इन दिनों भारत और चीन के बीच रिश्ते ठीक नही चल रहे हैं, डोकलाम को लेकर चीन आँखे दिखा रहा है और भारत ने उसकी हर धमकी का मुंहतोड़ जवाब दिया है. वैसे चीन इसके पहले भी भारत के मंसूबों पर पानी फेरने की कोशिश करते आया है. अगर बात करें तो NSG में सदस्यता की तो पाकिस्तान की मंशा के चलते चीन ने हमेशा अपने वीटो पॉवर का इस्तेमाल किया और भारत को शामिल होने से रोका लेकिन भारत के लिए एक अच्छी खबर आ रही है, जो चीन को बुरी लग सकती है. दरअसल भारत और अमेरिका के बीच रिश्ते मजबूत हुए हैं वहीं अमेरिका और चीन के बीच चल रही खटास का फायदा भारत को मिल रहा है.

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खबर ये है कि अमेरिका के रक्षा विभाग और राज्य विभाग ने एक रिपोर्ट US कांग्रेस से सांझा की है जिसमें भारत को एनएसजी (न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप) में शामिल करने के लिए अमेरिका ने अपनी बात को दोहराया है और साथ ही NSG मेम्बर्स से कहा कि वो NSG में सदस्यता के लिए भारत का समर्थन करें.  इस रिपोर्ट में अमेरिका ने सिर्फ NSG ही नही बल्कि आस्ट्रेलिया ग्रुप और वासनेर ग्रुप में भी शामिल करने की बात कही हैं. लिहाजा जिस तरीके से चीन भारत के रास्ते में रोड़ा बना हुआ है उसे लेकर अमेरिका की ये रिपोर्ट उसके इरादों को झटका देती है.

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क्या चाहता है अमेरिका

मोदी के विदेश दौरों का असर ऐसा रहा है कि अमेरिका और भारत के रिश्ते बेहतर हुए हैं और उसी का नतीजा है कि अमेरिका भारत को सिर्फ NSG ही नही ऑस्ट्रेलिया ग्रुप, वासनेर ग्रुप और मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल व्यवस्था में भी शामिल करना चाहता है. इन सभी ग्रुपों में शामिल करने के लिए अमेरिका अपने समर्थन की पुष्टि भी कर रहा है.

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चीन हमेशा बना रहा रोड़ा

NSG में शामिल होने के लिए भारत को इसके सभी 48 सदस्य देशों की रजामंदी चाहिए होगी और अमेरिका भारत का समर्थन काफी समय से कर रहा है, लेकिन भारत का पड़ोसी चीन उसकी इस राह में सबसे बड़ा रोड़ा बन रहा है. जब-जब उम्मीद बढ़ी कि भारत NSG का सदस्य बन जायेगा, चीन ने हर बार भारत को शामिल करने का विरोध किया है लेकिन जिस तरीके से अब अमेरिका ने एक रिपोर्ट में भारत को इस ग्रुप में शामिल करने के लिए अपने समर्थन की बात दोहराई है वो चीन और पाकिस्तान जैसे देशों के लिए एक झटका है.

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NSG क्या है ?

NSG मतलब न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप जोकि 48 देशों का एक ऐसा समूह है जिसमें शामिल देश आपस में परमाणु सामग्री का आयात-निर्यात और असैन्य कार्यों के लिये परमाणु तकनीकी का इस्तेमाल कर सकते हैं. भारत ने जब 18 मई 1974 में परमाणु परीक्षण किया तब इसके जवाब में दुनिया के बड़े देशों ने उसी साल यानी 1974 में ही NSG (न्यूक्लियर सप्लायर ग्रुप ) का गठन किया था.

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इस ग्रुप का कोई स्थायी कार्यालय नही है और इसके फैसले भी सदस्य देशों के मतों को लेकर किया जाता है. भारत 2008 से ही इस ग्रुप में शामिल होने की कोशिशों में लगा हुआ है लेकिन चीन जैसे देशों की वजह से ये पूरा न हो सका.

इसके सदस्य देश

शुरुआत में इस ग्रुप में सात सदस्य थे जिसमें सोवियत संघ, संयुक्त राज्य अमेरिका कनाडा,, फ़्रांस, जापान, और पश्चिमी जर्मनी तथा युनाइटेड किंगडम थे. अभी इस ग्रुप में कुल 48 सदस्य हैं, जिनमें  जर्मनी, यूनान, हंगरी, आयरलैंड, अर्जेंटिना, आस्ट्रेलिया, आस्ट्रिया, बेलारूस, बेल्जियम, ब्राजील, ब्रिटेन, बुल्गारिया, कनाडा, चीन, इस्टोनिया, फिएनलैंड.

भूरे रंग में  NSG सदस्य देश

फ्रांस, इटली, जापान, कजाकिस्तान, लातिवया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, नार्वे, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, रूस, स्लिवाकोया, स्लोवेिनया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्वीडन, स्वटि्जरलैंड, तुर्की, यूक्रेन और अमरीका और क्रोएशिया, साइप्रस, चेक गणराज्य, डेनमार्क.