आज के समय में अगर एक कोई ऐसी सुविधा है जो हम सब के पास मौजूद होती ही होती है तो वो है हमारा फ़ोन. छोटा-बड़ा,अमीर-गरीब हर इंसान ही आजकल फोन लिए घूमता है. ऐसे में अगर कोई आपसे मजाक में भी कह दें कि आप एक दिन अपने फोन से अलग होकर बिता दीजिये तो आज के हालात को देखते हुए ये कहना गलत नहीं होगा कि ये किसी काले-पानी की सजा से कम नहीं होगा. ऐसे में कई बार ऐसा भी होता है कि हम कई बार लोगों को कॉल करने के बजाय उन्हें मिस्ड कॉल कर देते हैं ये सोच कर कि पैसे बच जायेंगे, लेकिन ऐसा होता नहीं है.

source

मिस्ड कॉल से टेलिकॉम कंपनी की होती है कमाई

देश में मौजूदा वक़्त के मोबाइल यूजर्स की संख्या 1 अरब से ज्यादा हो गई है. जिनमें से अधिकतर मोबाइल यूजर्स ग्रामिण इलाके से आते हैं जो कि शहर में रह रहे अपने परिजनों से मिस्ड कॉल करके ही बात किया करते हैं. यहां यह कहना कतई भी गलत नहीं होगा कि मिस्ड कॉल से देश के लोग आपस में आसानी से जुड़ जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी महज़ एक मिस्ड कॉल से टेलीकॉम कंपनियों की कितनी कमाई होती है?

source

आपने मोबाइल टर्मिनेशन चार्ज का नाम सुना हो तो हम आपको बता दें कि ये वह चार्ज होता है जो एक कंपनी अपने नेटवर्क पर आने वाली दूसरी कंपनियों के इनकमिंग कॉल्स के लिए लगाती या कहिये निर्धारित करती है. आपकी जानकारी के लिए हम आपको बताते चलें कि  टेलीकॉम कंपनियों को दूसरे ऑपरेटर के नेटवर्क से आने वाली हर इनकमिंग कॉल पर कुछ तय राशि का टर्मिनेशन या इंटरकनेक्शन चार्ज मिलता है. जैसा कि फिलहाल हर इनकमिंग कॉल पर 14 पैसे चार्ज लगते हैं.

source

एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में मौजूदा टेलीकॉम ऑपरेटरों ने अपने 50 फीसदी नेटवर्क देश के ग्रामिण इलाकों में स्थापित किए हैं जिनमे से 40 फीसदी नेटवर्क से टेलीकॉम कंपनियों की कमाई समझ लीजिये ना के ही बराबर हुआ करती है. ऐसे में सवाल ये उठता है कि अगर कंपनियों को घाटा हो रहा है तो वे इस पर खर्च कर ही क्यों रही हैं?

source

तो हम आपको बता दें कि इसका सबसे बड़ा कारण एमटीसी ही है जिससे घाटे के बावजूद टेलिकॉम कंपनियों की कमाई होती है. इस कमाई के चलते कई टेलीकॉम कंपनियां एमटीसी चार्ज को बढ़ाने की मांग कर रही हैं. उनका मानना है कि उनके नेटवर्क पर इनकमिंग कॉल्स को पूरा करने के लिए करीब 30 पैसे का खर्च आता है.

source

हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक एमटीसी रिव्यू के लिए ट्राई के साथ हुई बैठक में आइडिया और एयरटेल ने जहां एमटीसी चार्ज को 30 पैसे प्रति मिनट करने की मांग की है, वहीं वोडाफोन ने इसे 34 पैसे करने की मांग उठाई है. तो जायज़ है कि अगर ऐसा होता है तो इसका असर कॉल रेट्स पर भी पड़ेगा, क्योंकि टैरिफ प्लान भी एमटीसी के हिसाब से ही तय किये जाते हैं.

source

यूँ तो मौजूदा एमटीसी 14 पैसा है, लेकिन अगर ट्राई इसे कम करने का आदेश देती है तो इससे यूजर्स को ही नुकसान होगा. साथ ही इससे  ग्रामिण इलाकों में नेटवर्क कनेक्टिविटी प्रभावित होगी, क्योंकि टेलीकॉम कंपनियों का कहना है कि एमटीसी कम होने से उन्हें नुकसान होगा और नुकसान की स्थिति में कोई भी कंपनी उनमे निवेश नहीं करना चाहेगी. ऐसे में अनचाहे कॉल्स और मैसेज में भी इजाफा होगा क्योंकि माना जा रहा है कि अपनी लागत निकालने के लिए कंपनियां ऐसा कर सकती हैं.