एक बार फिर इस्लाम के ठेकेदार अपनी नींद से जागे हैं. इस बार उनके निशाने पर हैं भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ़, जिनकी गलती (इस्लाम के ठेकेदारों की नज़रों में) इतनी है कि उन्होंने अपनी और अपने बेटे की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दी. तस्वीर में मोहम्मद कैफ़ अपने बेटे के साथ शतरंज का खेल खेल रहे हैं. जी हाँ ये वो ही शतरंज का खेल है जिसे पूरी दुनिया में ‘दिमाग का खेल’ कहते हैं. इस बात को हर इंसान मानेगा कि शतरंज का खेल खेलने के लिए आपको भरपूर दिमाग की ज़रूरत होती है. यहाँ तक कि कई बार तो आपने ये तक बड़े-बुजुर्गों को कहते सुना होगा कि दिमाग बढ़ाना है तो उसे शतरंज खेलने को कहो.

मोहम्मद कैफ़ और उनके बेटे की वो तस्वीर जिसपर मचा है बवाल

क्यों शुरू हुआ विवाद?

यूँ तो ये कोई पहला मामला नहीं है जब मोहम्मद कैफ़ इस तरह से लोगों के निशाने पर हों, लेकिन इस बार की वजह कुछ ज्यादा ही अटपटी सी लगती है. दरअसल मामला शुरू हुआ 27 जुलाई, 2017 को जब  मोहम्मद कैफ ने सोशल मीडिया पर अपने बेटे के साथ चेस खेलती हुई तस्वीर शेयर की . जैसे ही ये तस्वीर धर्म के ठेकेदारों की नज़र में आई उन्होंने इसपर तरह-तरह के कमेंट करने शुरू कर दिए. किसी ने चेस के खेल को इस्लाम धर्म के खिलाफ बताया तो कोई चेस खेलना हराम बता रहा है.

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लोगों ने कैफ़ की तस्वीर पर क्या-क्या किया कमेंट

इस्लाम और शतरंज आज मोहम्मद कैफ़ की इस तस्वीर की वजह से चर्चा में हैं. इस तस्वीर को देखते ही जहाँ धर्म के ठेकेदारों ने तरह-तरह के कमेंट कर अपनी सोच का परिचय दे डाला तो वहीँ दूसरी तरफ कुछ लोगों ने इस बेबुनियाद बात के पीछे भी अपना तर्क दे डाला है.

 मोहम्मद कैफ़ की इस तस्वीर पर कमेंट करते हुए एक जनाब, अनवर शेख लिखते हैं कि, “भाई ये शतरंज का खेल तो हराम है.” इनका मतलब शतरंज के इस्लाम में हराम होने से है.

 तो वहीँ एक और यूजर उमर शरीफ़ मोहम्मद कैफ़ की इस तस्वीर पर बखेड़ा खड़ा करते हुए लिखते हैं कि, “कृपया करके कोई इन्हें (मोहम्मद कैफ़ को) दीन और क़ुरान सीखाओ, क्योंकि इन्हें शायद ऐसा लगता है कि अगर किसी मुस्लमान ने शतरंज खेल लिया तो उसे दीन और क़ुरान की समझ नही है.

धर्म के एक और ठेकेदार कमरुल हक़ भी इस तस्वीर पर अपनी राय जताने आते हैं और वो लिखते हैं कि, “लगे रहिये भाईजान. नयी दुनिया में नए शौक पालना अच्छी बात है, लेकिन ये शौक इस्लाम में कुबूल नहीं किया जायेगा. कमरूल को शायद ऐसा लग रहा है कि इस्लाम धर्म में की गयीं साड़ी गतिविधियां इनसे पूछ कर ही तय की जाती हैं.

मोहम्मद इमरान नाम के एक और यूजर इस फोटो पर कमेंट करते हुए लिखते हैं कि, “शतरंज इस्लाम में प्रतिबंधित है.”

यूं तो आप देखने जायेंगे तो इस एक तस्वीर पर आपको कई हजारों कमेंट मिल जायेंगें जिनमे से कुछ हम आपको यहाँ दिखा रहे हैं.  इसी तस्वीर पर एक यूजर इमरान खान लिखते हैं कि, “चेस खेलना इस्लाम में पाप हैं.”

आप भी जान लीजिये क्यों इस्लाम में हराम में शतरंज 

अब इतना कुछ देखने के बाद कहीं-ना-कहीं आपके दिमाग में ये सवाल तो ज़रूर उठा होगा कि आखिर इस्लाम में शतरंज हराम है तो क्यों है. तो चलिए ये भी हम आपको बता देते हैं. दरअसल इस सवाल का जवाब लेने के लिए आपको कहीं दूर नहीं बल्कि मोहम्मद कैफ़ की ही तस्वीर पर आये कॉमेंट्स को गौर से पढ़ना होगा. आपको ख़ुद-ब-ख़ुद पता चल जायेगा कि इस्लाम में शतरंज क्यों हराम है.

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वैसे तो शतरंज या कोई भी खेल इस्लाम में क्यों हराम है, या हराम है भी या नहीं ये बता पाना बिलकुल भी उचित नहीं है लेकिन मोहम्मद कैफ़ की इस तस्वीर पर कुछ यूजर्स ने बताया है कि, “शतरंज का खेल इस्लाम में इसलिए हराम है क्योंकि इसमें अक्ल की ज़रूरत होती है, जो इस्लाम के कुछ ठेकेदारों के पास नहीं है.”

एक और यूजर ने इस बात पर अपनी टिप्पणी करते हुए कहा कि, “हाँ ये हराम है. क्योंकि इसमें दिमाग लगता है जो आप लोगों के पास है नहीं. ये यूजर आगे लिखते हैं कि कभी मुझे भी इस्लाम के बारे में सिखाओ, इस्लाम बहुत बड़ा है इसे बजारू मत बनाइये.”

जानिए इस पूरे मामले पर क्या कहते हैं मोहम्मद कैफ़?

इस पूरे मामले की जानकारी जब मोहम्मद कैफ़ को लगती है तो वो भी ट्विटर पर इस बात पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए लिखते हैं कि, “क्या? ठेकेदारों से पूछिए क्या सांस लेना भी इस्लाम में हराम है या हम सांस अपनी मर्ज़ी से ले सकते हैं? कमाल करते हैं यार.”

याद दिला दें कि ये कोई पहला मौका नहीं है जब मोहम्मद कैफ़ इस तरह से सोशल मीडिया पर ट्रोल हुए हो. इससे पहले भी एक मौका आया था जब वो सूर्य नमस्कार करते हुए अपनी तस्वीर शेयर करके आलचकों के निशाने पर आ गये थे, और एक बार तो अंतर्राष्ट्रीय अदालत में कुलभूषण मामले में मिली राहत के बारे में भी ट्वीट करने पर कैफ़ को ये सुनना पड़ा था कि उन्हें अपने नाम के आगे से मोहम्मद हटा लेना चाहिए.