसा दिन गया हो जब पीएम मोदी और अमित शाह ने फोन पर बात ना की हो. देश का कोई भी मुद्दा हो अमित शाह और पीएम मोदी उसपर मशविरा ज़रूर करते हैं, लेकिन अब ऐसी खबरे आ रही हैं कि अमित शाह से बात करने के लिए पीएम मोदी को भी काफी समय तक इंतज़ार करना पड़ता है.

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अमित शाह का पार्टी से यूँ किनारा करने का कारण है एक 3 महीने की बच्ची? 

जी हाँ आपने बिलकुल सही पढ़ा है. दरअसल जिस वजह के चलते अमित शाह अब पार्टी के कामों में ढंग से ध्यान नहीं दे पा रहे हैं वो है एक 3 महीने की बच्ची और ये बच्ची कोई और नहीं बल्कि अमित शाह की पोती है. बता दें अभी बीते अप्रैल में ही अमित शाह दादा बने थे और उनकी पोती का नाम रुद्री बताया जा रहा है.

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रुद्री से रोज़ बात करते हैं अमित शाह

बताया जा रहा है रुद्री के पैदा होने से पहले अमित शाह का सारा समय बीजेपी के लिए हुआ करता था लेकिन घर में नन्हे मेहमान के आने के बाद से ही कहा जा रहा है कि अमित शाह कुछ भी करके दिन में लगभग तीन से चार बार अपनी पोती के लिए समय निकालते हैं. अमित शाह पोती के आने से इतने खुश और उत्साहित हैं कि अब रुद्री की आवाज़ सुने बिना अमित शाह का दिन ही नहीं बीतता. फिर वो चाहे रुद्री से बात करने के लिए वीडियो कॉल करते हैं या फिर स्काइप चैट.

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अमित शाह अपनी पोती को सिखा रहे हैं “थ्री मैजिकल वर्ड्स” 

एक रिपोर्ट के मुताबिक अमित शाह और उनकी पोती की मासूम बातचीत का गवाह है एक चैनल के संवाददाता, जिन्होंने इस न्यूज़ को कवर करते वक़्त खुद देखा था कि कैसे अमित शाह जतन करके अपनी पोती को “थ्री मैजिकल वर्ड्स” सीखाने पर तुले हुए हैं. बता दें कि वो थ्री मैजिकल वर्ड्स हैं “जय श्री राम”.

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अमित शाह को माना जाता है पीएम मोदी का सारथी 

वाकई में अमित शाह के बीजेपी के लिए किये गए असंख्य कामों की ही वजह से शायद उन्हें सारथि की ख्याति मिली हैं. राजनीति में जब भी कभी दो नेताओं की जोड़ी की मिसाल दी जाती है तो उसमे अमित शाह और पीएम मोदी की जोड़ी हमेशा ही शीर्ष पर होती है. माना जाता है कि जब पीएम मोदी गुजरात के सीएम हुआ करते थे तो भी नरेंद्र मोदी के चुनाव की कमान हमेशा ही अमित  शाह के हाथों में रहती थी.

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ऐसी कई वजह हैं जिनके चलते अमित शाह को पीएम मोदी का बेहद ही करीबी माना जाता रहा है. ये कहना कतई भी गलत नहीं होगा कि ये अमित शाह की ही रणनीति का नतीजा था है जिसके चलते हाल में बीजेपी ने 5 राज्यों के विधानसभा चुनाव में रिकॉर्ड तोड़ जीत दर्ज की थी. पार्टी सूत्रों की माने तो इन दिनों अमित शाह के ऊपर उन राज्यों की जिम्मेदारी है, जहां 2014 आम चुनावों में पार्टी कमजोर साबित हुई थी. जैसे पश्चिम बंगाल, ओडिशा, केरल आदि.