भारत देश में सेना का एक गौरवशाली इतिहास रहा है. आज हम आप अपने-अपने घरों में चैन से बैठें हैं तो इसके लिए सिर्फ-और-सिर्फ हमारे जवान ज़िम्मेदार हैं. हम आपको सुरक्षा मिल सके इसके लिए हमारे जवान जो आज सरहद पर तैनात हैं, वो क्या कुछ नहीं झेलते? हालाँकि देश का एक बुद्धिजीवी तबका ऐसा भी है जिन्हें सेना में भी खोट नज़र आता है. खैर, देश के बाहरी दुश्मन हो या हमारे देश के भीतर ही मौजूद कुछ देश और देश की शांति के दुश्मन, हमारी सेना को इनसे निपटना अच्छे से आता है.

देश का पहला मानवरहित टैंक मुंत्रा

अब सेना से जुड़ी एक खबर के अनुसार भारतीय सेना ने एक ऐसा अविष्कार किया है जिसके बाद अब कोई भी भारतीय सैनिक शहीद नही होगा. दरअसल अबतक मिली खबर के अनुसार रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने भारतीय सेना को एक ऐसा हथियार दिया है जो अपने आप में इतना शक्तिशाली है कि उसके बारे में जानकर दुश्मनों के छक्के छूट जायेंगे.

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जानिए इस हथियार की खासियत

दरअसल डिफेंस रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट ऑर्गनाइजेशन (DRDO) ने एक मानवरहित, या यूँ कहिये रिमोट से चलने वाला टैंक तैयार किया है. इस टैंक की खासियत ये है कि इस टैंक में तीन तरह के मॉडल्स विकसित किए गए हैं. ये टैंक सर्विलांस, अपने दम पर बारूदी सुरंग खोजने वाला और जिन इलाकों में न्यूक्लियर और जैविक हमला होने का अंदेशा होता है, वहां गश्त लगाने के लिए उपयोग किया जायेगा. सेना ने इस टैंक का नाम मुंत्रा (Muntra) रखा है.

मानवरहित टैंक मुंत्रा

अवाडी में सेना के लिए कॉम्बैट विहिकिल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टिब्लिशमेंट ने इस टैंक का परिक्षण किया गया है. हालाँकि इस टैंक को लेकर जब अर्धसैनिक बल से इसके बारे में बात की गयी तो उन्होंने इन टैंक्स का इस्तेमाल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में करने में रुचि दिखाई हैं. लेकिन इसके लिए टैंक में अभी कुछ संशोधन करने की जरूरत पड़ेगी.

Muntra-S

हाल ही में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को अवाडी के सीवीआरडी में श्रद्धांजलि देने के लिए डीआरडीओ ने साइंस फॉर सोल्जर्स नाम की एक प्रदर्शिनी लगाई थी और इसी प्रदर्शनी में दूर से ऑपरेट किए जाने वाले दो वाहनों को प्रदर्शित किया गया है.

डॉ. ऐपीजे अब्दुल कलाम को श्रद्धांजलि

देश का पहला मानवरहित टैंक है मुंत्रा 

बता दें Muntra-S देश का पहला मानवरहित ग्राउंड टैंक है. इस टैंक का निर्माण  सर्विलांस मिशन के लिए किया गया है. वहीं, Muntra-M को माइन्स का पता करने के लिए और Muntra-N को उन इलाकों में ऑपरेशन्स के लिए तैयार किया गया है, जहां परमाणु या जैविक हथियारों का खतरा रहता है.

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इस टैंक का राजस्थान के रेगिस्तानी इलाके में स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में परीक्षण किया गया है जिसमे इस टैंक को हर पैमाने में पास किया गया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि  इस रेगिस्तानी इलाके में तापमान 52 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, लेकिन बावजूद इसके सेना ने आराम से इस टैंक को दूर से चलाया.

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इस वाहन में लेजर रेंज फाइंडर, सर्विलांस रडार, इंट्रीग्रेटेड कैमरा लगा है, जो 15 किमी की दूरी से भी ग्राउंड में जासूसी के काम को बड़ी ही आसानी से अंजाम दे सकता है. बताते चलें कि यह मुंत्रा टैंक बड़े वाहन से लेकर रेंगते हुए किसी घुसपैठिए तक का पता लगा सकता है. प्रदर्शनी में सीसीपीटी वाहन भी दिखाया गया है, जो एक रिमोट कमांड सेंटर है.

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इसके अलावा इस प्रदर्शनी में नाइट विजन से लैस हेलमेट से लेकर नैनो-ड्राइवेन थर्मल एंड इलेक्ट्रोमैग्नैटिक प्रोटेक्शन और लेजर वेपेन्स को भी प्रदर्शित किया गया था.  इस प्रदर्शिनी में डीआरडीओ ने सैकड़ों प्रोडक्ट्स को दिखाया, जिसका मकसद अपने कर्मचारियों के विश्वास को बढ़ाने के साथ ही संगठन के प्रति सरकार के मन में बनी नकारात्मक धारणा को बदलना है.