कश्मीर लेने की बात करने वाले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की खुद की कुर्सी चली गयी है. दरअसल पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप था जिसमें नवाज़ शरीफ पर आरोप तय हो चूका है| पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने आरोप को सही बताया है और उन्हें दोषी करार दिया है|  ये फैसला आने के बाद नवाज़ शरीफ पाकिस्तान के प्रधानमंत्री पद से हट जायेंगे.पाकिस्तान के हाईकोर्ट ने एनबी को आदेश दिया है कि दो हफ्तों के भीतर नवाज़ शरीफ और उनके परिवार पर केस दायर किया जाये और इसी के साथ कोर्ट ने नवाज़ शरीफ को तुरंत इस्तीफ़ा देने को कहा है.

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चीन के रिश्ते पर भी पड़ेगा असर

सच बात तो यह है कि चीन पाकिस्तान को फंड देकर अप्रत्यक्ष रूप से भारत में आतकंवाद फ़ैलाने के लिए पाकिस्तान का सहयोग करता है चीन और भारत के रिश्ते भी इस समय ठीक नही चल रहे है और भारत भी चीन के धमकी से न डरकर बल्कि अपने स्थान पर खड़ा है ऐसे में अगर पाकिस्तान और चीन के रिश्ते ख़राब हो जाते है तो चीन अकेला पड़ सकता है.  

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ की कुर्सी जाने के बाद पाकिस्तान और चीन के बीच संबध भी खट्टे हो सकते है. पाकिस्तान में नवाज़ के इस्तीफ़ा देने के बाद वहां सब अपने राजनीतिक उलटफेर में व्यस्त हो जायेंगे. चीन एशिया में पाकिस्तान का ही फायदा उठाकर अपना उल्लू सीधा करता रहता है. चीन के सभी पडोसी देश चीन से परेशान है ऐसे में पाकिस्तान ही ऐसा देश है जो चीन के साथ खड़ा नजर आता है. दरअसल चीन पाकिस्तान को सबसे ज्यादा फंड देने वालों में शामिल है. चीन से पैसा लेकर पाकिस्तान वही करता है जो चीन कहता है. अगर चीन पैसा देना बंद कर दे या नवाज़ शरीफ के जाने के बाद पाकिस्तान और चीन के रिश्ते ख़राब होते हैं तो इससे नुकसान दोंनो को ही होगा क्योंकि चीन भी पाकिस्तान को फंड देकर कहीं न कहीं भारत में आतंकवादी हमले करने के लिए प्रेरित करता है.

 

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पाकिस्तान की स्थिति हो सकती है ख़राब 

भारत से अलग होने के बाद से ही पकिस्तान किसी न किसी देश के फंड से जी रहा है. बात तो यह भी है कि अगर पाकिस्तान इन पैसों से अपने यहाँ के लोगो को पाल रहा होता तो भी ठीक था लेकिन पाकिस्तान फंड लेकर भारत के खिलाफ आतंकवाद फैलाने और भारत को परेशान करने के लिए उपयोग करता है. अगर यही पैसा पाकिस्तान अपने यहाँ विकास के लिए उपयोग में किया होता तो शायद आज पाकिस्तान की तस्वीर कुछ और होती.  चीन पाकिस्तान को सबसे ज्यादा फंड देने वाला देश है.अगर पाकिस्तान चीन के कहने के अनुसार नही चलता तो चीन पाकिस्तान को फंड देना बंद कर देगा जिसके बाद पाकिस्तान की स्थिति बेहद ख़राब हो सकती है.

 

 

कश्मीर की चाहत पर लग सकता है बड़ा झटका 

पाकिस्तान की कश्मीर पाने से ज्यादा की चाहत तो भारत को परेशान करने में रहती है.वो भी सिर्फ इसी लिए क्योकि चीन से मिलने वाले फंड से भारत को परेशान करने का जिम्मा होता है.  चीन हमेशा भारत को आँखे दिखाता है और भारत के साथ युद्ध करने की बात करता है  लेकिन अब इसके मंसूबों पर भी पानी फिर सकता है क्योंकि चीन जानता है कि पाकिस्तान एक तरफ से भारत को तो परेशान कर ही रहा है और दूसरी तरफ चीन भी करना शुरू कर दे तो भारत दबाव में आ जायेगा लेकिन अगर पाकिस्तान और चीन के रिश्ते ख़राब हो जाते है तो इसका सीधा फायदा भारत को होगा. पाकिस्तान भी अपने सही रास्ते पर वापस आ सकता है.

 

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नवाज़ शरीफ भ्रष्टाचार के मामले में दोषी करार

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि नवाज़ शरीफ रिकॉर्ड 3 बार पाकिस्तान के प्रधानमंत्री थे. शरीफ पर लगे आरोपों की जांच जे.आई.टी. की ६ सदस्यीय टीम ने की थी जिसने अपनी रिपोर्ट 10 जुलाई को ही कोर्ट में पेश कर दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने 21 जुलाई को अपनी सुनवाई पूरी कर ली और अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. इसके बाद पाकिस्तान के गृह मंत्री ने गुरूवार को कहा था कोई फैसला हमारे खिलाफ आने पर नवाज़ शरीफ इस्तीफ़ा दे देंगे और राजनीति से भी संन्यास ले लेंगे.

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भाई शहबाज़ संभालेंगे प्रधानमंत्री की कुर्सी

दोषी करार दिए जाने के बाद नवाज शरीफ को अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ेगी. कहा जा रहा है कि पाकिस्तान के अगले प्रधानमंत्री के रूप में नवाज़ शरीफ के भाई शहबाज़ शरीफ की ताजपोशी तय है. अगर मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो पनामा पेपर्स में कथित भ्रष्टाचार और मनी लॉड्रिंग के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद उनके छोटे भाई एक पंजाब प्रान्त के मुख्यमंत्री शाहबाज़ उनकी जगह लेलेंगे| कहा जा रहा है ये बात पहले ही तय हो गयी था.शाहबाज़ पाकिस्तानी संसद के निचली सदन के नेशनल असेम्बली के सदस्य नही है इसलिए वो तुरंत प्रधानमंत्री पद की नही ले सकते है इसके लिए उन्हें पहले चुनाव लड़ना होगा. पाकिस्तानी मीडिया की माने तो शाहबाज़ के चुनाव जीतने तक पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के 45 दिनों तक अंतरिम प्रधानमंत्री के तौर पर कार्यभार सभालने की संभावना है. यह फैसला पकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ (पीएमल-एन) की उच्चस्त्तरीय बैठक में लिया गया है.